June 25, 2024

World Elder Abuse Awareness Day 2023 : क्यों मनाया जाता है विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस

आज के समय में बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार एक आम घटना हो गई है।घर परिवार के अतिरिक्त सार्वजनिक जगहों पर भी बुजुर्गों को उपेक्षा व तिरस्कार सहन करना पड़ता है। विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार। जागरूकता दिवस(World Elder Abuse Awareness Day) संयुक्त राष्ट्र में बुजुर्ग दुर्व्यवहार की रोकथाम के लिए अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 15 जून 2006 को प्रारंभ किया गया था। विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस का उद्देश्य बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार और उपेक्षा को प्रभावित करने वाली सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय प्रक्रियाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाकर वृद्ध लोगों को दुर्व्यवहार और उपेक्षा की बेहतर समझ को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर के समुदायों के लिए एक अवसर प्रदान करना है।

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आज के समय में बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार एक आम घटना हो गई है।घर परिवार के अतिरिक्त सार्वजनिक जगहों पर भी बुजुर्गों को उपेक्षा व तिरस्कार सहन करना पड़ता है। विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार। जागरूकता दिवस(World Elder Abuse Awareness Day) संयुक्त राष्ट्र में बुजुर्ग दुर्व्यवहार की रोकथाम के लिए अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 15 जून 2006 को प्रारंभ किया गया था। विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस का उद्देश्य बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार और उपेक्षा को प्रभावित करने वाली सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय प्रक्रियाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाकर वृद्ध लोगों को दुर्व्यवहार और उपेक्षा की बेहतर समझ को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर के समुदायों के लिए एक अवसर प्रदान करना है।

भारतीय संस्कृति में तो माता-पिता को ईश्वर का स्थान दिया गया है। किसी भी बच्चे के लिए उसकी दुनिया उसके माता-पिता ही होते हैं। मां एक बच्चे को अपने दूध से सींचती है तो पिता उसे उंगली पकड़कर चलना सिखाता है। माता-पिता जिन बच्चों को अपना भविष्य समझकर उन्हें सामर्थ्यवान बनाते हैं वही बच्चे वृद्ध माता-पिता को बोझ समझने लगते हैं। आज के आधुनिकता भरे जीवन में बच्चे माता-पिता को कदम-कदम पर नीचा दिखाते हैं तथा उनकी बढ़ती उम्र के कारण उन्हें लाचारी का एहसास दिलाते हैं। आज तो बुजुर्गों के प्रति दुर्व्यवहार इतना अधिक बढ़ गया है कि जिस उंगली को पकड़कर बच्चे इस दुनिया में पहला कदम रखते हैं। उसी उंगली को पकड़कर वह माता-पिता को घर से बाहर निकाल देते हैं, और ऐसा करने में उन्हें जरा भी हिचकिचाहट नहीं होती।
घर परिवार की अतिरिक्त सार्वजनिक स्थलों पर भी बुजुर्गों को तिरस्कार एवं अपमान सहन करना पड़ता है। बढ़ती जनसंख्या एवं चिकित्सकीय सुविधाओं के कारण बुजुर्गों की जनसंख्या बढ़ रही है। लेकिन इसके साथ ही बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
बुजुर्गों की समस्याओं के प्रति लोगों में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता रोकथाम संघ की सलाह पर 2006 में प्रस्ताव 66/127 के तहत संयुक्त राष्ट्र ने 15 जून को बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस(World Elder Abuse Awareness Day) मनाना प्रारंभ किया।

क्या है बुजुर्ग दुर्व्यवहार (What is Elder Abuse)?

