Children’s Day 2023: भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जंयती पर विशेष (Special on the birth anniversary of India’s first Prime Minister Pandit Jawaharlal Nehru Ji)

Special on the birth anniversary of India’s first Prime Minister Pandit Jawaharlal Nehru Ji || Childrens Day 2023 || Bal Diwas 2023: पंडित जवाहरलाल नेहरू (Pandit Jawaharlal Nehru) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे। 1930 और 1940 के दशक में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से नेहरू एक थे। जवाहर लाल नेहरू संसदीय सरकार की स्थापना और विदेशी मामलों में गुटनिरपेक्ष नीतियों के लिए विख्यात हुए। जवाहरलाल नेहरू की जयंती 14 नवंबर को मनाई जाती है। नेहरू की जयंती को ‘बाल दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है।

Birth Anniversary of Pandit Jawaharlal Nehru Jayanti 2023_Childrens Day 2023_Bal Diwas 2023

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भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जंयती पर विशेष
पंडित जवाहरलाल नेहरू (Pandit Jawaharlal Nehru) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे। 1930 और 1940 के दशक में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से नेहरू एक थे। जवाहर लाल नेहरू संसदीय सरकार की स्थापना और विदेशी मामलों में गुटनिरपेक्ष नीतियों के लिए विख्यात हुए। जवाहरलाल नेहरू की जयंती 14 नवंबर को मनाई जाती है। नेहरू की जयंती को 'बाल दिवस' के रूप में भी मनाया जाता है।

आईए जानते हैं स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जीवन के बारे में (Let us know about the life of Jawaharlal Nehru, the first Prime Minister of independent India-)-

पंडित जवाहरलाल नेहरू का जीवन परिचय

जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 ई को इलाहाबाद में हुआ था। पंडित मोतीलाल नेहरू इनके पिता तथा श्रीमती स्वरूप रानी उनकी माता थी। नेहरू कश्मीरी ब्राह्मण परिवार से संबंध रखते थे। पंडित नेहरू की दो बहने थी। जवाहरलाल नेहरू अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। जवाहरलाल नेहरू सबसे बड़े थे। उनकी दोनो बहने छोटी थी विजय लक्ष्मी पंडित जो संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम महिला अध्यक्ष बनी नेहरू की ही बहन थी।

पंडित जवाहरलाल नेहरू की शिक्षा

 जवाहरलाल नेहरू की प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई। 15 वर्ष की उम्र में 1905 में नेहरू ने इंग्लैंड के हैरो स्कूल में दाखिला लिया जहां 2 वर्ष तक रहे। हैरो से वह कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज गए, जहां उन्होंने 3 वर्ष तक अध्ययन किया और प्रकृति विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। कैंब्रिज के बाद नेहरू ने लंदन के इनर टेंपल से वकालत की पढ़ाई की। 1912 में वह बैरिस्टर बने।

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पंडित जवाहरलाल नेहरू का विवाह

1912 में भारत लौटने के बाद उन्होंने इलाहाबाद में वकालत प्रारंभ की। जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru ) की वकालत में विशेष रुचि नहीं थी। इसलिए वह शीघ्र ही भारतीय राजनीति में भाग लेने लगे। 1912 में उन्होंने बांकीपुर बिहार में होने वाले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया। मार्च 1916 में नेहरू का विवाह कश्मीरी परिवार के कमला कौल के साथ हुआ। नेहरू के एक पुत्र और एक पुत्री प्राप्त हुई। पुत्र की मृत्यु शीघ्र ही हो गई। नेहरू की अकेली संतान 'इंदिरा प्रियदर्शिनी' का जन्म 1917 को हुआ जो आगे चलकर विवाहोपरांत 'इंदिरा गांधी' के नाम से प्रसिद्ध हुई और भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री बनीं।

नेहरू का राजनीतिक जीवन (Nehru’s political life)

यद्यपि नेहरू ने भारत लौटने के बाद वकालत प्रारंभ की लेकिन इस पेशे में उनकी कोई खास रुचि नहीं थी। उन्हें वकालत और वकीलों का साथ दोनों नापसंद थे। वह भीतर से एक ऐसे राष्ट्रवादी थे जो अपने देश की आजादी के लिए बेचैन हो, लेकिन आजादी हासिल करने के लिए ठोस योजनाएं ना बन पाया हो।

1916 में वे सर्वप्रथम महात्मा गांधी से लखनऊ अधिवेशन में मिले। दोनों ने प्रारंभ में एक दूसरे को बहुत प्रभावित नहीं किया। 1929 में कांग्रेस के ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन का अध्यक्ष चुने जाने के बाद नेहरू भारतीय राजनीति में अग्रणी भूमिका में आए। इसी अधिवेशन में भारत के राजनीतिक लक्ष्य के रूप में 'संपूर्ण स्वराज' की घोषणा की गई।

