क्या Kangana Ranaut पर भारी पड़ेंगी शाही परिवार की महारानी या कंगना भाजपा को दिलाएंगी जीत की हैट्रिक ?

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अक्सर अपने बयानों से सुर्खियां बटोरने वाली कंगना रनौत को भाजपा ने मंडी लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। कंगना ने अपने करियर की शुरुआत ‘फैशन’ फिल्म से वर्ष 2006 में की थी। फिल्म इंडस्ट्री में 18 साल बीताने के बाद अब कंगना रनौत अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत करने जा रही हैं। कंगना रनौत मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के एक गांव से आती हैं। कंगना का एक घर कुल्लू- मनाली में भी है। कंगना रनौत पद्मश्री से सम्मानित हैं। वे अक्सर बॉलीवुड स्टार से लेकर विपक्ष के तमाम नेताओं पर हमला बोलती रही हैं। कंगना रनौत को बॉलीवुड की क्वीन कहा जाता है। पहली बार राजनीति में कदम रखने वाली कंगना कांग्रेस के गढ़ मंडी में क्या बीजेपी को जीत दिला पाएंगी? क्या बॉलीवुड क्वीन, शाही परिवार की महारानी पर भारी पड़ेगी आईए जानते हैं।

शाही परिवार के दबदबे और कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली मंडी में भाजपा ने कंगना रनौत पर दावा चला है। कभी इंदिरा गांधी तो कभी जयललिता बनाकर कंगना ने जब- जब राजनीति से जुड़ा कोई किरदार निभाया, उसे अपनी अदाकारी से जीवंत कर दिया। लेकिन वास्तविक जीवन में यह पहला मौका है, जब कंगना रनौत ने सियासत की दुनिया में कदम रखा है। कंगना को भाजपा ने मंडी से टिकट दिया है।

कहने के लिए तो कंगना के लिए मंडी गृह जनपद है। लेकिन मंडी में कंगना रनौत की राह आसान नजर नहीं आ रही है। एक तरफ मंडी लोकसभा क्षेत्र में बीजेपी के नेता असंतुष्ट हैं तो दूसरी ओर पूर्व शाही परिवार के प्रभाव के कारण कंगना रनौत की राह मुश्किलों से भरी हो सकती है, क्योंकि हिमाचल प्रदेश अध्यक्ष और महारानी के नाम से मशहूर प्रतिभा सिंह पहले चुनाव नहीं लड़ने वाली थी लेकिन उन्होंने यह कहा कि यदि पार्टी आला कमान कहेगा तो मंडी में कंगना रनौत के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार हैं। प्रतिभा सिंह का कहना है कि-

“वैसे तो कंगना हिमाचल की बेटी है लेकिन उनके क्षेत्र दूसरा है। वह फिल्मों से आती हैं।जहां तक राजनीति की बात है तो राजनीति में लोग ऐसे व्यक्ति चाहते हैं जो उनके संपर्क में हो, जो उस क्षेत्र के सभी मुद्दों पर काम करे और यह कंगनाकेलिएसंभव नहीं है।”

कांग्रेस के दबदबे वाली सीट है मंडी लोकसभा सीट

मंडी सीट पर शुरू से ही कांग्रेस का दबदबा रहा है। 1951 में कांग्रेस के गोपी राम, 1957 में जोगिंदर सिंह, 1962 में ललित सेन, 1967 में फिर से ललित सेन, 1971 में वीरभद्र सिंह ने चुनाव जीता। इन सभी ने कांग्रेस से चुनाव जीta।1977 में कांग्रेस बड़े उलट फेर का शिकार हुई और बीएलडी के गंगा सिंह ने चुनाव में जीत हासिल की।1980 में एक बार फिर कांग्रेस ने बढ़त बनाई और वीरभद्र सिंह चुनाव जीत गए। 1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार सुखराम ने जीत हासिल की। 1989 से पहले मंडी लोकसभा सीट पर बीजेपी की कहीं चर्चा ही नहीं थी, लेकिन 1989 के चुनाव में महेश्वर सिंह ने चुनाव में जीत दर्ज कर पार्टी का खाता खुलवाया था। इसके बाद 1998 और 1999 में भी महेश्वर सिंह चुनाव जीते, लेकिन वर्ष 2004 में कांग्रेस ने प्रतिभा सिंह को चुनाव में उतारा और प्रतिभा सिंह सांसद चुनी गई। 2009 के चुनाव में वीरभद्र सिंह फिर से सांसद चुने गए। वर्ष 2014 और 2019 के भाजपा के रामस्वरूप शर्मा मंडी लोकसभा सीट से चुनाव जीते।

शाही परिवारों का रहा कब्जा

मंडी के चुनाव में कांग्रेस बीजेपी के बीच सबसे खास बात यह है कि इस सीट पर राज परिवारों का ही कब्जा रहा है। मंडी लोकसभा सीट पर अब तक 17 बार लोकसभा चुनाव और उपचुनाव हो चुके हैं और इनमें से 13 बार राज परिवार के सदस्यों ने जीत हासिल की है। इस सीट पर वीरभद्र सिंह के परिवार को 6 बार जीत मिली। तीन बार वीरभद्र सिंह और तीन बार उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह को चुना गया। कल्लू के रूपी सियासत के राजा महेश्वर सिंह भी यहां से चुनाव जीत कर लोकसभा जा चुके हैं। उन्होंने इस सीट से तीन बार चुनाव जीता था।

क्या है मंडी का जातीय समीकरण

राजनीतिक सफर के साथ मंडी का जातीय समीकरण भी राज परिवार की ओर ही झुकता नजर आया है, क्योंकि मंडी लोकसभा क्षेत्र में 33.6% राजपूत आबादी और 21.4 % ब्राह्मण आबादी है। मंडी में अनुसूचित जाति की आबादी करीब 30% है, जो ब्राह्मणों से अधिक है लेकिन इस सीट पर अब तक सिर्फ एक बार अनुसूचित जाति का सांसद चुना गया है। यानी राजनीतिक सफर पर जातीय समीकरण पर नजर डालें तो कंगना रनौत पर शाही परिवार की महारानी भारी पड़ती हुई नजर आ रही हैं।वही लोकल भाजपा नेता भी कंगना की उम्मीदवारी से असंतुष्ट हैं। ऐसे में कंगन भाजपा को मंडी से हैट्रिक दिला पाएंगी या नहीं, इसका फैसला 4 जून को जनता करेगी।