बुजुर्ग दुर्व्यवहार एक वृद्ध व्यक्ति के साथ किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया दुर्व्यवहार है, जिसका वृद्ध व्यक्ति के साथ एक साथी, परिवार के सदस्य या मित्र के रुप में भरोसे का रिश्ता है। या यूं कहें कि किसी अपने द्वारा बुजुर्गों के साथ किया गया दुर्व्यवहार बुजुर्ग दुर्व्यवहार कहलाता है। बुजुर्गों के साथ शारीरिक मानसिक, वित्तीय, मनोवैज्ञानिक या यौन किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार हो सकता है। इस दुर्व्यवहार में अपमान और तिरस्कार भी शामिल है। बुजुर्ग दुर्व्यवहार के दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक परिणाम भी हो सकते हैं।
बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार मानवाधिकारों का उल्लंघन है कभी-कभी अनजाने में भी हम बुजुर्गों के प्रति दुर्व्यवहार कर बैठते हैं। बुजुर्ग दुर्व्यवहार ऐसा मुद्दा है जो ना केवल बुजुर्गों को प्रभावित करता है बल्कि एक व्यापक समुदाय भी इससे प्रभावित होता है। प्रत्येक उम्र के लोगों की भांति ही बुजुर्गों को भी शोषण और दुर्व्यवहार मुक्त जीवन जीने का अधिकार है। इस अधिकार का उल्लंघन करना मानवाधिकार का उल्लंघन है।

कौन प्रभावित होता है बुजुर्ग दुर्व्यवहार से (Who is Affected by Elder Abuse) ?

वृद्ध लोगों के प्रति दुर्व्यवहार की घटनाओं में वृद्धि होने लगी है, क्योंकि कई देशों में बुजुर्गों की आबादी बढ़ रही है। यद्यपि वयोवृद्ध दुर्व्यवहार की सीमा अज्ञात है फिर भी यह एक वैश्विक मुद्दा है। बुजुर्ग दुर्व्यवहार एक ऐसी समस्या है जो विकासशील और विकसित दोनों देशों में मौजूद है।
बुजुर्ग दुर्व्यवहार से महिलाएं, पुरुष, विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोग, शिक्षित- अशिक्षित, धनी- निर्धन, ग्रामीण- शहरी हर प्रकार के लोग प्रभावित हैं। बुजुर्ग दुर्व्यवहार विश्व भर में लाखों वृद्ध व्यक्तियों के स्वास्थ्य और मानवाधिकार को प्रभावित करता है।

बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के अवसर पर क्या करें ?

  • हम सभी को दुर्व्यवहार मुक्त सुखी जीवन जीने का अधिकार है। अतः बुजुर्गों दुर्व्यवहार के मुद्दे को विश्व स्तर पर उठाना चाहिए।
    इस दिन बुजुर्गों की सेवा का संकल्प लें उनकी देखभाल करें यदि पूरे दिन हम बुजुर्गों की देखभाल करने में असमर्थ हैं तो कुछ घंटों की देखभाल ही उनकी जिंदगी बदल सकता है।
  • बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के बारे में स्थानीय सामुदायिक केंद्रों, स्कूलों, सहायता प्राप्त करने की सुविधाओं या अन्य आभासी और मॉडरेट चर्चा बोर्ड आधारित प्लेटफार्मो के लिए एक इंटरनेट या फोन की व्यवस्था करें।
  • सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म और मुफ्त टेली कॉन्फ्रेंसिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तकनीकों का उपयोग करके एक वर्चुअल इवेंट बनाएं।
  • विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस(World Elder Abuse Awareness Day) के बारे में सोशल मीडिया के माध्यम से अपने परिवार और मित्रों के साथ जागरूकता फैलाएं।
  • 15 जून को विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस मनाने के लिए छात्रों को वयोवृद्ध दुर्व्यवहार के संकेतों पर आभासी रूप से शिक्षित करने के लिए अपने शिक्षक से कहें।
  • बड़े बुजुर्गों के मूल्य और सम्मान के बारे में बच्चों के लिए कला निबंध या कविता प्रतियोगिता का आयोजन करें।

