June 25, 2024

International biodiversity day 2023 : कब और क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस?

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संपूर्ण विश्व में प्रत्येक वर्ष जैव विविधता दिवस 22 मई को मनाया जाता है। सभी जीवो एवं पारिस्थितिकी तंत्रों की असमानता एवं विभिन्नता को जैवविविधता कहा जाता है। विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां तथा पशु पक्षी एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करते हैं। उनका जीवन एक दूसरे पर निर्भर रहता है। धरती को रहने तथा जीवन यापन योग्य जैव विविधता की समृद्धि बनाती है। किंतु आज के आधुनिक युग में बढ़ते प्रदूषण के खतरनाक प्रभाव के कारण जीव जंतु और वनस्पतियों की कई प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं जंतु और वनस्पतियों के बीच पृथ्वी पर संतुलन बनाए रखने तथा लोगों में जैव विविधता के मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए संपूर्ण विश्व में जैव विविधता दिवस 22 मई को मनाया जाता है।

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कब और क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस? (When and Why International Day for Biological Diversity is Celebrated)?

संपूर्ण विश्व में प्रत्येक वर्ष जैव विविधता दिवस 22 मई को मनाया जाता है। सभी जीवो एवं पारिस्थितिकी तंत्रों की असमानता एवं विभिन्नता को जैवविविधता कहा जाता है। विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां तथा पशु पक्षी एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करते हैं। उनका जीवन एक दूसरे पर निर्भर रहता है। धरती को रहने तथा जीवन यापन योग्य जैव विविधता की समृद्धि बनाती है। किंतु आज के आधुनिक युग में बढ़ते प्रदूषण के खतरनाक प्रभाव के कारण जीव जंतु और वनस्पतियों की कई प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं जंतु और वनस्पतियों के बीच पृथ्वी पर संतुलन बनाए रखने तथा लोगों में जैव विविधता के मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए संपूर्ण विश्व में जैव विविधता दिवस 22 मई को मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाने की शुरुआत कब हुई?

मई 1992 को नैरोबी एक्ट जैव विविधता पर अभिसमय के पाठ को स्वीकार किया गया था। और 22 मई का दिन अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाने के लिए निर्धारित किया गया। 20 दिसंबर 2000 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव पारित करके 22 मई को विश्व जैव विविधता दिवस की शुरुआत की थी। 193 देशों द्वारा इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए गए थे।

क्या है जैव विविधता (What is Biological Diversity) ?

पृथ्वी पर जीवन की विशाल विविधता का वर्णन करने के संदर्भ में जैव विविधता शब्द का प्रयोग किया जाता है जैव विविधता का उपयोग विशेष रूप से एक क्षेत्र या पारिस्थितिक तंत्र में सभी प्रजातियों को संदर्भित करने के लिए किया जा सकता है। जैवविविधता पौधों बैक्टेरिया जानवरों और मनुष्यों सहित हर जीवित चीज को संदर्भित करती है। जैव विविधता को अक्सर पौधों जानवरों और सूक्ष्म जीवों की विस्तृत विविधता के संदर्भ में समझा जाता है। लेकिन इसमें प्रत्येक प्रजाति में विद्यमान आनुवंशिक अंतर भी शामिल होता है।

जैव विविधता के प्रकार (Types of Biological Diversity)


जय विविधता से जीव प्रजाति एवं उपयोगी पारिस्थितिकी तंत्र के बीच आपसी संबंध हमें कई महत्वपूर्ण उत्पाद देते हैं। प्रकृति में मौजूद जीवो और पारिस्थितिकीय तंत्र के अंतरसंबंधो की जानकारी जैवविविधता से प्राप्त होती है। जैव विविधता तीन प्रकार की होती है-

  1. एक ही प्रजाति के जीवो में होने वाली विविधताओं की आनुवंशिक विविधता
  2. प्रजाति विविधता जिसमें एक ही प्रजाति के जीव एक दूसरे से काफी समानता रखते हैं
  3. पारिस्थितिक विविधता जो आवास एवं जैव समुदायों के अंतर को प्रदर्शित करती है।

कब और क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस? (When and Why International Day for Biological Diversity is Celebrated)?

संपूर्ण विश्व में प्रत्येक वर्ष जैव विविधता दिवस 22 मई को मनाया जाता है। सभी जीवो एवं पारिस्थितिकी तंत्रों की असमानता एवं विभिन्नता को जैवविविधता कहा जाता है। विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां तथा पशु पक्षी एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करते हैं। उनका जीवन एक दूसरे पर निर्भर रहता है। धरती को रहने तथा जीवन यापन योग्य जैव विविधता की समृद्धि बनाती है। किंतु आज के आधुनिक युग में बढ़ते प्रदूषण के खतरनाक प्रभाव के कारण जीव जंतु और वनस्पतियों की कई प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं जंतु और वनस्पतियों के बीच पृथ्वी पर संतुलन बनाए रखने तथा लोगों में जैव विविधता के मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए संपूर्ण विश्व में जैव विविधता दिवस 22 मई को मनाया जाता है।

क्या है जैव विविधता का महत्व (What is the Significance of Biological Diversity)?

