भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का स्थापना दिवस : Foundation Day of the Indian National Congress

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का स्थापना दिवस (138th Foundation Day of the Indian National Congress) भारतीय इतिहास में ए ओ ह्यूम (
Allan Octavian Hume)को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना करने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने ही सर्वप्रथम मार्च 1883 में कोलकाता विश्वविद्यालय के स्नातकों से यह अपील की कि वे सभी मिलजुल कर भारतीय स्वाधीनता के लिए प्रयत्न करें। इस अपील का शिक्षित समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा और वे एक अखिल भारतीय संगठन की आवश्यकता महसूस करने लगे। इस दिशा में पहला कदम सितंबर, 1884 में उठाया गया, जब अडयार (मद्रास) में थियोसोफिकल सोसायटी का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें ह्यूम, दादा भाई नौरोजी और सुरेंद्रनाथ बनर्जी आदि शामिल हुए। इसी के बाद 1884 ईस्वी में ‘इंडियन नेशनल यूनियन’ नामक देशव्यापी संगठन स्थापित हुआ, जिसका उद्देश्य था भारत की सामाजिक समस्याओं के संबंध में विचार विमर्श करना। इसी समय ह्यूम ने तत्कालीन वायसराय लॉर्ड डफरिन से विचार-विमर्श किया और ऐसा माना जाता है कि ‘इंडियन नेशनल कांग्रेस’ डफरिन के ही दिमाग की उपज थी।

138th Foundation Day Of Indian National Congress party

 138th Foundation Day of the Indian National Congress (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 138वां स्थापना दिवस) :

 भारतीय इतिहास में ए ओ ह्यूम (Allan Octavian Hume) को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना करने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने ही सर्वप्रथम मार्च 1883 में कोलकाता विश्वविद्यालय के स्नातकों से यह अपील की कि वे सभी मिलजुल कर भारतीय स्वाधीनता के लिए प्रयत्न करें। इस अपील का शिक्षित समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा और वे एक अखिल भारतीय संगठन की आवश्यकता महसूस करने लगे। इस दिशा में पहला कदम सितंबर, 1884 में उठाया गया, जब अडयार (मद्रास) में थियोसोफिकल सोसायटी का वार्षिक अधिवेशन हुआ, जिसमें ह्यूम, दादा भाई नौरोजी और सुरेंद्रनाथ बनर्जी आदि शामिल हुए। इसी के बाद 1884 ईस्वी में ‘इंडियन नेशनल यूनियन’ नामक देशव्यापी संगठन स्थापित हुआ, जिसका उद्देश्य था भारत की सामाजिक समस्याओं के संबंध में विचार विमर्श करना।

इसी समय ह्यूम ने तत्कालीन वायसराय लॉर्ड डफरिन से विचार-विमर्श किया और ऐसा माना जाता है कि ‘इंडियन नेशनल कांग्रेस’ डफरिन के ही दिमाग की उपज थी। डफरिन भी चाहता था कि भारतीय राजनीतिज्ञ वर्ष में एक बार एकत्र हो, जहां पर वे प्रशासन के कार्यों के दोष एवं उसके निवारण हेतु सुझावों द्वारा सरकार के प्रति अपनी वास्तविक भावना प्रकट करें ताकि प्रशासन भविष्य में घटने वाली किसी घटना के प्रति सतर्क रहें। ह्यूम, डफरिन की योजना से सहमत हो गए। इस संगठन की स्थापना से पूर्व ह्यूम इंग्लैंड गए जहां उन्होंने रिपन, डलहौजी, जान ब्राइट एवं स्लेग जैसे राजनीतिज्ञों से इस विषय पर व्यापक विचार विमर्श किया। भारत आने से पहले ह्यूम ने इंग्लैंड में भारतीय समस्याओं के प्रति ब्रिटिश संसद के सदस्यों में रुचि पैदा करने के उद्देश्य से एक ‘भारत संसदीय समिति’ की स्थापना की।

भारत आने पर ह्यूम ने ‘इंडियन नेशनल यूनियन’ की एक बैठक मुंबई में 25 दिसंबर, 1885 में की। जहां पर व्यापक विचार विमर्श के बाद इंडियन नेशनल यूनियन का नाम बदलकर ‘इंडियन नेशनल कांग्रेस’ या ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस'(Indian National Congress) रखा गया। यहीं पर इस संस्था ने जन्म लिया। पहले इसका सम्मेलन पुणे में होना था परंतु वहां हैजा फैल जाने के कारण स्थान परिवर्तित कर मुंबई में इसका आयोजन किया गया।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के स्थापना दिवस के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य (Important facts about Foundation Day of the Indian National Congress )

