क्या Trivendra Singh Rawat चुनौतियों से पार पाकर BJP को जीत की हैट्रिक दिला पाएंगे? : Lok Sabha Election 2024

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Trivendra Singh Rawat, Lok Sabha Election 2024: भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड के पूर्व मंत्री पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड की हरिद्वार लोकसभा सीट पर प्रत्याशी बनाया है। उत्तराखंड की हरिद्वार लोकसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पुत्र वीरेंद्र रावत को त्रिवेंद्र रावत के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारा हैतो वही बसपा ने मौलाना जमील अहमद कासमी को टिकट देकर मुकाबले को और रोचक बना दिया है। कौन हैं त्रिवेंद सिंह रावत? त्रिवेंद्र सिंह रावत के सामने हरिद्वार सीट पर भाजपा को जीत की हैट्रिक दिलाने में क्या हैं चुनौतियां? आईए जानते हैं-

कौन है त्रिवेंद्र सिंह रावत (Who is Trivendra Singh Rawat)?

खैरासैंण, पौड़ी गढ़वाल में जन्मे 63 वर्षीय त्रिवेंद्र सिंह रावत की उत्तराखंड में भाजपा के विस्तार में अहम भूमिका रही है। पढ़ाई के दिनों से ही त्रिवेंद्र सिंह संघ और भाजपा की विचारधारा से जुड़ गए थे और संगठन में अनेक पदों पर रहकर उन्होंने पार्टी की मजबूती के लिए कार्य किया। 1979 में राजनीतिक सफर को शुरू करने के बाद से त्रिवेंद्र ने पूरे राज्य का भ्रमण कर पार्टी को मजबूती देने के लिए कार्य किया।

त्रिवेंद्र सिंह रावत का मुख्यमंत्री बनने तक का सफर

1979 में त्रिवेंद्र रावत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर प्रचारक के रूप में काम करना प्रारंभ किया। 1993 में वे भाजपा से जुड़े और पार्टी के क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाए गए। 1997 और 2002 में उन्हें भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। चुनावी राजनीति में त्रिवेंद्र का पदार्पण 2002 में हुआ और डोईवाला सीट से विधायक चुने गए। 2007 में भी वे डोईवाला विधानसभा से चुनाव जीत सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। हालांकि 2012 में यहां से चुनाव हार गए। 2017 में वह फिर डोईवाला से चुनाव जीते और 17 मार्च 2017 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। कार्यकाल पूरा होने से पहले 9 मार्च 2021 को उन्होंने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था और तभी से वह चुनावी राजनीति से बाहर चल रहे थे।

हरिद्वार सीट पर क्या हैं त्रिवेंद्र रावत की चुनौतियां?

हरिद्वार सीट पर भाजपा को जीत की हैट्रिक लगाने की चुनौती त्रिवेंद्र रावत के सामने है। जानकारों का ऐसा मानना है कि ऐसा करने के लिए उनकी राह आसान नहीं होगी। इसके लिए उन्हें मैदानी और पर्वतीय मतदाताओं को एक साथ साधना होगा। साथ ही तराई के इलाके में पार्टी के प्रदर्शन को सुधारना भी चुनौती पूर्ण होगा।

विधानसभा चुनाव में जिन आठ सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था वहां त्रिवेंद्र रावत को मत प्रतिशत बढ़ाते हुए कांग्रेस और बसपा के मजबूत गढ़ में सेंध लगानी होगी। इसके लिए उन्हें विधानसभा की हारी हुई सीटों पर संगठन को फिर सक्रिय करना होगा। इन चुनौतियों से पार पाने के लिए वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

हरिद्वार सीट पर क्या है सामाजिक समीकरण ?

हरिद्वार संसदीय सीट पर 20 लाख 37000 मतदाता हैं।इस सीट की एक खासियत यह भी है कि इसमें देहरादून जिले की तीन विधानसभाएं धर्मपुर, डोईवाला और ऋषिकेश भी शामिल है। यह तीनों सीटें पर्वतीय मूल बाहुल्य वाली हैं। हरिद्वार जिले की अन्य 11 विधानसभा सीटों पर ओबीसी दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं की तादाद अच्छी खासी है।अब देखना यह है कि क्या त्रिवेंद्र सिंह रावत इन चुनौतियों से पार पाकर भाजपा को जीत की हैट्रिक दिला पाएंगे?