जैव विविधता का मानव जीवन में बहुत महत्व है। जैव विविधता के अभाव में प्राकृतिक आपदाओं जैसे- सूखा, बाढ़, तूफान आदि का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। इसलिए हमें एक ऐसे पर्यावरण का निर्माण करना है, जिससे जैवविविधता समृद्ध और टिकाऊ रह सके तथा आर्थिक गतिविधियों के लिए अवसर प्रदान कर सके। जैव विविधता का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। मानव जीवन प्रकृति का अनुपम उपहार है। मानव जाति के अस्तित्व एवं विकास के लिए पेड़ पौधे अनेक प्रकार के जीव- जंतु, हवा, पानी, मिट्टी, समुद्र,नदियां, महासागर, पठार आदि सभी प्राकृतिक उपहार का हमें संरक्षण करना चाहिए।
जैव विविधता का पर्यावरण एवं प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान है। अतः जैव विविधता के महत्व को देखते हुए जैव विविधता दिवस को अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने के लिए नैरोबी में 29 दिसंबर 1992 को हुए जैव विविधता सम्मेलन में निर्णय लिया गया था। लेकिन कई देशों द्वारा व्यावहारिक कठिनाइयां जाहिर करने के कारण 29 मई की जगह 22 मई का दिन निश्चित किया गया।
प्रकृति का संतुलन बनाए रखने तथा हमारे जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं को पूर्ण करने एवं विकास के लिए संसाधन प्रदान करने में विभिन्न प्रकार के जीवो की अलग-अलग भूमिका होती है। पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ विकास के लिए जैव विविधता का संरक्षण और उसका टिकाऊ उपयोग महत्वपूर्ण है। भोजन, औषधियां, इंधन, औद्योगिक कच्चा माल, रेशम, चमड़ा आदि जैसे जैव विविधता के आर्थिक महत्व को हम सब जानते हैं, लेकिन इसका पारिस्थितिक महत्व भी है। पारिस्थितिक महत्व को मृदा की उर्वरता को बनाए रखना, जैविक रूप से सड़ी गली चीजों को निपटाना, खाद्य श्रृंखला, भू -क्षरण रोकने, प्राकृतिक सौंदर्य बढ़ाने, रेगिस्तान का प्रसार रोकने एवं प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के रूप में देखा जा सकता है।

जैव विविधता के ह्रास के दुष्प्रभाव

जैव विविधता का हमारे जीवन में काफी महत्व है। जैव विविधता के ह्रास से प्रायः परितंत्र की उत्पादकता कम हो जाती है, जिसके कारण विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं को प्रदान करने संबंधी उनकी क्षमता कम हो जाती है, जिनका हम उपभोग करते हैं। इससे पारितंत्र में अस्थिरता आती है। जिस वजह से प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है। बाढ़, सूखा और तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाएं एवं मानव जनित दबाव जैसे प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से लड़ने की क्षमता भी कम हो जाती है।

जैव विविधता वाले देश

संपूर्ण विश्व में समृद्धतम जैव विविधता वाले कुल 17 देश है जिनमें भारत भी शामिल है। इन देशों में संपूर्ण विश्व के लगभग 70% जैवविविधता विद्यमान है। भारत के अतिरिक्त जैव विविधता से समृद्ध 16 देश हैं-
अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, चीन, मलेशिया, इंडोनेशिया, कांगो,मेडास्कर, पापुआ न्यू गिनी, फिलिपिंस, ब्राज़ील, कोलंबिया, इक्वेडोर, मैक्सिको, पेरू और वेनेजुएला।

भारत की जैव विविधता

भारत में संपूर्ण विश्व का केवल 24% भाग जैव विविधता का है लेकिन भारत में विश्व के ज्ञात जीव- जंतुओं का लगभग 5% भाग निवास करता है। ‘ भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण’ एवं ‘ भारतीय प्राणी सर्वेक्षण’ द्वारा किए गए सर्वेक्षणों के अनुसार भारत में लगभग 49000 वनस्पति प्रजातियां एवं 89000 प्राणी प्रजातियां पाई जाती है। विश्व में वनस्पति विविधता के आधार पर भारत 10वे क्षेत्र सीमित प्रजातियों के आधार पर 11वीं और फसलों की विविधता के आधार पर छठे स्थान पर है।
भारत विश्व के 12 चिन्हित मेगा बायोडायवर्सिटी केंद्रों में से एक है। भारत में 2 पूर्वी हिमालय और पश्चिमी घाट विश्व के 18 चिन्हित बायोलॉजिकल हॉटस्पॉट के अंतर्गत आते हैं। देश भर में 18 बायोस्फीयर भंडार भारत सरकार द्वारा स्थापित किए गए हैं। यह बायोस्फीयर भंडार जीव जंतुओं के प्राकृतिक भूभाग की रक्षा करते हैं।

क्या है ' जैव विविधता अधिनियम 2002' (What is ' Biological Diversity Act 2002')?

भारत में जैव विविधता संरक्षण के लिए ‘ जैव विविधता अधिनियम 2002’ संसद द्वारा पारित एक संघीय कानून है। ‘ जैव विविधता अधिनियम 2002’ को लागू करने के लिए 2003 में राष्ट्रीय ‘ जैव विविधता प्राधिकरण’ (NBA) की स्थापना की गई थी। जैव विविधता प्राधिकरण एक ऐसी सांविधिक स्वायत्त संस्था है, जो जैविक संसाधनों के साथ-साथ उनके सतत उपयोग से होने वाले लाभ की निष्पक्षता और समान बंटवारे जैसे मुद्दों पर भारत सरकार के लिए सलाहकार और विनियामक की भूमिका निभाती है।

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