  • स्थापना वर्ष- 28 दिसंबर,1885
  • स्थान- मुम्बई (गोकुलदास तेजपाल संस्कृत
    कालेज भवन)
  • संस्थापक- एलन ऑक्टेवियन ह्यूम
  • प्रथम अध्यक्ष- व्योमेश चन्द्र बनर्जी
  • कुल सदस्य- 72,
  • मेश चन्द्र बनर्जी
    कुल सदस्य- 72, जिनमे महत्वपूर्ण थे : दादा भाई नौरोजी, बी राघवाचार्य, एन जी चंदावरकर, एस सुब्रमण्यम आदि।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस बनाने का उद्देश्य (Purpose of forming the Indian National Congress)

देश हित के लिए प्रयासरत भारतीयों में परस्पर संपर्क एवं मित्रता को प्रोत्साहन देना, देश के अंदर धर्म, वंश एवं प्रांत संबंधी विवादों को खत्म कर राष्ट्रीय एकता की भावना को प्रोत्साहित करना, शिक्षित वर्ग की पूर्ण सहमति से महत्वपूर्ण एवं आवश्यक सामाजिक विषयों पर विचार विमर्श करना तथा यह निश्चित करना कि आने वाले वर्षों में भारतीय जनमानस के कल्याण हेतु किस दिशा में कार्य किया जाए।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस बनाने का प्रस्ताव (Proposal to form Indian National Congress)

इस सम्मेलन में कुल 9 प्रस्ताव पास किए गए, ये प्रस्ताव थे –

  1. भारतीय शासन की जांच के लिए एक ‘रॉयल कमीशन’ नियुक्त किया जाए
  2. इंग्लैंड में कार्यरत ‘इंडिया कौंसिल’ को समाप्त किया जाए
  3. प्रांतीय तथा केंद्रीय व्यवस्थापिका का विस्तार किया जाए, परिषद में मनोनीत सदस्यों के स्थान पर चुने गए प्रतिनिधि सम्मिलित किए जाए
  4. इंडियन सिविल सर्विस परीक्षा का आयोजन भारत एवं इंग्लैंड दोनों स्थानों पर किया जाए, साथ ही अधिकतम उम्र की सीमा 19 से बढ़ाकर 23 वर्ष की जाए
  5. सैन्य व्यय में कटौती की जाए
  6. इंग्लैंड से आयात किए गए कपड़ों पर पुनः आजाद कर लगाया जाए
  7. वर्मा को अलग किया जाए
  8. समस्त प्रस्तावों को सभी प्रदेशों की सभी राजनीतिक संस्थाओं को भेजा जाए जिससे वे इनके क्रियान्वयन की मांग कर सके और
  9. कांग्रेस का अगला सम्मेलन कोलकाता में बुलाया जाए

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना पर विभिन्न विद्वानों ने अपना मत प्रकट किया। लाला लाजपत राय ने अपनी पुस्तक ‘यंग इंडिया’ में लिखा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना का मुख्य कारण यह था कि इसके संस्थापकों की इच्छा ब्रिटिश साम्राज्य को छिन्न-भिन्न होने से बचाने की थी। ह्यूम(Allan Octavian Hume) के जीवनी कार वेडरबर्न ने लिखा भारत में असंतोष की बढ़ती हुई शक्तियों से बचने के लिए एक अभय दीप की आवश्यकता है और कांग्रेसी आंदोलन से बढ़कर अभय दीप दूसरी कोई चीज नहीं हो सकती। एनी बेसेंट ने लिखा कि ‘राष्ट्रीय कांग्रेस का जन्म मातृभूमि की रक्षा हेतु 17 प्रमुख भारतीयों तथा ह्यूम के द्वारा हुआ।

एलन ऑक्टेवियन ह्यूम कौन थे ? (Who was Allan Octavian Hume?)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक एलन ऑक्टेवियन ह्यूम (Allan Octavian Hume) स्कॉटलैंड के निवासी थे। इंडियन सिविल सर्विस में ह्यूम ने कई वर्षों तक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ‘महामंत्री’ पद पर नियुक्त हुए, जिस पर उन्होंने 1906 ईसवी तक कार्य किया। उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पिता के नाम से भी जाना जाता है।1885 ईस्वी के बाद लगभग 22 वर्षों तक ह्यूम ने कांग्रेसमें सक्रिय सदस्य की भूमिका निभाई।

Who was Allan Octavian Hume ? Foundation Of Indian National Congress Day 2022

 लाला लाजपत राय ने ह्यूम के बारे में लिखा है कि ‘ह्यूम स्वतंत्रता के पुजारी थे और उनका ह्रदय भारत की निर्धनता तथा दुर्दशा पर रोता था।’ यहां पर यह मानने में कोई भ्रम नहीं रह जाता कि ह्यूम एक निष्पक्ष एवं न्यायप्रिय व्यक्ति थे, उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस(Indian National Congress) के प्रति अपनी बहुमूल्य तथा महान सेवाएं अर्पित की।