World Pulses Day 2023 : क्यों मनाया जाता है विश्व दलहन दिवस ?

World Pulses Day 2023 (विश्व दलहन दिवस) : दलहन भारतीय भोजन का एक प्रमुख अंग है। दाल एक ऐसा भोज्य पदार्थ है जिससे हमारे शरीर को कई पोषक तत्व मिलते हैं। इसीलिए इन्हें अपने प्रतिदिन के आहार में शामिल करने की सलाह दी जाती है। आज विश्व दलहन दिवस है। आइए जानते हैं विश्व दलहन दिवस कब और क्यों मनाया जाता है तथा इसका उद्देश्य क्या है?

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World Pulses Day (विश्व दलहन दिवस)

दलहन भारतीय भोजन का एक प्रमुख अंग है। दाल एक ऐसा भोज्य पदार्थ है जिससे हमारे शरीर को कई पोषक तत्व मिलते हैं। इसीलिए इन्हें अपने प्रतिदिन के आहार में शामिल करने की सलाह दी जाती है। आज विश्व दलहन दिवस है। आइए जानते हैं विश्व दलहन दिवस कब (World Pulses Day) और क्यों मनाया जाता है तथा इसका उद्देश्य क्या है?

क्यों मनाया जाता है विश्व दलहन दिवस ? (Why is World Pulses Day celebrated?)

 दालों का हमारे जीवन में क्या महत्व है तथा दाले पोषण और खाद्य सुरक्षा के लिए कितनी महत्वपूर्ण है इस से अवगत कराने के लिए विश्व दलहन दिवस मनाया जाता है। दाल में कई सारे पोषक तत्व विद्यमान हैं। उनमें भी सबसे ज्यादा प्रोटीन है। या यूं कहें कि शाकाहारीयों के लिए दाल प्रोटीन का सबसे अच्छा और सस्ता विकल्प है। दाल में वसा कम होती है तथा यह फाइबर से भरपूर होते हैं।

विश्व दलहन दिवस मनाने की शुरुआत कब हुई ?

प्रत्येक वर्ष 10 फरवरी को विश्व दलहन दिवस (Wolrd Pulses Day) मनाया जाता है। दलहन को फली के रूप में भी जाना जाता है। दलहन को वैश्विक भोजन के रूप में मान्यता प्राप्त है। अंतरराष्ट्रीय दलहन दिवस 2016 में पहली बार मनाया गया था। 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 फरवरी को विश्व दलहन दिवस के रूप में घोषित करने का निर्णय लिया। पहला विश्व दलहन दिवस 10 फरवरी 2019 को मनाया गया था। 20 दिसंबर 2013 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2016 को अंतरराष्ट्रीय दाल वर्ष (दलहन का अंतरराष्ट्रीय वर्ष IYp) के रूप में घोषित करते हुए एक प्रस्ताव (A/RES/68/231) को अपनाया था।

क्या है दलहन ? (What are called pulses?)

 दाल को फलियां भी कहा जाता है। यह भोजन के लिए सुपाच्य होने वाले पौधों के बीच होते हैं जो खाए भी जाते हैं। दालों में चने, सुखी मटर, अरहर, सुखी फलियां, राजमा, मसूर, उड़द, मूंग के अलावा और कई प्रकार की दाले हैं। पहले तो सिर्फ भारत के मुख्य भोजन में ही दालें शामिल थी लेकिन आज विश्व भर में दालों का भरपूर मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है। दलहन सिर्फ बीज मात्र नहीं अपितु पोषक तत्वों का खजाना है। दाल विटामिन और खनिज के साथ-साथ आयरन, फोलेट, जिंक, मैग्निशियम का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
दाल के फायदे
दाल पोषक तत्व प्रोटीन और फाइबर से युक्त होती है यह टाइप टू मधुमेह और आंत के कैंसर जैसी बीमारियों से बचने में मदद करती है। तथा सभी उम्र के लिए महत्वपूर्ण है। छोटे बच्चे 6 वर्ष की उम्र से दाल खाना शुरू कर देते हैं।
दाल शाकाहारियो के लिए सबसे सस्ता और अच्छा विकल्प है।
जहां दालों की पैदावार होती है उस क्षेत्र की मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा ठीक रहती है। यह मिट्टी की रोगाणुओं से रक्षा करती है तथा सिंथेटिक उर्वरकों की आवश्यकता को कम करती है। दालों के कवरेज फिक्सिंग गुण मिट्टी की उर्वरता में सुधार करते हैं जिससे खेत की उर्वरता बढ़ जाती है।
सतत विकास के 2030 सहयोग की रणनीति को प्राप्त करने में दालों का प्रमुख योगदान है।
दालें गरीब खाद्य श्रृंखला सुरक्षा, बिगड़ते स्वास्थ्य और जीवमंडल परिवर्तन की हिस्सेदारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
किसानों के लिए दालें एक महत्वपूर्ण फसल है जिन्हें वे बेच और खा सकते हैं। इससे किसानों को आर्थिक स्थिरता बनाने में मदद मिलती है।

भारत विश्व में दाल का सबसे बड़ा उत्पादक देश

प्रत्येक वर्ष 10 फरवरी को विश्व दलहन दिवस मनाया जाता है। दलहन को फली के रूप में भी जाना जाता है। दलहन को वैश्विक भोजन के रूप में मान्यता प्राप्त है। अंतरराष्ट्रीय दलहन दिवस 2016 में पहली बार मनाया गया था। 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 फरवरी को विश्व दलहन दिवस के रूप में घोषित करने का निर्णय लिया। पहला विश्व दलहन दिवस 10 फरवरी 2019 को मनाया गया था। 20 दिसंबर 2013 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2016 को अंतरराष्ट्रीय दाल वर्ष (दलहन का अंतरराष्ट्रीय वर्ष IYp) के रूप में घोषित करते हुए एक प्रस्ताव (A/RES/68/231) को अपनाया था।

विश्व दलहन दिवस मनाने की शुरुआत कब हुई ?

   भारत विश्व में सबसे ज्यादा दलहन का उत्पादक और उपभोक्ता भी है। दूसरे स्थान पर है कनाडा। कनाडा सबसे अधिक दाल का उत्पादन करता है। भारतीय दलहन अनुसंधान केंद्र उत्तर प्रदेश राज्य के कानपुर जिले में स्थित है। इसकी स्थापना वर्ष 1983 को हुई थी इस अनुसंधान संस्थान की स्थापना आईसीएआर द्वारा की गई थी।

दलहन दिवस मनाने का उद्देश्य

विश्व दलहन दिवस मनाने का उद्देश्य विश्व स्तर पर दालों की पहुंच बढ़ाना है। विश्व दलहन दिवस पर लोग अलग-अलग खाद्य उत्पादों में दालों के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने का प्रयास करते हैं। विश्व दलहन दिवस के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि हम अपने आहार में दालों को अपनाएं। दालों का सेवन हमारे शरीर एवं स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है।

विश्व दलहन दिवस खाद्य सुरक्षा व पोषण के उद्देश्य से स्थाई खाद्य उत्पादन के हिस्से के रूप में दालों के पोषण संबंधी लाभों के बारे में जागरूकता फैलाने का अवसर प्रदान करता है।

विश्व दलहन दिवस की थीम

    विश्व दलहन दिवस 2022 में “स्थाई कृषि खाद्य संदेश को प्राप्त करने वाले युवाओं को मतदाता बनाने के लिए दलहन” की थीम के तहत मनाया गया था।

वर्ष 2023 में विश्व दलहन दिवस की थीम है-

         “सतत भविष्य के लिए दलहन”