पिछले कुछ वर्षों से हम घरों के बंद दरवाजों के पीछे बुजुर्गों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के बारे में जानते हैं लेकिन सार्वजनिक स्थलों पर भी उनके साथ किया गया दुर्व्यवहार विचारणीय है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के एक अध्ययन के अनुसार विश्व में प्रत्येक छह में से एक बुजुर्ग के साथ दुर्व्यवहार होता है। बुजुर्गों के दुर्व्यवहार और तिरस्कार की घटनाएं शहरों ही नहीं गांव में भी होती हैं।आज की उपभोक्तावादी संस्कृति की वजह से सामाजिक मूल्य भी बदल गए हैं। जिससे नई पीढ़ी की सोच में भी परिवर्तन हो गया है। परिवार की सीमित होती परिभाषा ने बुजुर्गों के लिए अनेक मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
एक सर्वे के मुताबिक शहरों में 25.3 फ़ीसदी वृद्ध जबकि गांव में 21.38 फ़ीसदी बुजुर्ग अकेले रह रहे हैं। आज सोशल मीडिया के संपर्क में लोग दुनिया जहान की खबर तो रखते हैं लेकिन घर के बुजुर्ग माता-पिता की खोज खबर लेने के लिए उनके पास समय नहीं होता।
हमारी संस्कृति में जिस माता-पिता को ईश्वर का स्थान दिया गया है। उनके चरणों में ही स्वर्ग माना गया है, जिस समाज में बुजुर्गों का विशेष मान सम्मान तथा परिवार में सदैव वर्चस्व रहता था, जिन बुजुर्गों की राय या आदेश के बिना कोई कार्य नहीं किया जाता था। आज उसी समाज में वृद्ध होते माता पिता के लिए कोई स्थान नहीं। उस घर में उनके लिए जगह नहीं। बच्चों के दिल में उनके लिए प्रेम नहीं। बच्चों की नजर में उनके लिए मान सम्मान नहीं। बुजुर्ग माता-पिता से ना तो बच्चे बात करना पसंद करते हैं और ना ही राय मांगना आवश्यक समझते हैं। आज बुजुर्ग होते माता पिता अपने ही घर में अपनों के बीच ही अपेक्षित और तिरस्कृत महसूस करते हैं। आज माता-पिता की उपस्थिति बच्चों की निजता में बाधक सिद्ध हो रही है। आज बच्चे स्वतंत्र रहना चाहते हैं ऐसी संकुचित सोच के कारण बुजुर्ग अकेले रहने को विवश हैं।

जिस घर को कभी माता-पिता ने तिनका- तिनका जोड़ कर इतने प्यार से बनाया था, आज उसी घर में बुजुर्ग माता-पिता के लिए जगह नहीं रह गई है। देश में बढ़ते हुए वृद्धाश्रमों की संख्या इस सच्चाई को बयां कर रही हैं। आज अपने ही घर में बुजुर्ग सीमित हो गए हैं। उन्हें अपने घर में ही स्वतंत्रता नहीं है। आज वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों के चेहरों की खामोशियां और उनकी सुनी आंखें उनका अकेलापन चीख चीख कर बयां करती हैं।
विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस(World Elder Abuse Awareness Day) मनाने की सार्थकता सही अर्थों में तभी है जब हम बुजुर्गों के लिए सुरक्षित, सुखी तथा प्रसन्न वातावरण उपलब्ध कराएं।
जेम्स कार्फील्ड के अनुसार
“यदि वृद्धावस्था की झुर्रियां पड़ती है तो उन्हे ह्रदय पर मत पड़ने दो कभी भी आत्मा को वृद्ध मत होने दो।”
आज समाज में यह जागरूकता फैलानी होगी कि बुजुर्ग हमारी जिम्मेदारी नहीं, अपितु आवश्यकता है। यह बुजुर्ग हमारे जीवन का अनमोल खजाना है। इनको सहेज कर रखना प्रत्येक समाज एवं संस्कृति का धर्म एवं नैतिक जिम्मेदारी है। जब तक हम बुजुर्गों के महत्व को नहीं समझेंगे, उनकी पीड़ा को महसूस नहीं करेंगे तब तक हमारी सारी उपलब्धियां अस्तित्वहीन होंगी। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आज उम्र के जिस दौर से वे गुजर रहे हैं कल उसी दौर से हम भी गुजरेंगे, क्योंकि बुढ़ापा जीवन की पूर्व निर्धारित अवस्था है। एक शाश्वत सत्य है, जो प्रत्येक मनुष्य के जीवन में आता है। अतः हमें बुजुर्गों के प्रति सदैव आदर, सम्मान और प्रेम का भाव व्यक्त करना चाहिए।

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