International Day of Families 2023 : कब और क्यों मनाया जाता है विश्व परिवार दिवस ?

Global Family Day 2023 || The International Day of Families || International Family Day 2023 || विश्व परिवार दिवस 2023 || About The International Day of Families in Hindi || Hindi blogs || Janpanchayat Hindi Blogs || Latest Blogs

प्रत्येक वर्ष 15 मई को अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाता है। परिवार समाज की सबसे छोटी इकाई है। मानव समाज के संचालन की कल्पना परिवार के अभाव में असंभव है। एक समाज में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी परिवार का सदस्य होता है। परिवार से अलग एक व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं होता। परिवार समाज की मौलिक इकाई है। हमारी सभ्यताएं, संस्कृति में चाहे जितने भी परिवर्तन हो, लेकिन परिवार एक ऐसी संस्था है जिसके अस्तित्व पर कभी कोई आंच नहीं आई। परिवार के स्वरूप और उसके मूल्य में भले ही परिवर्तन हुआ हो, भले ही परिवार बनकर टूट गए हो लेकिन परिवार के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता है। आज हम आधुनिक विचारधारा से चाहे जितने भी प्रभावित हो लेकिन आज भी अपने संबंधों को विवाह संस्था से जोड़कर परिवार बनाने में ही संतोष का अनुभव करते हैं।

International Day of Families 2023_janpanchayat hindi blogs

Global Family Day 2023 || The International Day of Families || International Family Day 2023 || विश्व परिवार दिवस 2023 || About The International Day of Families in Hindi || Hindi blogs || Janpanchayat Hindi Blogs || Latest Blogs

कब मनाया जाता है विश्व परिवार दिवस ?

प्रत्येक वर्ष 15 मई को अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस (International Day of Families) मनाया जाता है। परिवार समाज की सबसे छोटी इकाई है। मानव समाज के संचालन की कल्पना परिवार के अभाव में असंभव है। एक समाज में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी परिवार का सदस्य होता है। परिवार से अलग एक व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं होता। परिवार समाज की मौलिक इकाई है। हमारी सभ्यताएं, संस्कृति में चाहे जितने भी परिवर्तन हो, लेकिन परिवार एक ऐसी संस्था है जिसके अस्तित्व पर कभी कोई आंच नहीं आई। परिवार के स्वरूप और उसके मूल्य में भले ही परिवर्तन हुआ हो, भले ही परिवार बनकर टूट गए हो लेकिन परिवार के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता है। आज हम आधुनिक विचारधारा से चाहे जितने भी प्रभावित हो लेकिन आज भी अपने संबंधों को विवाह संस्था से जोड़कर परिवार बनाने में ही संतोष का अनुभव करते हैं।

अमीर- गरीब, नेता- अभिनेता, अपराधी- अधिकारी, सभी के लिए परिवार जीवन का जरूरी हिस्सा है। जीवन में परिवार की भूमिका के महत्व को दर्शाने के लिए प्रत्येक वर्ष अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाता है। भारत देश में तो परिवार और रिश्तो को बहुत सम्मान दिया जाता है।
विश्व परिवार दिवस की शुरुआत कब हुई और कैसे मनाया जाता है? आईए जानते हैं विश्व परिवार दिवस के इतिहास और महत्व के विषय में-

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस का इतिहास ( History of International Day of Families)

विश्व परिवार दिवस (International Day of Families) सर्वप्रथम 1994 में मनाया गया था। विश्व परिवार दिवस (International Day of Families) की नींव संयुक्त राष्ट्र सभा द्वारा 1889 में ही रख दी गई थी। जब संयुक्त राष्ट्र सभा ने 9 दिसंबर 1889 के 44/82 के प्रस्ताव में प्रत्येक वर्ष अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाने की घोषणा परिवार के महत्व को बताने के उद्देश्य से की थी। इसके पश्चात यूएन जनरल असेंबली ने वर्ष 1993 में एक संकल्प में 15 मई की तारीख परिवार दिवस के लिए तय कर दी थी। 1995 से विश्व परिवार दिवस मनाया जा रहा है। विश्व परिवार दिवस का प्रतीक चिन्ह है हरे रंग का एक गोल घेरा जिसके बीचो – बीच एक दिल और घर अंकित किया जाता है।

क्या है परिवार ?

