पीएम मोदी जिन गायों को चारा खिला रहे जानिए उनका वैदिक, पौराणिक और वैज्ञानिक महत्व: Punganur cow

मकर संक्रांति की शुभ बेला पर पीएम मोदी छोटी-छोटी गायों से घिरे नजर आए थे। प्रधानमंत्री के आवास के इस दृश्य की तस्वीरों को जिसने भी देखा वह मंत्रमुग्ध हो गया, क्योंकि यह गौ सेवा की बेहतरीन तस्वीरें थीं। लेकिन यह तस्वीरें वायरल होने के बाद हर कोई यह जानना चाहता है कि पीएम आवास पर बछड़ों की तरह दिखने वाली यह गाय किस प्रजाति की हैं? उनकी क्या खासियत है? ये गायें प्रधानमंत्री आवास पर कैसे पहुंची।

पीएम मोदी जिन गायों को चारा खिला रहे जानिए उनका वैदिक, पौराणिक और वैज्ञानिक महत्व_Punganur cow

Punganur cow (पुंगनूर गाय ) || About Punganur cow || पुंगनूर गाय के बारे में

मकर संक्रांति की शुभ बेला पर पीएम मोदी छोटी-छोटी गायों से घिरे नजर आए थे। प्रधानमंत्री के आवास के इस दृश्य की तस्वीरों को जिसने भी देखा वह मंत्रमुग्ध हो गया, क्योंकि यह गौ सेवा की बेहतरीन तस्वीरें थीं। लेकिन यह तस्वीरें वायरल होने के बाद हर कोई यह जानना चाहता है कि पीएम आवास पर बछड़ों की तरह दिखने वाली यह गाय किस प्रजाति की हैं? उनकी क्या खासियत है? ये गायें प्रधानमंत्री आवास पर कैसे पहुंची।

आईए जानते हैं पीएम आवास पर बछड़े की तरह दिखने वाली इन गायों के बारे में-

पुंगनूर के नाम से जानी जाती हैं ये गायें (Punganur cow)

प्रधानमंत्री आवास पर दिखने वाली यह गायें कोई साधारण गायें नहीं बल्कि विशेष गायें हैं। इनकी विशेषता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनका इतिहास वेदों और महर्षि विश्वामित्र से जुड़ा हुआ है। यह दुनिया की सबसे छोटी गाये हैं। इनका दूध अमृत के समान माना जाता है। दुनिया की इन छोटी गायों को ‘पुंगनूर’ गाय  (Punganur cow) कहा जाता है। प्रधानमंत्री मोदी इन गायों के साथ न सिर्फ कई बार दिख चुके हैं बल्कि उनके आवास में भी इन विशेष गायों को पाला गया है।

वैदिक काल से है इनका अस्तित्व

पुंगनूर गाय (Punganur Cow) का अस्तित्व वैदिक काल से है। महर्षि विश्वामित्र के साथ भी पुंगनूर गाय की पौराणिक गाथा जुड़ी है। इससे भी हैरान करने वाली बात यह है कि दुनिया में इस प्रजाति की गायों की संख्या सिर्फ सैकड़ो में ही है। यह दुनिया की सबसे महंगी गायों में से एक है। एक ढाई फीट की गाय की कीमत लाखों में होती है। इतने छोटे कद की गाय एक दिन में 3 से 4 लीटर दूध देती है।

क्या है पुंगनूर गाय का इतिहास

पुंगनूर गायक का इतिहास प्राचीन काल से है। इन गायों का उल्लेख कई प्राचीन भारतीय ग्रन्थों में मिलता है। इस गाय का उपयोग हिंदू धर्म में धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी किया जाता है। हाल के वर्षों में पुंगनूर गाय की लोकप्रियता बढ़ रही है। चित्तूर जिले के ‘पुंगनूर’ जगह पर पाए जाने के कारण इस गाय की पहचान के साथ पुंगनूर का नाम जोड़ दिया गया है।

पुंगनूर गाय को भारत के अन्य राज्यों में भी प्रचारित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास से आने वाली तस्वीरों में अक्सर पुंगनूर गायें दिखती है।

पुंगनूर गाय का वैज्ञानिक दृष्टि से महत्व

Punganur cow (पुंगनूर गाय ) || About Punganur cow || पुंगनूर गाय के बारे में

पुंगनूर गायों का धार्मिक इतिहास के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी बहुत महत्व है। आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में पाई जाने वाली पुंगनूर गाय बेहद अनूठी हैं। इसे ‘ Mother of all Cows’ अर्थात सभी गायों की माता के रूप में जाना जाता है। यह गायें बहुत ही मजबूत और रोग प्रतिरोधी होती हैं। इन गायों का दूध बहुत ही पौष्टिक होता है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की उच्च मात्रा होती है। एक साधारण गाय के दूध में तीन से चार प्रतिशत वसा पाया जाता है, जबकि पुंगनूर गाय की नस्ल के दूध में 8 प्रतिशत तक वसा पाया जाता है।

आंध्र प्रदेश के काकीनाड़ा में एक वैद्य कृष्णम राजू ने इसकी नस्ल सुधार का जिम्मा 15 वर्ष पहले उठाया था। जिसके बाद पुंगनूर गाय को बचाने और इनकी संख्या बढ़ाने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार भी जाग गई है। आंध्र प्रकार प्रदेश सरकार ने मिशन पुंगनूर चलाया है।

इसी आंध्र प्रदेश में चुनावी सुगबुगाहट के बीच पुंगनूर गाय चर्चा में है और मोदी उसे बाहें फैला कर चारा खिला रहे हैं।

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