जजों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार में टकराव (Conflict between the Supreme Court and the central government on the appointment of judges)

 सुप्रीम कोर्ट द्वारा भेजे गए 21 नामों में से 19 को केंद्र सरकार ने स्वीकार करते हुए वापस सुप्रीम कोर्ट को भेज दिया जबकि 2 नामों पर अपनी स्वीकृति प्रदान की है। इससे सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार में टकराव जैसी स्थिति देखी जा सकती है। सवाल यह उठता है कि इन नामों का चयन किस आधार पर होता है। जैसा कि सर्वविदित है एक कॉलेजियम सिस्टम के द्वारा जजों के नाम तय किए जाते हैं।

Out of the 21 names sent by the Supreme Court, the Central Government accepted 19 and sent them back to the Supreme Court while it has given its approval on 2 names. Due to this, a situation like conflict can be seen between the Supreme Court and the Central Government. The question arises on what basis these names are selected. As is well known, names of judges are decided by a collegium system.
Conflict between the Supreme Court and the central government on the appointment of judges

Conflict between the Supreme Court and the central government on the appointment of judges

National NEWS (Supreme Court Vs Central Government ) : सुप्रीम कोर्ट द्वारा भेजे गए 21 नामों में से 19 को केंद्र सरकार ने स्वीकार करते हुए वापस सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) को भेज दिया जबकि 2 नामों पर अपनी स्वीकृति प्रदान की है। इससे सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार (Central Government) में टकराव जैसी स्थिति देखी जा सकती है। सवाल यह उठता है कि इन नामों का चयन किस आधार पर होता है। जैसा कि सर्वविदित है एक कॉलेजियम सिस्टम (Collegium System) के द्वारा जजों के नाम तय किए जाते हैं।

क्या है कॉलेजियम सिस्टम? (What is a Collegium System)

 कॉलेजियम सिस्टम (Collegium System) के बारे में न तो संविधान में न ही संसद की ओर से लाए गए किसी विशेष कानून में कोई व्याख्या की गई है। यह सिस्टम सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट दोनों में जजों की नियुक्ति के संदर्भ में काम करता है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) कॉलेजियम 5 सदस्यों की एक कमेटी है जिसका नेतृत्व देश के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश(CJI) करते हैं, बाकी चार सदस्यों में सुप्रीम कोर्ट के चार अन्य वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।

इसी तरह से हाईकोर्ट कॉलेजियम का नेतृत्व हाईकोर्ट के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश और बाकी चार सदस्यों में हाईकोर्ट के चार अन्य वरिष्ठम न्यायाधीश शामिल होते हैं। कोई भी सदस्य कॉलेजियम (Collegium) में तब तक रह सकते हैं जब तक वह अपने पद से सेवानिवृत्त नहीं हो जाते।
“इस प्रकार वह प्रणाली जिसके माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय/ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति व स्थानांतरण किया जाता है कॉलेजियम प्रणाली कहलाती है।”

केंद्र सरकार की बाध्यता

कॉलेजियम की ओर से अनुशंसित नामों पर सरकार आपत्ति उठा सकती है और नामों पर स्पष्टीकरण मांग सकती है लेकिन अगर कॉलेजियम दोबारा उन्हीं नामों को सरकार को भेजती है तो सरकार को उन नामों को न्यायाधीश के पद पर नियुक्त करना पड़ता है इसके लिए केंद्र सरकार बाध्य है।

संवैधानिक व्यवस्था (Constitutional arrangement)

 संविधान के अनुच्छेद 124 के खंड 2 और 217 के तहत सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति की व्यवस्था की गई है। यह नियुक्तियां राष्ट्रपति के द्वारा की जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के साथ विचार विमर्श करने के बाद ही यह नियुक्तियां होती है। इसके अतिरिक्त और किसी खास प्रक्रिया का संविधान में उल्लेख नहीं है इसीलिए कॉलेजियम सिस्टम (collegium system) के बारे में समय-समय पर आलोचना की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि कॉलेजियम (collegium) की पूरी प्रक्रिया पर्दे के पीछे बंद कमरे में होती है और किसी को भनक नहीं लगती। इन कारणों से ही कानून मंत्री किरेन रिजिजू (Cabinet Minister of Law and Justice in the Government of India, Kiren Rijiju) ने भी आपत्ति जताई है।