Lohri 2023 : क्या आप जानते हैं लोहड़ी कब और क्यों मनाई जाती है?(Do you know when and why Lohri is celebrated?)

Lohri Celebration || Lohri 2023 || Lohri Festival लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध त्योहार है। पंजाब, हरियाणा, जम्मू–कश्मीर, हिमाचल प्रदेश में लोहड़ी की तैयारी खास तरीके से होती है। लोहड़ी मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर मनाई जाती है। मकर संक्रांति की 1 दिन पूर्व संध्या के समय होली की तरह लकड़िया एकत्र करके जलाई जाती हैं और तिलों से अग्नि का पूजन किया जाता है।

Lohri 2023 in Hindi

Lohri 2023 : लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध त्योहार है। पंजाब, हरियाणा, जम्मू–कश्मीर, हिमाचल प्रदेश में लोहड़ी की तैयारी खास तरीके से होती है। लोहड़ी मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर मनाई जाती है। मकर संक्रांति की 1 दिन पूर्व संध्या के समय होली की तरह लकड़िया एकत्र करके जलाई जाती हैं और तिलों से अग्नि का पूजन किया जाता है।

लोहड़ी क्यों मनाई जाती है? इसके पीछे की धार्मिक मान्यता एवं लोक कथा

लोहड़ी से संबंधित धार्मिक मान्यता है कि दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के योगाग्नि–दहन की याद में यह आग जलाई जाती है। दूसरी लोग कथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि मकर संक्रांति के दिन कंस ने श्री कृष्ण को मारने के लिए लोहिता नामक राक्षसी को गोकुल में भेजा था जिसे कृष्ण ने खेल-खेल में ही मार डाला था। उसी घटना की स्मृति में लोहिता पर्व मनाया जाता है। सिंधी समाज में यह पर्व मकर संक्रांति के 1 दिन पूर्व ‘लाल लाही’ के रूप में मनाया जाता है।
लोहड़ी को दुल्ला भट्टी की कहानी से भी जोड़ा जाता है। मुगल शासक अकबर के समय में पंजाब में दुल्ला भट्टी रहता था जिसे पंजाब का नायक कहा जाता था। दुल्ला भट्टी गुलामी के लिए बलपूर्वक अमीरों को बेची जाने वाली लड़कियों को मुक्त कराकर उनका विवाह हिंदू लड़कों से कराने की व्यवस्था करता था।

कैसे मनाया जाता है लोहड़ी का पर्व? (How is the festival of Lohri celebrated?)

लोहड़ी के त्यौहार के दिन संध्या को होली की तरह लकड़िया एकत्रित करके जलाई जाती हैं और अग्नि देव को तिल अर्पित किया जाता है। इस त्यौहार पर बच्चे घर–घर जाकर लोहड़ी गाते हैं और लकड़िया एकत्रित करते हैं। प्रत्येक घर से बच्चे लोहड़ी मांगते हैं। बच्चों को तिल, मूंगफली, गुड़, रेवड़ी व गजक लोहड़ी के रूप में प्रदान की जाती है। दुल्ला भट्टी, जो अमीरों को लूटकर गरीबों में धन बांटता था, की प्रशंसा में गीत गाया जाता है।
लोहड़ी के दिन बड़े-बड़े अलाव जलाए जाते हैं। घरों के सामने लोग ऊंची उठती अग्निशिखाओं के चारों ओर एकत्रित होकर अलाव की परिक्रमा करते हैं तथा अग्नि को पके हुए चावल, मक्का के दाने, तिल, मूंगफली, गजक व अन्य चबाने वाले पदार्थ अर्पित करते हैं। लोहड़ी के दिन ‘आदर आए, दलिदार जाए’ गीत गाकर अग्निदेव की प्रार्थना की जाती है। इस प्रार्थना में अग्नि देव से समृद्धि की कामना की जाती।
नई नवेले शादी के जोड़े खासतौर से यह त्यौहार मनाते हैं। अग्नि की परिक्रमा करते हैं। अग्नि परिक्रमा के पश्चात लोग एक दूसरे को उपहार देते हैं और प्रसाद दिया जाता है। तिल, गजक, गुड़, मूंगफली तथा मक्का के दाने प्रसाद की पांच मुख्य वस्तुएं होती हैं। शीत ऋतु का सबसे महत्वपूर्ण व्यंजन मक्के की रोटी और सरसों का साग अलाव के चारों ओर बैठकर खाया जाता है।

लोहड़ी के अवसर पर संगीत और भांगड़ा का महत्व

लोहड़ी (Lohri) के दिन भांगड़ा नृत्य का बड़ा महत्व है। इस दिन सभी लोग रंग-बिरंगे कपड़ों में बनठन कर आते हैं। पुरुष पजामा व कुर्ता पहनते हैं। कुर्ते के ऊपर जैकेट जिनके चारों ओर घोटा लगा होता है। इसी से मिलती-जुलती पकड़िया होती हैं। पुरुष अलाव के चारों ओर भांगड़ा नृत्य करते हैं। नगाड़ों की ध्वनि के बीच भांगड़ा नृत्य एक लड़ी की भांति देर तक चलता रहता है। स्त्रियां भांगड़े में हिस्सा नहीं लेती हैं। वह अलग आंगन में अलाव जलाकर गिद्दा नृत्य करती हैं।

लोहड़ी पर्व को मनाने का उद्देश्य (Purpose of celebrating Lohri festival)

जिस समय लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है उस समय शीत ऋतु अपनी चरम सीमा पर होती है। घने कोहरे के बीच सबकुछ ठहरा–सा प्रतीत होता है। इस शीतग्रस्त सतह के नीचे बड़े-बड़े अलाव बनाए जाते हैं। इन अलावों में जीवन की गर्मजोशी छिपी रहती है। कहते हैं ठंड से बचने के लिए इस दिन हमारे बुजुर्ग मंत्र पढ़ते थे। इस मंत्र में सूर्यदेव से प्रार्थना की जाती थी कि इस माह में अपनी किरणों से पृथ्वी को इतना गर्म कर दें कि पौष की ठंड से कोई भी नुकसान न पहुंच सके। वे लोग पौष माह की आखिरी रात को आग के सामने बैठकर इस मंत्र को बोलते थे कि सूरज ने उन्हें सीट से बचा लिया।

पंजाब का प्रमुख त्यौहार है लोहड़ी (Lohri is the main festival of Punjab)

पंजाब में लोहड़ी की महत्ता एक पर्व से भी अधिक है। पंजाबी लोक तगड़े, ऊर्जावान, जोशीले व स्वाभाविक रूप से हंसमुख होते हैं। उत्सव, प्रेम व हल्की छेड़छाड़ तथा स्वच्छंदता ही लोहड़ी पर्व का प्रतीक है। आधुनिक समय में व्यस्तताओं के बीच भी लोहड़ी पर्व हमें बाहर खींच लाता है।

लोहड़ी पर्व का संदेश (message of lohri festival)

लोहड़ी का पर्व हमें यह संदेश देता है कि हम सब एक हैं। आपसी भाईचारे की भावना तथा ईश्वर को धरती पर सुख शांति और धन–धान्य की प्रचुरता के लिए धन्यवाद देने की भावना इस दिन प्रत्येक व्यक्ति के मन में होती है।