National Deworming Day 2023 : राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कब मनाया जाता है ?

National Deworming Day 2023 (राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस) : देश में प्रत्येक बच्चे को कृमि मुक्त करने के लिए 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाता है। यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की एक पहल है।यह एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम है जिसके माध्यम से कम अवधि के दौरान अधिक संख्या में बच्चों तक पहुंचा जा सकता है। क्या है क्रीमी और इन से कैसे बचा जा सकता है आइए जानते हैं –

national-deworming-day-2023-Janpanchayat_Hindi_News

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 2023 ( National Deworming Day 2023)

National Deworming Day 2023 : देश में प्रत्येक बच्चे को कृमि मुक्त करने के लिए 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाता है। यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की एक पहल है।यह एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम है जिसके माध्यम से कम अवधि के दौरान अधिक संख्या में बच्चों तक पहुंचा जा सकता है। क्या है क्रीमी और इन से कैसे बचा जा सकता है आइए जानते हैं – 

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस की शुरुआत कब हुई ?

 राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस ( National Deworming Day ) सर्वप्रथम 2015 में घोषित किया गया था। वर्ष 2015 में 8.9 करोड़ बच्चों को कृमि नाशक दवाई दी गई जिससे 85% कवरेज प्राप्त हुआ। 2015 के बाद के वर्षों में कवरेज प्रतिशत में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।

क्रीमि या पेट के कीड़े क्या होते हैं ?

क्रीमि या कीड़े जो की मल से दूषित मिट्टी के माध्यम से फैलते हैं उन्हें मृदा संचारित क्रीमी (आंत परजीवी कीड़ा ,एसटीएच) कहा जाता है। आंतों के परजीवी के कुछ सामान्य प्रकार हैं- हुकवर्म, पिनवर्म , राउंडवर्म और व्हिपवर्म। यह सभी परजीवी क्रीमी मानव आंत में पनपते हैं।

 इन क्रिमियों से गंभीर स्वास्थ्य खतरा उत्पन्न होता है। ज्यादातर माता-पिता इस समस्या को अनदेखा करते हैं क्योंकि आंतो से जुड़े खतरों की पर्याप्त जानकारी नहीं होती।

कैसे होता है कृमि संक्रमण ?

 एसटीएच आंत परजीवी कीड़े मनुष्य द्वारा ग्रहण किए गए भोजन पर स्वयं को बनाए रखते हैं। यह कीड़े प्रतिदिन हजारों अंडे देते हैं जो संक्रमित व्यक्ति के मल में चले जाते हैं और संक्रमित व्यक्ति के खुले में शौच करने पर एसटीएच वाला मल मिट्टी में मिल जाता है। इस मिट्टी में जब फल या सब्जियां उगाई जाती हैं तो उन सब्जियों और फलों में भी परजीवी अंडे आ जाते हैं। जब इन सब्जियों और फलों को बिना धोए या अच्छी तरह से पकाए बिना सेवन किया जाता है तो ऐसे में एसटीएच संक्रमण हो सकता है।

 यदि दूषित मिट्टी को हाथ से छुए हो या पकड़ा गया हो और भोजन से पहले हाथों को ठीक से ना धोया गया हो तो यह परजीवी क्रीमी शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। ऐसा तब भी हो सकता है जब कोई व्यक्ति किसी संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित पानी पीता है।

एसटीएच संक्रमण मुख्य रूप से खराब स्वच्छता या अस्वच्छता वाले क्षेत्रों में ज्यादा फैलता है। यह महानगरों में रहने वाले बच्चों और वयस्कों में भी देखा जा सकता है

पेट में कृमि होने के क्या लक्षण है ? ( What are the symptoms of having worms in the stomach?)

 कृमि संक्रमण के लक्षणों के बारे में हम सबको जानकारी होनी चाहिए क्योंकि कृमि संक्रमण (worm infestation) एक आम समस्या है आइए जानते हैं कृमि संक्रमण के लक्षणों के बारे में-

  1. कृमि संक्रमण पंप का प्रमुख लक्षण है गुदाद्वार के आसपास खुजली। कृमि जब चलते हैं तो उनके रेंगने से खुजली जैसे महसूस होती है ।
  2. दूसरा लक्षण है भूख में कमी या बहुत अधिक भूख लगना।
  3. तीसरा लक्षण है पेट में दर्द
  4. चौथा लक्षण है बुखार, खांसी और घर-घराहट
  5. पांचवा लक्षण है विकास का रुक जाना
  6. छठा लक्षण है मल में कीड़े

कृमि संक्रमण का स्वास्थ्य पर प्रभाव ( Health effects of worm infection)

यदि लंबे समय तक व्यक्ति या बच्चे में कृमि संक्रमण रहता है तो यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्या उत्पन्न हो सकती हैं जैसे-

  • गुदा का बाहर आ जाना
  • गंभीर पेट दर्द
  • क्रीमी मानव के लिए निर्धारित पोषण को अवशोषित कर लेते हैं अतः कुपोषण और रक्ताल्पता हो सकती है
  • दस्त
  • बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में कमी

कृमि संक्रमण (एसटीएच) को कैसे रोका जा सकता है ?

कृमि संक्रमण को रोकने के लिए या इससे बचने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखें-

  • साफ शौचालय का उपयोग करें
  • खाने से पहले और शौच के बाद हाथ धोना
  • चप्पल और जूते पहनना
  • फल और सब्जियों को स्वस्थ एवं सुरक्षित पानी से धोना
  • पूर्ण रूप से पका हुआ भोजन खाना
  • घर से बाहर का कच्चा भोजन खाने से बचना
  • खाना पकाने और पीने के लिए उबले पानी का उपयोग करना
  • मिट्टी को छूने के बाद अपने हाथ ठीक से धोना
  • नाखूनों को अच्छी तरह से काटकर और साफ रखना।

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का उद्देश्य

 राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस सर्वप्रथम 2015 में घोषित किया गया था। वर्ष 2015 में 8.9 करोड़ बच्चों को कृमि नाशक दवाई दी गई जिससे 85% कवरेज प्राप्त हुआ। 2015 के बाद के वर्षों में कवरेज प्रतिशत में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।

कितने बच्चे हैं कृमि संक्रमित ?

विश्व भर में 836 मिलियन से अधिक बच्चों को परजीवी संक्रमण का खतरा है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार भारत में 1 से 14 वर्ष की आयु वर्ग के 241 मिलियन बच्चे परजीवी आन्त्रकृमि के संक्रमण से पीड़ित हैं। भारत में सिर्फ 2 राज्यों राजस्थान और मध्य प्रदेश में एसटीएच संक्रमण 20% से कम है।

वर्ष 2023 राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के आयोजन पर 1 वर्ष से 19 वर्ष के समस्त बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों, शासकीय एवं निजी स्कूलों, शासकीय अनुदान प्राप्त स्कूलों और महाविद्यालयों में कृमि नियंत्रण की दवा (अल्बेंडाजोल) दी जाएगी।