National Girl Child Day 2023 :कब और क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय बालिका दिवस

National Girl Child Day 2023 (राष्ट्रीय बालिका दिवस 2023) :भारत में प्रत्येक वर्ष 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। इंदिरा गांधी जिस दिन पहली बार प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठी थी वह दिन 24 जनवरी था। इंदिरा गांधी को नारी शक्ति के रूप में याद किया जाता है। अतः 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस (National Girl Child Day ) के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। आज की बालिका चाहे खेल हो, राजनीति हो, घर हो, उद्योग हो, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। आज की लड़कियां देश के उच्च पदों पर आसीन होकर देश सेवा करने का काम कर रही हैं। प्रत्येक क्षेत्र में लड़कियां पूरी प्रतिबद्धता से भाग ले रही हैं और देश का नाम रोशन कर रही हैं। राजनीति में एक से बढ़कर एक दिग्गज नेता के रूप में लड़कियों ने अपने आप को प्रस्तुत किया है। वही खेल क्षेत्र में भी लड़कियां गोल्ड मेडल जीत रही है।

National Girl Child Day 2023_Janpanchayat Hindi news

NATIONAL GIRL CHILD DAY || राष्ट्रीय बालिका दिवस (24 जनवरी)

National Girl Child Day 2023 :भारत में प्रत्येक वर्ष 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। इंदिरा गांधी जिस दिन पहली बार प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठी थी वह दिन 24 जनवरी था। इंदिरा गांधी को नारी शक्ति के रूप में याद किया जाता है। अतः 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस (National Girl Child Day ) के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। आज की बालिका चाहे खेल हो, राजनीति हो, घर हो, उद्योग हो, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। आज की लड़कियां देश के उच्च पदों पर आसीन होकर देश सेवा करने का काम कर रही हैं। प्रत्येक क्षेत्र में लड़कियां पूरी प्रतिबद्धता से भाग ले रही हैं और देश का नाम रोशन कर रही हैं। राजनीति में एक से बढ़कर एक दिग्गज नेता के रूप में लड़कियों ने अपने आप को प्रस्तुत किया है। वही खेल क्षेत्र में भी लड़कियां गोल्ड मेडल जीत रही है।

राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने की शुरुआत कब हुई

भारत में राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 2008 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने की थी। देश में बालिकाओं के साथ होने वाले भेदभाव के प्रति लोगों को जागरूक करना इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य है। इस दिन देशभर में लड़कियों को उनका अधिकार दिलवाने के लिए भी अभियान चलाए जाते हैं। “बालिका बचाओ अभियान” इस दिन मुख्य रूप से चलाया जाता है।

राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का उद्देश्य (Purpose of celebrating National Girl Child Day)

हमारे देश में लड़कियों के प्रति होने वाले अपराध, भेदभाव और अमानवीय प्रथाओं जैसे भ्रूण हत्या, बाल विवाह आदि को दूर करना तथा बालिकाओं को सशक्त बनाना इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य है। इसी उद्देश्य से भारत सरकार ने 2015 में “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” अभियान की शुरुआत की और सरकार का यह अभियान काफी सफल रहा। इस अभियान के माध्यम से लड़कियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया जाता रहा है।
आज के दिन सिर्फ बालिका दिवस की बधाई नहीं देनी चाहिए अपितु यह शपथ लेना चाहिए कि हम लड़कियों को हर क्षेत्र में सम्मान देंगे और प्रत्येक क्षेत्र में उन्हें आगे बढ़ाएंगे। लड़कियों को वह सब करने की स्वतंत्रता देनी चाहिए जो एक लड़के या पुरुष को मिलती है। लड़कियों से शिक्षा, लिंगानुपात, सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर भेदभाव नहीं करना चाहिए।

राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का कारण (Reason for celebrating National Girl Child Day)

आज भले ही लड़कियां प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही है लेकिन आज भी सामाजिक कुरीतियां लड़कियों को अपना शिकार बना रही है। राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने के कई कारण हैं जिनमें से सामाजिक कुरीतियां और कुप्रथाएं सर्वप्रथम है। आइए जानते हैं किन कारणों से राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है
कुपोषण
आज भ्रूण हत्या आम बात हो गई है। कोख में ही लड़कियों को मार दिया जाता है। और यदि लड़की का जन्म हो भी जाता है तो या तो उन्हें लावारिस छोड़ दिया जाता है या उनके पालन-पोषण पर ध्यान नहीं दिया जाता जिससे वे कुपोषण का शिकार हो जाती है
आज के आधुनिक युग में भी लड़कियों को कई क्षेत्रों में हेय दृष्टि से देखा जाता है। उनको अच्छा भोजन और अच्छी शिक्षा नहीं मिलती। कम उम्र में लड़कियों का विवाह कर दिया जाता है। भारत में 20 से 24 साल की शादीशुदा औरतों में 44.5% औरतें ऐसी हैं जिनका विवाह 18 साल के पहले कर दिया गया। इन औरतों में से 22% औरते ऐसी हैं जो 18 वर्ष के पहले ही मां बनी और इन कम उम्र की औरतों से 73% सबसे ज्यादा बच्चे पैदा हुए इनमें से 67% बच्चे कुपोषण के शिकार हैं इस असमानता को दूर करने के लिए बालिका दिवस मनाया जाता है।

राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने के कारणों में लिंग अनुपात मुख्य कारण

राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने के कारणों में लिंग अनुपात मुख्य कारण है। कन्या भ्रूण हत्या की वजह से लड़कियों के अनुपात में काफी कमी आई है। यहां कुल लिंग अनुपात में 8 के अंतर के मुकाबले बच्चों के लिंग अनुपात में अब 24 का अंतर दर्ज है। यह अंतर भयावह भविष्य की ओर इशारा करता है। एशिया महाद्वीप में भारत की महिला साक्षरता दर सबसे कम है।” नेशनल कमिशन फॉर प्रोटक्शन आफ चाइल्ड राइट्स” की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत में 6 से 14 वर्ष तक की अधिकतर लड़कियों को प्रत्येक दिन 8 घंटे से भी ज्यादा समय घर के छोटे बच्चों को संभालने में बिताना पड़ता है। सरकारी आंकड़ों में 6 से 10 वर्ष की लड़कियों को स्कूल छोड़ना पड़ता है। 2008 के सरकारी सर्वेक्षण में 42% लड़कियों के स्कूल छोड़ने का कारण उनके माता-पिता द्वारा घर के काम करवाना तथा छोटे भाई-बहन की देखभाल करना है। इन दुष्परिणामों के प्रति आगाह करने के लिए 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है।

लड़कियों के जीवन की बाधाएं

राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का एक कारण यह भी है। लड़कियों को घर संभालने और अपने छोटे भाई बहनों की देखभाल में लगा दिया जाता है जो इनके जीवन सुधार की राह में बाधाएं उत्पन्न करता है। इन परिस्थितियों और भेदभाव को मिटाने के लिए बालिका दिवस मनाया जाता है। इस दिन को बालिकाओं को सफलता न मिल पाने के पीछे छिपे मूल कारणों को सामने लाने के रूप में मनाने की आवश्यकता है। बालिकाओं को इस दिन बहन, बेटी, पत्नी या मां के दायरे से बाहर निकलकर सामाजिक भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

आज भी हमारे देश में लड़का- लड़की में भेदभाव किया जाता है

आज भी हमारे देश में लड़का- लड़की में भेदभाव किया जाता है। जिस वजह से बालिकाओं की भ्रूण हत्या हो रही है। इस कुप्रथा को सबको मिलकर मिटाना इस दिन को मनाने का एक मुख्य कारण है। हमें लड़की के जन्म पर भी उतना ही खुश होना चाहिए जितना लड़के के जन्म पर होते हैं। लड़कियों को भी जीने का और जीवन में आगे बढ़ने का पूर्ण अधिकार है।

“जीने का उसको भी अधिकार
चाहिए उसे थोड़ा सा प्यार
जन्म से पहले ना उसे मारो
कभी तो अपने मन में विचारों
शायद वही बन जाए सहारा
डूबते को मिल जाए किनारा।”

आत्मनिर्भरता : बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाना इस दिन को मनाने का एक प्रमुख कारण

बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाना इस दिन को मनाने का एक प्रमुख कारण है। बालिकाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता है। जिससे वे बड़ी होकर शारीरिक, आर्थिक, मानसिक व भावनात्मक रूप से आत्मनिर्भर व सक्षम बन सके।
बालिकाओं के लिए सरकार द्वारा चलाई गई योजनाएं
बालिकाओं के विकास के लिए सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं, जिनमें “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” अभियान प्रमुख है। इसके अतिरिक्त किशोरियों और बालिकाओं के लिए सरकार ने “धनलक्ष्मी” “समग्र बाल विकास सेवा” और “सबला योजना” जैसी योजनाएं चलाई हैं। इन सब का उद्देश्य बालिकाओं को सशक्त और हर क्षेत्र में मजबूत बनाना है जिससे वे आगे चलकर एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकें।

राष्ट्रीय बालिका दिवस का नारा

“बेटी कुदरत का उपहार नहीं, करो उसका तिरस्कार
जो बेटी को दे पहचान, माता-पिता वही महान।”

राष्ट्रीय बालिका दिवस की थीम

 प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय बालिका दिवस पर एक थीम रखी जाती है 2019 की थीम “उज्जवल कल के लिए लड़कियों का सशक्तिकरण”थी। 2020 का बालिका दिवस “मेरी आवाज हमारा सामान भविष्य” की थीम पर मनाया गया। 2021 में बालिका दिवस की थीम “डिजिटल पीढ़ी हमारी पीढ़ी” रखी गई थी। 2022 में शिक्षा मंत्रालय ने “हमारी बेटी हमारी शान” की थीम के साथ राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया था।