पंडित जवाहरलाल नेहरू का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान

महात्मा गांधी,पंडित नेहरू की विश्व के बारे में जानकारी से काफी प्रभावित थे और इसीलिए आजादी के बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद पर देखना चाहते थे। जवाहरलाल नेहरू ने भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे महात्मा गांधी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़े।वह चाहे महात्मा गांधी का असहयोग आंदोलन हो, नमक सत्याग्रह हो या फिर 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन हो, नेहरू ने गांधी जी के प्रत्येक आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

बच्चों के प्रति उनके प्रेम ने बनाया ‘ चाचा नेहरू’

 भारत में जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) का जन्मदिन 14 नवंबर 'बाल दिवस' के रूप में मनाया जाता है। जवाहरलाल नेहरू को बच्चों से बेहद प्यार था और यही कारण था कि उन्हें प्यार से चाचा नेहरू बुलाया जाता था। एक बार नेहरु जी से मिलने एक सज्जन आए उन्होंने 71 वर्ष की उम्र में भी उनके तरो-ताजा दिखने का कारण पूछा, तब नेहरू जी (Nehru Ji) ने कहा कि इसके तीन कारण हैं-
  1. मैं बच्चों को बहुत प्यार करता हूं। उनके साथ खेलने की कोशिश करता हूं। इससे मैं अपने आप को उनको जैसा ही महसूस करता हूं
  2. मैं प्रकृति प्रेमी हूं और पेड़-पौधों, पक्षी, पहाड़, नदी, झरनों, चांद सितारों से बहुत प्यार करता हूं। मैं उनके साथ में जीता हूं जिससे यह मुझे तरोताजा रखते हैं।
  3. अधिकांश लोग सदैव छोटी-छोटी बातों में उलझे रहते हैं और उसके बारे में सोच- सोच कर दिमाग खराब करते हैं। मेरा नजरिया अलग है और मुझ पर छोटी-छोटी बातों का कोई असर नहीं होता। यह कहकर नेहरू जी बच्चों की तरह खिलखिला कर हंस पड़े।

आजादी के बाद बने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री

1947 में आजादी मिलने के पश्चात जवाहर लाल नेहरू अंतरिम प्रधानमंत्री थे। 1952 में पहले आम चुनाव हुए जिसमें कांग्रेस पार्टी भारी बहुमत से सत्ता में आई और पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री बने।

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प्रधानमंत्री के रूप में नेहरू की उपलब्धियां

 1929 में लाहौर अधिवेशन में अध्यक्ष पद संभालने के बाद से नेहरू 35 वर्षों तक राजनीति में बने रहे। 1962 में चीन से हारने के बावजूद नेहरू अपने देशवासियों के लिए आदर्श बने रहे। राजनीति के प्रति नेहरू का रवैया धर्मनिरपेक्ष था, जो गांधी जी के धार्मिक और पारंपरिक दृष्टिकोण से भिन्न था। नेहरू जहां आधुनिक संदर्भ मैं बात करते थे,वही गांधी जी प्राचीन भारत के गौरव पर बल देते थे।

 भारतीय इतिहास में एक समय ऐसा भी आया जब महात्मा गांधी को आजादी के बाद प्रधानमंत्री के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल और नेहरू में से किसी एक को चुनना था लेकिन नेहरू का विनम्र राष्ट्रीय दृष्टिकोण, लौह पुरुष के सख्त और बागी तेवर के सामने भारी पड़ा और नेहरू न सिर्फ स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री चुने गए अपितु विश्व के सबसे विशाल लोकतंत्र की बागडोर लंबे समय तक संभालने का गौरव भी हासिल किया।

 जवाहरलाल नेहरू ने बांधों को बहुत महत्व दिया था। उन्होंने बांधों को "आधुनिक भारत का मंदिर" कहा था। 22 अक्टूबर 1963 को जवाहरलाल नेहरू ने सबसे बड़ी नदी घाटी परियोजना ' भाखड़ा नांगल' राष्ट्र को समर्पित की। यह बांध हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में सतलुज नदी पर बना है। यह राजस्थान, पंजाब और हरियाणा की संयुक्त परियोजना है। इस बांध से 1325 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।