परिवार मानव समाज की एक बुनियादी तथा सार्वभौमिक इकाई है परिवार के अंतर्गत पति पत्नी और उनके बच्चों का समूह माना जाता है। परिवार सामाजिक जीवन की निरंतरता, एकता एवं विकास के लिए आवश्यक कार्य करता है। प्रत्येक समाज में परिवार ही शिशु के जन्म और भरण – पोषण का दायित्व निभाता हैं। परिवार का प्रमुख उत्तरदायित्व है शिशु को संस्कार देना और समाज के आचार व्यवहार और नियमों में दीक्षित करना।
परिवार से ही परिवार के सदस्यों की सामाजिक मर्यादा और सीमा निर्धारित होती है। परिवार चाहे पितृ सत्तात्मक हो या मातृ सत्तात्मक, एक परिवार में पति- पत्नी को अतिरिक्त सदस्यता प्रदान की जाती है। युगल या एकाकी परिवार में पति, पत्नी मिलकर अपनी अलग घर- गृहस्थी बसाते हैं। परंतु अधिकांशत: का समाज में परिवार ‘वृहत्तर कौटुंबिक समूह’ का अंग ही माना जाता है। अमेरिका जैसे उद्योग प्रधान देश में युगल या एकल परिवार की बहुलता है। वहां संयुक्त एवं बड़े परिवार ना के बराबर है। संयुक्त परिवारों में पति, पत्नी के अतिरिक्त उनके विवाहित बच्चे और उनकी संतान, विवाहित भाई-बहन और उनके बच्चे एक साथ रह सकते हैं।

भारतीय परिवार

भारतीय परिवार में परिवार की मर्यादा और आदर्श परंपरागत है। एक गृहस्थ जीवन की जितनी पवित्रता, स्थाईपन और पति-पत्नी पिता- पुत्र और भाई- बहन के जितने अधिक व स्थाई संबंधों का उदाहरण भारतीय परिवार में है, विश्व के अन्य किसी समाज में नहीं है। भारतीय परिवार में विभिन्न क्षेत्रों, धर्म, जातियों में संपत्ति के अधिकार, विवाह और विवाह- विच्छेद की प्रथा की दृष्टि से कई अंतर पाए जाते हैं लेकिन फिर भी संयुक्त परिवार का आदर्श भारत में सर्वमान्य है।

परिवार के प्रकार

विवाह, वंशावली स्वामित्व आदि के विभिन्न रूपों के आधार पर परिवार के विभिन्न प्रकार हैं। जिनमें कुछ प्रमुख इस प्रकार है-

मातृसत्तात्मक परिवार

मातृसत्तात्मक परिवार मातृवंशीय होते हैं। इस प्रकार के परिवार में पति,पत्नी के घर का स्थाई या अस्थाई सदस्य बनता है। मातृसत्तात्मक परिवार में संपत्ति का अधिकार नारी को प्राप्त होता है। इस परिवार में घर का मुखिया माता या माता का अन्य सबसे बड़ा रक्त संबंधी पुरुष होता है।

पितृसत्तात्मक परिवार

पितृसत्तात्मक परिवार में पत्नी पति के घर की सदस्य होती है। यह परिवार पितृवंशीय होते हैं। और परिवार की संपत्ति का अधिकार पुरुष को प्राप्त होता है। पितृसत्तात्मक परिवार में घर का मुखिया पिता अथवा घर का सबसे बड़ा पुरुष होता है।

कबीलाई परिवार

कबीलाई परिवार जनजातियों में पाए जाते हैं। कबीलाई परिवारों में विवाह के सभी रूप मिलते हैं। अंडमानी आदिवासियों में एक पत्नीत्व का नियम है और वह पितृवंशीय हैं। वहीं उत्तरी अमेरिका के बेतिहेर होपी कबीले में एक पतीत्व की प्रथा है, किंतु यह परिवार मातृसत्तात्मक है।

