गीता जयंती कब और क्यों मनाई जाती है? (When and why is Gita Jayanti celebrated?) : Gita Jayanti 2022

श्रीमद्भागवत गीता को हिंदुओं का एक पवित्रतम ग्रंथ माना जाता है। यह धार्मिक के साथ-साथ दार्शनिक विचारों से भी परिपूर्ण है। गीता में ईश्वर, आत्मा, तत्व विचार, नैतिक नियम, ब्रह्म विद्या तथा योगशास्त्र सभी के विषय में मत पाए जाते हैं। वास्तव में गीता समस्त भारतीय दर्शन का निचोड़ है। गीता का उपदेश कुरुक्षेत्र की युद्ध भूमि में अर्जुन को उनके कर्तव्य का अपमान कराने के उद्देश्य से श्री कृष्ण ने दिया था।
गीता जयंती कब और क्यों मनाई जाती है? (When and why is Gita Jayanti celebrated?)

Gita jayanti 2022

Gita Jayanti 2022( गीता जयंती 2022) : श्रीमद्भागवत गीता को हिंदुओं का एक पवित्रतम ग्रंथ माना जाता है। यह धार्मिक के साथ-साथ दार्शनिक विचारों से भी परिपूर्ण है। गीता में ईश्वर, आत्मा, तत्व विचार, नैतिक नियम, ब्रह्म विद्या तथा योगशास्त्र सभी के विषय में मत पाए जाते हैं। वास्तव में गीता समस्त भारतीय दर्शन का निचोड़ है। गीता का उपदेश कुरुक्षेत्र की युद्ध भूमि में अर्जुन को उनके कर्तव्य का भान कराने के उद्देश्य से श्री कृष्ण ने दिया था।

गीता जयंती कब मनाई जाती है ? ( When is Gita Jayanti celebrated?)

गीता जयंती (Gita Jayanti) हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भागवत गीता (Shrimad Bhagwad Gita) के उद्भव की प्रतीक है। गीता जयंती इस वर्ष 3 दिसंबर को मनाई जा रही हैं। श्री कृष्ण ने मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इसी दिन गीता अस्तित्व में आई। अतः इस दिन को गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव ( International Gita Jayanti Festival) 2022 इस वर्ष 19 नवंबर से 6 दिसंबर तक मनाया जा रहा है। इसका शुभारंभ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया है। इसके अंतर्गत 4 दिसंबर को थीम पार्क में 18000 विद्यार्थियों द्वारा गीता पाठ किया जाएगा। गीता जयंती (Gita Jayanti) पर कुरुक्षेत्र में ब्रह्मसरोवर के आसपास 300 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्टाल लगाए जाते हैं। वर्ष 2022 में मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी 3 दिसंबर को है जिसे मोक्षदा एकादशी कहते हैं। अतः वर्ष 2022 में गीता जयंती 3 दिसंबर को मनाई जा रही है। यह वर्ष (2022) श्रीमद्भागवत गीता की 5159वीं वर्षगांठ है।

गीता जयंती का महत्व ( Significance of Gita Jayanti)

श्रीमद्भागवत गीता (Shrimad Bhagwad Gita) को श्री कृष्ण ने अर्जुन को उस समय सुनाया जिस समय अर्जुन कुरुक्षेत्र की युद्ध भूमि में अपनों के विरुद्ध युद्ध करने पर विचलित हो उठे। श्रीमद्भागवत गीता सार्वभौम है। धर्म के नाम पर प्रचलित विश्व के समस्त धर्म ग्रंथों में गीता का स्थान अद्वितीय है। यह स्वयं में धर्म शास्त्र ही नहीं बल्कि धर्म ग्रंथों में निहित सत्य का मानदंड भी है। श्रीमद्भागवत गीता (Shrimad Bhagwad Gita) वह कसौटी है, जिसपर प्रत्येक धर्म ग्रंथ में अनुस्यूत सत्य अनावृत हो उठता है, परस्पर विरोधी कथनों का समाधान निकल आता है। गीता किसी विशिष्ट व्यक्ति, जाति वर्ग, पंथ, देशकाल या किसी रूढ़ीग्रस्त संप्रदाय का ग्रंथ नहीं है बल्कि यह सार्वलौकिक, सार्वकालिक धर्मग्रंथ है। प्रत्येक देश, प्रत्येक जाति तथा प्रत्येक स्तर के प्रत्येक स्त्री-पुरुष सबके लिए इसका महत्व है।

गीता का उपदेश ( Main message of the Gita?)

श्रीमद्भागवत गीता में श्रीकृष्ण अर्जुन को कर्म योगी होने का उपदेश देते हैं। वास्तव में कर्मयोगी गीता का मुख्य उपदेश है। गीता (Gita) की रचना उस अर्जुन को कर्म करने की प्रेरणा प्रदान करने के लिए की गई है जो निष्क्रिय और किंकर्तव्यविमूढ़ हो चुका था। श्रीकृष्ण ने कहा व्यक्ति को सिर्फ कर्म करने का ही प्रयास करना चाहिए और उसे फल की चिंता नहीं करनी चाहिए।

“ कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ ”
(अर्थात कर्म में ही तेरा अधिकार है, फल में कभी नहीं। तुम कर्मफल का हेतू भी मत बनो, अकर्मण्यता में तुम्हारी आसक्ति न हो।)

गीता में ईश्वर को परम सत्य, जीव आत्मा को ईश्वर का एक अंश कहा गया है। श्रीमद्भागवत गीता में मोक्ष को चरम लक्ष्य माना गया है। यह आत्मा के परमात्मा से संयुक्त होने का ही नाम है।