भाजपा के किले में सेंधमारी की कोशिश – गांधीनगर लोकसभा सीट

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Gandhinagar Lok Sabha Seat: गुजरात की वीआईपी और सबसे महत्वपूर्ण सीटों में से एक है, गांधीनगर लोकसभा सीट। इस सीट पर 7 मई को मतदान होना है। लगभग 3 दशकों से इस सीट पर भाजपा की जो पारी शुरू हुई वह अभी तक नॉट आउट चल रही है। गांधीनगर लोकसभा सीट से देश के गृहमंत्री अमित शाह चुनाव मैदान में है। अतः पूरे देश की निगाहें इस सीट पर टिकी हैं। यह बात और है कि कांग्रेस ने अमित शाह के मुकाबले में सोनल पटेल को मैदान में उतारा है लेकिन गांधीनगर सीट पर सेंधमारी मुश्किल लगती है।

भाजपा के किले में सेंधमारी के लिए कांग्रेस यहां से टी एन शेषन और राजेश खन्ना जैसे दिग्गज नेताओं को उतार चुकी है, लेकिन बीते तीन दशकों से भगवामय हो चुकी गांधीनगर लोकसभा सीट पर कांग्रेस के सभी दिग्गज नेता चारों खाने चित हो गए।

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क्या है गांधीनगर लोकसभा सीट का इतिहास ?

गांधीनगर लोकसभा सीट पर 1967 में पहला आम चुनाव हुआ था। उस समय यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। 1967 के आम चुनाव में कांग्रेस के एस एम सोलंकी ने जीत दर्ज की और 1971 के चुनाव में भी सोलंकी ने दूसरी बार बाजी मारी। 1977 में भारतीय लोक दल के उम्मीदवार ने यहां से जीत हासिल की जो कि इंदिरा गांधी के विरोध में छोटे-छोटे दलों से मिलकर बना एक दल था
हालांकि 1980 और 1984 में कांग्रेस ने फिर यहां से जीत दर्ज की।

1989 में लहराया भाजपा का परचम

1989 से गांधीनगर सीट पर भाजपा का भगवा लहराया जो आज तक लहरा रहा है। लाल कृष्ण आडवाणी यहां से 1988 से 1999 तथा 2004 से 2009 और 2014 में यहां से पांच बार सांसद चुने गए। 2019 के चुनाव में अमित शाह ने गांधीनगर सीट से जीत दर्ज की। अमित शाह ने जनता के साथ भरोसे को बहुत मजबूत बना दिया है। भगवा लहर के आगे इस सीट पर जातीय समीकरण की चर्चा व्यर्थ साबित होती है।

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इस सीट ने देश को दिया दो गृहमंत्री

1989 से भाजपा के दबदबे वाले इस सीट से अटल बिहारी बाजपेई तथा लालकृष्ण आडवाणी सांसद रह चुके हैं। 3 दशकों से ज्यादा वक्त से सामान्य वर्ग वाली इस सीट पर भाजपा लगातार जीतती रही है। आडवाणी यहां से लगातार पांच बार सांसद रहे। यह संयोग हीं है कि इस सीट ने देश को दो गृह मंत्री भी दिए। लालकृष्ण आडवाणी इस की सीट से जीत कर गृह मंत्री बने तो वहीं यहां से जीतकर अमित शाह को भी गृह मंत्री का पद मिला।

गांधीनगर संसदीय सीट की क्या है विशेषता ?

गांधीनगर अहमदाबाद से 35 किलोमीटर पूर्वोत्तर में है। चंडीगढ़ के बाद भारत का यह दूसरा नियोजित शहर है। गांधीनगर गुजरात की राजधानी है तथा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कर्मभूमि भी है। इस शहर का नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया है। साबरमती के किनारे बसे इस शहर को ट्री कैपिटल भी कहा जाता है, क्योंकि कुल भूमि के 54 प्रतिशत हिस्से में पेड़- पौधे हैं। गुजरात की राजधानी पहले अहमदाबाद थी लेकिन 1970 में गांधीनगर गुजरात की राजधानी बनी। गांधीनगर की साक्षरता दर 84% से अधिक है। गांधीनगर लोकसभा में सात विधानसभा सीटें हैं- गांधीनगर उत्तर, घाटलोडिया, साबरमती, कलोल, वैजलपुर, साणद, नारणपुरा ।

क्या है जातीय समीकरण ?

अधिकतर शहरी आबादी वाले गांधीनगर में करीब 79 फ़ीसदी लोग शहरों में रहते हैं। यहां 11.41%एससी आबादी, 1.96% एसटी आबादी और 21% ग्रामीण आबादी है। गांधीनगर में मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या चार फ़ीसदी से ज्यादा है।

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अमित शाह के सामने सोनल पटेल

गांधीनगर लोकसभा सीट से अमित शाह के सामने कांग्रेस ने सोनल पटेल को मैदान में उतारा है। अमित शाह देश के केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री हैं, और 2019 से 31वें गृह मंत्री के रूप में देश को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं कांग्रेस की सोनल पटेल अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सचिव हैं। सोनल मुंबई और पश्चिम महाराष्ट्र की कांग्रेस सह प्रभारी भी हैं। वह पेशे से आर्किटेक्ट हैं। अमित शाह 2014 से 2017 और 2017 से 2020 तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

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