विश्व परिवार दिवस का उद्देश्य

विश्व परिवार दिवस (International Day of Families) का मुख्य उद्देश्य है, परिवार के महत्व, मूल्य एवं आवश्यकता को समझाना। परिवार से जुड़े मुद्दों पर समाज में जागरूकता फैलाना एवं दुनिया भर के लोगों को परिवार से जोड़े रखना इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य है। परिवार दिवस के दिन युवाओं को परिवार के महत्व के बारे में जागरूक किया जाता है ।प्राचीन भारतीय समाज में संयुक्त परिवार होते थे। लेकिन आज के शहरीकरण के चलते संयुक्त परिवार गांवमें ही देखने को मिलते हैं। आज के आधुनिक युग की भागदौड़, प्रतिस्पर्धा और महत्वाकांक्षा ने परिवार को तोड़ दिया है। आज भारतीय समाज भी एकल परिवार की ओर अग्रसर हो रहा है। एक संयुक्त परिवार में ही परिवार को संबल प्रदान करने की विशेषता होती है। परिवार की एकता ही उसकी शक्ति का परिचायक होती है। लेकिन बदलते परिवेश में परिवार बिखराव की ओर अग्रसर हो रहे हैं। अतः परिवार के महत्व को समझने की उद्देश्य से ही परिवार दिवस मनाया जाता है।

विश्व परिवार दिवस का क्या है महत्व ?

परिवार का एक मानव जीवन में बहुत महत्व है या यूं कहें कि परिवार हमारे जीवन का आधार स्तंभ होता है जो हमारी छोटी से छोटी आवश्यकताओं को समझता है। परिवार के साथ हम किसी भी समस्या का समाधान पा सकते हैं। विश्व परिवार दिवस मनाने का आज के आधुनिक जीवन में महत्व बढ़ गया है, क्योंकि आज परिवार विखंडन की ओर बढ़ रहे हैं। परिवार दिवस एक ऐसा अवसर है जो अलग-अलग विचार एवं पसंद के लोगों को एकजुट करता है। यह लोगों के आपसी मतभेद को बुलाकर एक साथ प्रेम से रहने के लिए प्रेरित करता है।
अथर्ववेद में परिवार की कल्पना करते हुए कहा गया हैही
“अनुव्रतः पितुः पुत्रो माता भवतु संमनाः।
जाया पत्ये मधुमतीं वाचं वदतु शन्तिवाम्‌॥
अर्थात, पिता के प्रति पुत्र निष्ठावान हो। माता के साथ पुत्र एकमन वाला हो। पत्नी पति से मधुर तथा कोमल शब्द बोले।
परिवार की महत्ता बताते हुए जैनेंद्र ने ‘ इतस्तक’ में कहा है।
परिवार मर्यादाओं से बनता है। परस्पर कर्तव्य होते हैं अनुशासन होता है और उस निपट परंपरा में कुछ जनों की इकाई हित के आसपास जुटकर व्यूह में चलती है। उस इकाई के प्रति हर सदस्य अपना आत्मदान करता है, इज्जत खानदान की होती है। हर एक उससे लाभ लेता है और अपना त्याग देता है।

विश्व परिवार दिवस कैसे मनाया जाता है ?

विश्व परिवार दिवस के दिन स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। कार्यशालाएं एवं सेमिनार का आयोजन किया जाता है। सेमिनार और कार्यशालाओं के माध्यम से लोगों को सशक्त बनाने के विषय पर वार्षिक चर्चाओं का आयोजन किया जाता है। इस दिन परिवार का समर्थन करने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं।

विश्व परिवार दिवस की थीम

विश्व परिवार दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रत्येक वर्ष एक थीम के तहत मनाया जाता है। वर्ष 2023 में विश्व परिवार दिवस के लिए यूएन की थीम है-
“परिवार और जनसांख्यिकी परिवर्तन “
(Demographic Trends and Families)