Magh Mela 2023 Updates : प्रयागराज को तीर्थराज क्यों कहा जाता है ? (Why is Prayagraj called Tirthraj?)

Magh Mela Of Prayagraj 2023 Updates : प्रयागराज(Prayagraj) शहर का नाम आते ही हमारा ध्यान बरबस ही संगम पर चला जाता है। वही प्रयागराज जहां संगम (Sangam) स्थित है। गंगा–यमुना(Ganga-Yamuna) नदियों के तट पर स्थित यह शहर हमारी प्राचीन संस्कृति एवं सभ्यता का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा शहर प्रयागराज (Prayagraj) अपने अंदर कई ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं को अपने में समेटे हुए है। हमारे प्राचीन पुराणों में भी प्रयाग का वर्णन मिलता है। प्राचीन ग्रंथों में प्रयाग को तीर्थराज कहा गया है।

As soon as the name of the city of Prayagraj comes, our attention goes to the Sangam. The same Prayagraj where Sangam is situated. Situated on the banks of the Ganga-Yamuna rivers, this city is a symbol of our ancient culture and civilization. Prayagraj, the largest city of Uttar Pradesh, contains many historical and mythological stories within itself. The description of Prayag is also found in our ancient Puranas. In ancient texts, Prayag has been called Tirthraj.

 को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ, कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ।
अस तीरथपति देखि सुहावा, सुख सागर रघुबर सुख पावा।।

Magh Mela 2023 Updates Prayagraj News

प्रयागराज/ माघ मेला (Prayagraj Magh Mela 2023):  प्रयागराज शहर का नाम आते ही हमारा ध्यान बरबस ही संगम(Sangam) पर चला जाता है। वही प्रयागराज जहां संगम स्थित है। गंगा–यमुना नदियों के तट पर स्थित यह शहर हमारी प्राचीन संस्कृति एवं सभ्यता का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा शहर प्रयागराज (Prayagraj) अपने अंदर कई ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं को अपने में समेटे हुए है। हमारे प्राचीन पुराणों में भी प्रयाग का वर्णन मिलता है। प्राचीन ग्रंथों में प्रयाग को तीर्थराज कहा गया है।

श्री रामचरितमानस में तुलसीदास ने लिखा है (Tulsidas has written in Shri Ramcharitmanas ) -

Magh Mela 2023 Updates_Importance of Prayagraj

 को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ, कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ।
अस तीरथपति देखि सुहावा, सुख सागर रघुबर सुख पावा।।

 पौराणिक के साथ-साथ प्रयाग का ऐतिहासिक महत्व भी है। प्रयागराज का नाम पहले ‘इलाहाबाद’ था। मुगल सम्राट अकबर ने अपने शासनकाल में प्रयाग का नाम बदलकर ‘इलाहाबाद’( Allahabad) रख दिया। कहा जाता है कि अकबर ने दीन–ए–इलाही धर्म को अपनाया था। इस इलाही धर्म के नाम के आधार पर अकबर ने प्रयाग (Prayag) का नाम ‘इलाहाबाद’ रख दिया। तब से यह शहर इलाहाबाद कहा जाने लगा, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय श्री योगी आदित्यनाथ जी ने जब शासन की बागडोर संभाली तो सर्वप्रथम उन्होंने इलाहाबाद का नाम फिर से प्रयागराज (Prayagraj) कर दिया क्योंकि यह हमारी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता को दर्शाता है।

प्रयागराज (Prayagraj) भारत के सभी समुदायों के लिए एक पवित्र शहर है। प्रयागराज में यदि हिंदुओं के लिए अनगिनत मंदिर,त्रिवेणी संगम और अक्षय वट आस्था और देवत्व का प्रतीक हैं, तो खुसरो बाग जैसे मकबरे और कई मस्जिदें भी हैं।

प्रयागराज (Prayagraj) विभिन्न कारणों से हमारे देश में ही नहीं पूरे विश्व में प्रसिद्ध है, उनमें से एक है तीन नदियों–गंगा, यमुना, सरस्वती का संगम। गंगा–यमुना प्रत्यक्ष दिखाई देती हैं लेकिन सरस्वती अदृश्य अवस्था में हैं। प्रयागराज मे कुंभ का महत्व तो है ही, इसके साथ-साथ प्रयाग (Prayag) में हर वर्ष माघ मास में माघ मेला (Magh Mela) का आयोजन होता है।

प्रयागराज का कुंभ और अर्धकुंभ (Kumbh and Ardh Kumbh of Prayagraj)

Magh Mela & Kumbh Mela Of Prayagraj

प्रयागराज (Prayagraj) में प्रत्येक 6 वर्ष पर अर्धकुंभ और प्रत्येक 12 वर्ष पर महाकुंभ लगता है। पुराणों में मान्यता है कि अमृत कलश को असुरों से बचाकर जब श्री विष्णु भगवान ले जा रहे थे तो उसी समय अमृत की कुछ बूंदे धरती पर गिरी और जिन चार जगहों पर गिरी, वहां पर महाकुंभ का आयोजन होता है। यह चार जगह हैं– उज्जैन, हरिद्वार, नासिक और प्रयाग। प्रयाग में कुंभ का आयोजन अगली बार 2025 में होगा जिसकी तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। देश-विदेश से पर्यटक कुंभ के दौरान आते हैं।

माघ मेला तंबुओं की नगरी (Magh Mela City of Tents)

City Of Tents : Magh Mela Prayagraj 2023

 प्रयागराज (Prayagraj) में माघ मास में प्रत्येक वर्ष मेला लगता है। माघ महीने में सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो माघ मेले (Magh Mela) का आयोजन होता है। यह मेला पौष पूर्णिमा से शुरू होता है और महाशिवरात्रि तक चलता है। माघ मेले (Magh Mela) के दौरान संगम की रेती पर तंबुओं का एक अलग शहर–सा बस जाता है। तंबुओं की नगरी का मनोरम दृश्य अनायास ही मन को आकर्षित कर लेता है। माघ मेले (Magh Mela) में भारत के कोने-कोने से लोग कल्पवास करने आते हैं। इन्हीं कल्पवासियों के रहने के लिए तंबुओं का शहर बनाया जाता है। छोटे-छोटे तंबू की कुटिया में श्रद्धालु पूरे एक महीने तक कल्पवास करते हैं। कुछ लोग पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक कल्पवास करते हैं, तो कुछ लोग मकर संक्रांति से महाशिवरात्रि तक कल्पवास करते हैं। हमारे प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है कि माघ महीने में पवित्र नदियों के संगम पर देवी–देवता भी पूरे महीने वास करते हैं।

श्री तुलसीदास ने भी श्री रामचरितमानस में लिखा है–

मकर गति रवि जब होई, तीरथ पतिहि आव सब कोई।
देव दनुज किन्नर नरश्रेणी, सादर मज्जहि सकल त्रिवेणी।।

अर्थात सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो तीर्थराज प्रयाग में देव, दनुज, किन्नर, गंधर्व सभी आते हैं और त्रिवेणी के पवित्र जल में स्नान करते हैं।

कुंभ मेला और माघ मेले (Kumbh Mela & Magh Mela) से लेकर इलाहाबाद के किले तक प्रायगराज में घूमने के लिए बहुत सारी जगह है जो आपका ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेंगे।