June 25, 2024

International Day for the Eradication of Poverty: क्यों और कब मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस

अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty) 17अक्टूबर,2023

“गरीबी प्रत्येक व्यक्ति के लिए मानवाधिकारों का हनन है। वास्तव में गरीबी पूरी तरह से भयावह है। यह न केवल दैनिक अभाव के जीवन, दुःख और पीड़ा की ओर ली जाती है बल्कि यह मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता के आनंद को भी रोकती है, जिसे हर इंसान को बिना किसी बाधा के आनंद लेने में सक्षम होना चाहिए।”

अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty)प्रत्येक वर्ष 17 अक्टूबर को विश्व भर में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य है विकासशील देशों में गरीबी और गरीबी उन्मूलन की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना। अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस गरीबी में रहने वाले लोगों के साथ सक्रिय भागीदारी के माध्यम से लोगों को गरीबी से बाहर लाने के प्रयास पर जोर देता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य विकासशील देशों में गरीबी समाप्त करना है।

International Day for the Eradication of Poverty_अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस 2023

अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty) 17अक्टूबर,2023

“गरीबी प्रत्येक व्यक्ति के लिए मानवाधिकारों का हनन है। वास्तव में गरीबी पूरी तरह से भयावह है। यह न केवल दैनिक अभाव के जीवन, दुःख और पीड़ा की ओर ली जाती है बल्कि यह मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता के आनंद को भी रोकती है, जिसे हर इंसान को बिना किसी बाधा के आनंद लेने में सक्षम होना चाहिए।”

अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty)प्रत्येक वर्ष 17 अक्टूबर को विश्व भर में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य है विकासशील देशों में गरीबी और गरीबी उन्मूलन की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना। अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty) गरीबी में रहने वाले लोगों के साथ सक्रिय भागीदारी के माध्यम से लोगों को गरीबी से बाहर लाने के प्रयास पर जोर देता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य विकासशील देशों में गरीबी समाप्त करना है।

अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस का इतिहास (History of International Day for the Eradication of Poverty)

अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty) मनाने की शुरुआत सर्वप्रथम 17 अक्टूबर 1987 को फ्रांस के पेरिस में हुई थी, जहां पर 1948 में मानवाधिकारों का सार्वभौमिक घोषणा पत्र पारित किया गया था। यहां पर हजारों लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने गरीबी को मानवाधिकारों का उल्लंघन मानते हुए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त किया। 

इस दिन के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 22 दिसंबर 1992 को प्रस्ताव पारित किया था और 1993 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा पहली बार अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty) मनाया गया था। तत्पश्चात प्रत्येक वर्ष 17 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस मनाया जाता है। इस दिन के द्वारा गरीबी में जीवन यापन कर रहे लोगों के साथ सक्रिय साझेदारी के द्वारा उन्हें निर्धनता से बाहर लाने के प्रयास पर बल दिया जाता है।

क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस(Why is International Day for the Eradication of Poverty Celebrated)

तकनीकी साधनों और वित्तीय संसाधनों के अभूतपूर्व स्तर की विशेषता वाली दुनिया में लाखों लोग अत्यधिक गरीबी में जीवन यापन कर रहे हैं। गरीबी केवल एक आर्थिक मुद्दा ही नहीं बल्कि यह एक बहुआयामी घटना है, जिसमें आय और सम्मान पूर्वक जीने की बुनियादी क्षमताओं दोनों की कमी शामिल है। गरीबी में रहने वाले व्यक्ति कई अंतरसंबंधित और परस्पर प्रबल अभावों का अनुभव करते हैं। 

उन्हें अपने अधिकारों का एहसास करने से रोकते हैं और उनको गरीबी में बनाए रखते हैं। अतः इस दिन गरीबों के लिए सम्मानजनक जीवन की परिस्थितियां निर्मित करके गरीबी को पूरी तरह से समाप्त करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस मनाया जाता है।

वैसे तो अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस(International Day for the Eradication of Poverty)विश्व में 1993 से ही मनाया जा रहा है लेकिन यह चिंता का विषय है कि आज भी विश्व में गरीबों की संख्या कम नहीं हुई बल्कि बढ़ी ही है। भारत में भी गरीबों के हालात बहुत अच्छे नहीं थे। आजादी के समय देश की कुल आबादी 32 करोड़ थी और 20 करोड लोग गरीब थे। आजादी के बाद तमाम आर्थिक विकास और गरीबी निवारण योजनाओं के बावजूद गरीबों की संख्या कम होने के बजाय 40 करोड़ तक पहुंच गई थी।

भारत में 2015 के बाद आई गरीबी में गिरावट

भारत में पिछले 14 वर्षों में गरीबों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 15 वर्षों में 41.5 करोड़ लोग गरीबी के चंगुल से बाहर निकले हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार 2005- 6 से लेकर 2019-21 तक भारत में गरीबी उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। भारत में 415 मिलियन लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।

23 करोड़ गरीब अभी भी है भारत में

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार गरीबी उन्मूलन में भारत को कामयाबी तो मिली है लेकिन अभी तक लगभग 23 करोड लोगों को गरीबी से बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण कार्य बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार भारत में राष्ट्रीय औसत से तेज दर से गरीबी में कमी आई है, लेकिन भारत देश में सबसे निर्धन राज्यों में बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश ऐसे राज्य हैं जहां गरीबी में तेजी से गिरावट आई है।

गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम

गरीबी उन्मूलन (Poverty eradication) के लिए भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में सतत विकास के हिस्से के रूप में कई योजनाएं शुरू की हैं। 2014 में गरीबों को बैंकों से जोड़ने के लिए जन- धन योजना शुरू की थी। समाज के वंचित वर्गों को बीमा सुरक्षा की सुविधा देने के लिए वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना शुरू की गई।

सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली महिलाओं को रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत की। इसी प्रकार गरीबों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, सौर ऊर्जा चरखा मिशन, प्रधानमंत्री श्रम योगी मान- धन जैसी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।

अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस 2023 की थीम (Theme of International Day for the Eradication of Poverty,2023)

संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रत्येक वर्ष अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस एक थीम के तहत मनाया जाता है। वर्ष 2023 के गरीबी उन्मूलन दिवस की थीम है-

“समय कार्य और सामाजिक सुरक्षा: सभी के लिए सम्मान को व्यवहार में लाना।”

(Decent Work and Social Protection:Putting Dignity in Practice for All)

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