प्रसिद्ध लेखक

 जवाहरलाल नेहरू न सिर्फ एक महान राजनीतिक और प्रभावशाली वक्ता थे अपितु एक ख्यातिलब्ध लेखक भी थे।नेहरू ने भारत में कई अहिंसक सविनय अवज्ञा अभियानों का नेतृत्व करने के लिए कई साल जेल में बिताए। जेल में रहते हुए नेहरू ने कई किताबें लिखीं, जिनमें 'टुवर्ड्स फ्रीडम', 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया' और 'ग्लिंपसेस ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री' शामिल है, जो दुनिया के कई हिस्सों में लोकप्रिय हुई और एशिया और अफ्रीका में राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन के कई नेताओं को प्रेरित किया

वैज्ञानिक प्रगति के प्रणेता

जवाहरलाल नेहरू ने गांधी जी के विचारों के प्रतिकूल देश में औद्योगीकरण को महत्व दिया तथा भारी उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहन दिया। 1947 ईस्वी में नेहरू ने विज्ञान की प्रगति के लिए “भारतीय विज्ञान कांग्रेस” की स्थापना की। वह कई बार भारतीय विज्ञान कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे। भारत के विभिन्न भागों में स्थापित वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अनेक केंद्र इस क्षेत्र में उनकी दूरदर्शिता के स्पष्ट उदाहरण हैं।

खेलों में रुचि

नेहरू की खेलों में व्यक्तिगत रुचि थी। खेलों को उन्होंने मनुष्य के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए आवश्यक बताया। 1951 में नेहरू ने एक देश का दूसरे देश के साथ मधुर संबंध कायम करने के लिए दिल्ली में प्रथम एशियाई खेलों का आयोजन करवाया। नेहरू ने समाजवादी विचारधारा से प्रभावित होकर भारत में लोकतांत्रिक समाजवाद की स्थापना का लक्ष्य रखा। इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक योजना की आवश्यकता पर भी बल दिया।

 जवाहरलाल नेहरू ने सांप्रदायिकता का विरोध करते हुए धर्मनिरपेक्षता पर बल दिया उन्हीं के व्यक्तिगत प्रयासों से भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया। नेहरू जी ने निर्भरता एवं पंचशील जैसे सिद्धांतों का पालन कर विश्व बंधुत्व एवं विश्व शांति को प्रोत्साहन दिया। नेहरू ने भारत को तत्कालीन विश्व की दो महान शक्तियों का पिछलगगू न बनाकर तटस्थता की नीति का पालन किया। उन्होंने पूंजीवाद, साम्राज्यवाद, जातिवाद एवं उपनिवेशवाद के खिलाफ जीवन पर्यंत संघर्ष किया।

 अपने आधुनिक राजनीतिक और आर्थिक विचारों के कारण नेहरू जी भारत के युवा बुद्धिजीवियों को अंग्रेजों के खिलाफ गांधी के अहिंसक आंदोलन की ओर आकर्षित करने में और स्वतंत्रता के बाद इन्हें अपने आसपास बनाए रखने में सफल रहे। अपनी  भारतीयता पर जोर देने वाले नेहरू में वह हिंदू प्रभा मंडल और छवि कभी नहीं उभरी जो गांधी जी के व्यक्तित्व का अंग थी। 17 वर्षों तक सत्ता में रहने के दौरान उन्होंने लोकतांत्रिक समाजवाद को दिशा-  निर्देशक माना। पश्चिम में पले- बढ़े होने के कारण और स्वतंत्रता के पहले यूरोपीय यात्राओं के कारण उनके सोचने का ढंग पश्चिमी सांचे में ढल चुका था।

 लोकतंत्र, समाजवाद, एकता और धर्मनिरपेक्षता नेहरू की घरेलू नीति के चार स्तंभ थे। वह जीवन भर इन चार स्तंभों से सुदृढ़ अपनी इमारत को काफी हद तक बचाए रखने में कामयाब रहे।

जवाहरलाल नेहरू का निधन

चीन के साथ संघर्ष के कुछ समय पश्चात ही जवाहरलाल नेहरू अस्वस्थ रहने लगे। उनके स्वास्थ्य में गिरावट आने लगी। 1963 में उन्हें दिल का पहला और हल्का दौरा पड़ा। दूसरा दौरा 1964 में पड़ा जिसने उन्हें दुर्बल बना दिया और कुछ ही महीनो बाद 27 मई 1964 में तीसरा दौरा पड़ने पर उनकी मृत्यु हो गई।

 "जवाहरलाल नेहरू हमारी पीढ़ी के एक महानतम व्यक्ति थे। वह एक ऐसे अद्वितीय राजनीतिज्ञ थे, जिनकी मानव मुक्ति के प्रति सेवाएं स्मरणीय रहेगी। स्वाधीनता संग्राम के योद्धा के रूप में वह यशस्वी थे और आधुनिक भारत के निर्माण के लिए उनका अंशदान अभूतपूर्व था।"

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