July 12, 2024

क्या है डार्क वेब (Dark Web)? जहां यूजीसी- नेट का पेपर हुआ लीक

क्या है डार्क वेब (Dark Web)? जहां यूजीसी- नेट का पेपर हुआ लीक

यूजीसी नेट की परीक्षा 18 जून को संपन्न हुई थी लेकिन 19 जून को ही यूजीसी- नेट का पेपर परीक्षा से पहले ही लीक होने की जानकारी मिलने पर यूजीसी- नेट परीक्षा रद्द कर दी गई।

यूजीसी- नेट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि गृह मंत्रालय की साइबर विंग 14C ने 19 जून की दोपहर 3:00 बजे रिपोर्ट दी की परीक्षा के पेपर डार्क वेब पर लीक हो गए थे। जब इसका मिलान किया गया तो पाया गया कि प्रश्न पत्र एक जैसे थे और लीक हुए प्रश्न पत्र टेलीग्राम पर थे। यूजीसी- नेट के प्रश्न पत्र डार्क वेब पर लीक हुए लेकिन क्या आप जानते हैं कि डार्क वेब क्या होता है ? आइए जानते हैं –

इंटरनेट ने हमारी जिंदगी को काफी आसान और सरल बना दिया है, क्योंकि यहां पर आपको पेरेंटिंग्स से लेकर स्टडीज तक जॉब से लेकर बैंकिंग तक हर चीज से जुड़ी जानकारी पलक झपकते ही मिल जाती है। लेकिन जिस इंटरनेट की हमें आदत पड़ चुकी है, उसकी एक डार्क साइड भी है और वह है डार्क वेब।

क्या है डार्क वेब (What is Dark Web) ?

इंटरनेट को हम जितना आसान समझते हैं, उतना आसान नहीं है बल्कि बहुत ही पेचीदा है। इंटरनेट के वेब को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है-

  • सर्फेस वेब (Surface Web)
  • डीप वेब (Deep Web)
  • डार्क वेब ( Dark Web)

1-सरफेस वेब (Surface Web)

जितना इंटरनेट हम इस्तेमाल करते हैं वह पूरे इंटरनेट का सिर्फ चार प्रतिशत होता है और इसे सरफेस वेब (Surface Web)कहते हैं। जो भी हम गूगल, यूट्यूब पर सर्च करते हैं या जितना कंटेंट लाखों वेबसाइट्स पर देखते हैं, यह सिर्फ 4% का हिस्सा है। ऐसी वेबसाइट की सर्च इंजन द्वारा इंडेक्सिंग की जाती है। इसलिए इन तक सर्च इंजन के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। इसे विजिबल वेब (Visible Web), इंडेक्सड वेब(Indexed Web),इंडेक्सेबल वेब (Indexable Web) या लाइटनेट भी कहा जाता है।

2 – डीप वेब (Deep Web)

डीप वेब (Deep Web) इंटरनेट का वह हिस्सा है जो सर्च इंजन से छुपा होता है। यहां ऐसी वेबसाइट्स होती हैं जो गूगल या दूसरे सर्च इंजन पर नहीं मिलेंगी,जैसे बैंक डिटेल, किसी प्राइवेट कंपनी का डाटा, सरकार की सीक्रेट जानकारी आदि। इनको एक्सेस करने के लिए आपको एक लिंक, अलग से यूजर नेम और पासवर्ड की जरूरत होती है। कोई भी गुमनाम व्यक्ति यहां तक नहीं पहुंच सकता।

डीप वेब के किसी डॉक्यूमेंट तक पहुंचने के लिए यूजर नेम और पासवर्ड के द्वारा उसके URL एड्रेस पर जाकर लॉग इन करना होता है। डीप वेब सरफेस वेब से आकार में लगभग 500 से 600 गुना बड़ा होता है।

3 – डार्क वेब (Dark Web)

डार्क वेब (Dark Web) को इंटरनेट का अंडरवर्ल्ड कहा जाता है, जहां पर ज्यादातर गैर कानूनी काम होते हैं। यह इंटरनेट के समुद्र का वह हिस्सा है जहां पर बड़ी-बड़ी साजिशें होती है और लोगों को अपना शिकार बनाती हैं। यहां पर ऐसी वेबसाइट्स और लिंक होते हैं जिन्हें आप ब्राउज़र पर भी नहीं खोल पाते। डार्क वेब इंटरनेट की ऐसी दुनिया है जो सामने दिखती नहीं लेकिन उसका अस्तित्व है। यदि आप गूगल, याहू आदि सर्च इंजन के जरिए डार्क वेब पर जाना चाहेंगे तो आपको इसका पता नहीं चलेगा।

डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है जिसे आमतौर पर प्रयोग किए जाने वाले सर्च इंजन से एक्सेस नहीं किया जा सकता है। डार्क वेब की साइट को टॉर (TOR- The Onion Router) इंक्रिप्शन टूल की सहायता से छुपा दिया जाता है, जिसकी वजह से सामान्य सर्च इंजन द्वारा डार्क वेब की साइट तक नहीं पहुंचा जा सकता।

डार्क वेब की साइट्स तक पहुंचाने के लिए विशेष टूल ‘टॉर’ का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि इसमें एकल असुरक्षित सर्वर के विपरीत नोड्स के एक नेटवर्क का उपयोग करते हुए परत दर परत डेटा का एन्क्रिप्शन होता है जिससे यूजर्स की गोपनीयता बनी रहती है।

गैर कानूनी कामों के लिए होता है डार्क वेब का इस्तेमाल

डार्क वेब चलाने के लिए यूआरएल(URL)और एक्सटेंशन (Extension) अलग होते हैं। गूगल की बाकी साइट्स पर .com, .org और .edu जैसे एक्सटेंशन मिलते हैं लेकिन डार्क वेब पर .onion जैसे एक्सटेंशन का इस्तेमाल किया जाता है। डार्क वेब के एक्सटेंशन में ऐसे शब्द मिलेंगे जो कई सारे लेटर और नंबरों के साथ मिलकर बने होते हैं। ऐसे शब्दों का इस्तेमाल बहुत कम होता है। जिन्हें ढूंढना काफी मुश्किल होता है।

डार्क वेब (Dark Web)पर बहुत सी ऐसी साइट्स हैं जिन तक पहुंचने के लिए ट्रिक्स का इस्तेमाल करना पड़ता है। दुनिया भर के गैर कानूनी काम के लिए डार्क वेब का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे फिशिंग, स्कैम, हैकिंग, चोरी, अकाउंट हैक करना, अवैध कंटेंट, क्रेडिट कार्ड को बेचना, चाइल्ड पोर्नोग्राफी आदि। डार्क वेब में चुराया हुआ डेटा मौजूद होता है जिसे गैर कानूनी तरीके से डार्क वेब पर बेंचा जाता है।

डार्क वेब(Dark Web)पर बेसा माफिया, अज़रबैजान जैसी वेबसाइटों के जरिए बड़े कॉन्ट्रैक्ट किलिंग जैसी वारदातों को अंजाम दिया जाता था। लोलिता सिटी और प्ले पेन जैसी डार्कलेट वेबसाइट पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी के कंटेंट डाले जाते हैं। डार्क वेब पर क्रिप्टोकरेंसी, फेक ड्राइविंग लाइसेंस और फेक पासपोर्ट का भी कारोबार चलता है।

क्या डार्क वेब पर अपराधियों को ट्रेस किया जा सकता है ?

डार्क वेब(Dark Web)पर एक्टिव रहने वाले लोगों को ट्रेस करना बेहद मुश्किल होता है। यह लोग कहां से ऐसी वेबसाइट को ऑपरेट करते हैं इसका कुछ पता नहीं चल पाता है। केवल आईपी एड्रेस के जरिए ट्रेस करना आसान नहीं होता है। ऐसे एड्रेस को ट्रेस करने के लिए साइबर एक्सपर्ट की आवश्यकता पड़ती है। किसी भी डिपार्टमेंट में साइबर एक्सपर्ट्स की कमी अपराधियों तक पहुंचने में उनको असफल बनती है। डार्क वेब की प्रत्येक एक्टिविटी पर नजर रखना बेहद चुनौती पूर्ण होता है। अगर ट्रेसिंग हो भी जाती है तो डार्क वेब ऑपरेट करने वाला गैंग कहीं विदेश में बैठा होता है। इसलिए डार्क वेब पर चल रहे अपराधों को रोकना इंटेलिजेंस एजेंसियों के लिए लोहे के चने चबाने जैसा काम है।