About Union Budget: जानिए आम बजट में इस्तेमाल होने वाले भरी भरकम शब्दों के अर्थ

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About Union Budget: देश का आम बजट 1 फरवरी को पेश होने वाला है। सरकार साल भर से कहां से कितना कमाएगी और कितना खर्च करेगी, बजट में यह सारी जानकारी होती है। वित्त मंत्री के बजट भाषण में कई ऐसे शब्दों का इस्तेमाल होता है जिसे समझ पाना मुश्किल होता है। आइए इन सभी शब्दों को आसान भाषा में समझते हैं, जिससे आप बजट को अच्छी तरह समझ पाएंगे

कितने प्रकार के होते हैं बजट ?

बजट साधारणत: तीन प्रकार के होते हैं-

  1. बैलेंस बजट(Balanced Budget)- इसमें सरकार की कमाई और खर्च बराबर होता है।
  2. सरप्लस बजट Surplus Budget)- इसमें सरकार की कमाई खर्च से ज्यादा होती है।
  3. डेफिसिट बजट (Deficit Budget) – इसमें सरकार की कमाई खर्च से कम होती है।

बजट भाषण में इस्तेमाल होने वाले शब्द

वित्त विधेयक(Finance Bill)

बजट पेश होने के बाद सरकार संसद में वित्त विधेयक पेश करती है। इसमें सरकार की कमाई के तमाम स्रोतों का ब्योरा होता है।

विनियोग विधेयक (Appropriation Bill)

फाइनेंस बिल के साथ ही एप्रुपरिएशन बिल भी संसद में पेश किया जाता है। इसमें सरकार अपने खर्चों की जानकारी सदन में रखती है।

बजट अनुमान(Budget Estimate)

आने वाले आर्थिक वर्ष में सरकार जो खर्च और कमाई का अनुमान बताती है उसे बजट ऐस्टीमेट कहते हैं।

राजकोषीय घाटा(Fiscal Deficit)

इसका अर्थ है कमाई कम और खर्च ज्यादा अर्थात सरकार घाटे में है तो राजकोषीय घाटा कहते हैं।

राजकोषीय मुनाफा(Fiscal Surplus)

फिस्कल सरप्लस फिस्कल डेफिसिट के ठीक उल्टा होता है। अर्थात सरकार की कमाई ज्यादा होती है और खर्च कम होता है। इसका अर्थ है सरकार फायदे में है और इसे फिस्कल सरप्लस कहते हैं।

राजस्व घाटा(Revenue Deficit)

रिवेन्यू डेफिसिट का अर्थ है सरकार ने कमाई का जो टारगेट सेट किया था उतनी कमाई नहीं हुई।

समेकित निधि (Consolidated Fund)

सरकार जो कामाती है, जैसे उधार की राशि या सरकारी कार्यों पर मिला ब्याज सब कुछ समेकित निधि में जाता है। आमतौर पर सरकार के सभी खर्च इसी फंड से किए जाते हैं। इन पैसों को निकालने के लिए संसद की मंजूरी आवश्यक होती है।

आकस्मिक निधि(Contingency Fund)

सरकार आकस्मिक हालातो में जो फंड से पैसा निकालती है उसे आकस्मिक निधि कहते हैं। इसे निकालने के लिए संसद की मंजूरी आवश्यक नहीं होती। इसमें से जितनी रकम निकाली जाती है उसे बाद में कंसोलिडेटेड फंड यानी समेकित निधि में से लौटना होता है।

पब्लिक अकाउंट(Public Account)

इस फंड में वह सारे पैसे आते हैं जो सरकार को एक बैंकर के तौर पर मिलते हैं। जैसे प्छोटी बचत योजनाओं से मिली रकम। सरकार इसमें से भी अपने खर्चों के लिए पैसे निकाल सकती है। इसके लिए संसद की मंजूरी आवश्यक नहीं होती लेकिन इसमें यह ध्यान रखने वाली बात है कि यह पैसा सरकार का नहीं होता है। इसे उसके इन्वेस्टर्स को लौटाना होता है। इसलिए सरकार पब्लिक अकाउंट में से एक सीमा तक ही पैसे निकल सकती हैं।

राजस्व व्यय (Revenue Expenditure)

देश चलाने के लिए सरकार को जिस खर्च की जरूरत होती है उसे रिवेन्यू एक्सपेंडिचर कहते हैं। यह खर्च कर्मचारियों की सैलरी, मंत्रालयों और विभागों का बिजली, पानी आदि का बिल, सब्सिडी देने, सैलरी देने, राज्य सरकारों को ग्रांट देने में होता है।

कैपिटल एक्सपेंडिचर या पूंजीगत व्यय(Capital Expenditure)

यह एक ऐसा खर्च है जिससे भविष्य में सरकार की कमाई होती है। इसका इस्तेमाल संपत्तियां या इक्विपमेंट खरीदने के लिए किया जाता है।

डिस इनवेस्टमेंट

जब सरकार सरकारी कंपनियों की कुछ हिस्सेदारी बेचकर कमाई करती है तो इसे डिसइनवेस्टमेंट कहते हैं।

बजट भाषण में आम आदमी को जिस बात का बेसब्री से इंतजार रहता है वह है टैक्स यानी कर तो आईए जानते हैं टैक्स कितने प्रकार के होते हैं-

प्रत्यक्ष कर(Direct Tax)

यह वह टैक्स है जो सरकार आम आदमी से लेती है जैसे, इनकम टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स।

अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax)

यह वह कर है जो सरकार अप्रत्यक्ष रूप से लेती है, जैसे- एक्साइज ड्यूटी, कस्टम ड्यूटी आदि।

इनकम टैक्स(Income Tax)

जो टैक्स आपकी कमाई पर लगता है उसे इनकम टैक्स कहते हैं। यदि आपने कोई इंवेस्टमेंट किया है और आपको कोई ब्याज मिल रहा है तो उस पर भी इनकम टैक्स देना होता है।

कॉरपोरेट टैक्स (Corporate Tax)

कंपनियों को अपनी कमाई पर जो टैक्स सरकार को देना होता है उसे कॉरपोरेट टैक्स कहते हैं

एक्सेंप्शन(Exemption )

यह करदाता की वह इनकम है जो टैक्स के दायरे में नहीं आती, यानी इस पर कोई टैक्स नहीं लगता है।