June 25, 2024

World Blood Donor Day 2023 : किस वैज्ञानिक के जन्म दिवस पर मनाया जाता है विश्व रक्तदाता दिवस ?

प्रत्येक वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस (World Blood Donor Day)मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रत्येक वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस के रूप में घोषित किया गया है। मानव शरीर को स्वस्थ रखने एवं सुचारू रूप से कार्य करने के लिए खून की आवश्यकता होती है। बिना रक्त के मानव शरीर हाड़ मांस का ढांचा मात्र है। रक्त के अभाव में व्यक्ति की जान भी जा सकती है। रक्तदान करने से किसी जरूरतमंद के लिए रक्त की पूर्ति हो जाती है।

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विश्व रक्तदाता दिवस (World Blood Donor Day) 2023, 14 June || About blood Donation || Blood Donation Day

किस वैज्ञानिक के जन्म दिवस पर मनाया जाता है विश्व रक्तदाता दिवस ?

प्रत्येक वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस (World Blood Donor Day)मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रत्येक वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस के रूप में घोषित किया गया है। मानव शरीर को स्वस्थ रखने एवं सुचारू रूप से कार्य करने के लिए खून की आवश्यकता होती है। बिना रक्त के मानव शरीर हाड़ मांस का ढांचा मात्र है। रक्त के अभाव में व्यक्ति की जान भी जा सकती है। रक्तदान करने से किसी जरूरतमंद के लिए रक्त की पूर्ति हो जाती है।

विश्व रक्तदाता दिवस(World Blood Donor Day) स्वेच्छा से रक्तदान करने वाले उन रक्तदाताओं को धन्यवाद करने का अवसर है। जो लोगों के जीवन को बचाते हैं। कई बार आपात परिस्थितियों में दुर्घटना के होने पर ऑपरेशन या किसी अन्य कारण से जब किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में रक्त दाताओं द्वारा दिए गए खून से कई लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। इन्हीं रक्त दाताओं को धन्यवाद करने के लिए प्रत्येक वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है।

विश्व रक्तदाता दिवस का इतिहास (History of World Blood Donor Day)

100 फ़ीसदी स्वैच्छिक रक्तदान नीति की नीव विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 1997 में डाली थी। वर्ष 1997 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने यह लक्ष्य रखा था कि विश्व के 124 देश अपने यहां स्वैच्छिक रक्तदान को ही बढ़ावा दें। विश्व रक्तदान दिवस(World Blood Donor Day) मनाने की शुरुआत विश्व स्वास्थ्य संगठन, अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस संघ और रेड क्रीसेंट समाज द्वारा वर्ष 2004 में की गई थी। जिसमें 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। वर्ष 2004 में 14 जून को पहला विश्व रक्तदाता दिवस मनाया गया था।

14 जून को ही क्यों मनाया जाता है विश्व रक्तदाता दिवस (Why is Blood Donor Day Celebrated only on 14th June)?

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 14 जून को ही विश्व रक्तदाता दिवस(World Blood Donor Day) के रूप में क्यों चुना गया इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। वर्ष 1930 में शरीर विज्ञान में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित, प्रसिद्ध ऑस्ट्रेलियाई जीव विज्ञानी और भौतिकीविद कार्ल लेंडस्टाइनर का जन्म 14 जून को हुआ था। अतः उनके जन्म दिवस के अवसर पर विश्व रक्तदाता दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। क्योंकि कार्ल लेंडस्टाइनर ने हीं रक्त में अग्गुल्यूटिनिन की मौजूदगी के आधार पर रक्त का अलग-अलग रक्त समूहो ए, बी, ओ, में वर्गीकरण करके चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

विश्व रक्तदाता दिवस मनाने का उद्देश्य(Objectives of World Blood Donor Day)

विश्व रक्तदाता दिवस(World Blood Donor Day) का मुख्य उद्देश्य है स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देना, जिससे रक्त की आवश्यकता पड़ने पर उसके लिए पैसे देने की आवश्यकता ना पड़े। विश्व रक्तदाता दिवस विश्वभर में रक्त की आवश्यकता को पूर्ण करने, लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने तथा स्वैच्छिक रक्त दाताओं के मनोबल को बढ़ाने एवं उन्हें धन्यवाद देने के लिए मनाया जाता है।
स्वैच्छिक रक्तदान पर अब तक 49 देशों ने हीं अमल किया है। तंजानिया जैसे देश में 80% रक्तदाता स्वैच्छिक रक्तदान करते हैं। वे रक्तदान के पैसे नहीं लेते। लेकिन कई देशों में रक्तदाता आज भी पैसे लेकर रक्तदान करते हैं, जिनमें भारत भी शामिल है। ऑस्ट्रेलिया के साथ कुछ अन्य देश भी हैं जहां रक्तदाता रक्तदान के पैसे नहीं लेते। ब्राजील में तो रक्तदान के पश्चात किसी भी प्रकार की सहायता नहीं लेने के लिए कानून का प्रावधान है।

भारत में रक्तदान की क्या है स्थिति?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के तहत भारत में वार्षिक एक करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत के मुकाबले 75 लाख यूनिट रक्त ही उपलब्ध हो पाता है। जिसका तात्पर्य है कि प्रत्येक वर्ष सैकड़ों मरीज 25 लाख यूनिट रक्त के अभाव में दम तोड़ देते हैं। भारत की राजधानी दिल्ली में आंकड़ों के मुताबिक 30 फ़ीसदी रक्त ही जुट पाता है, जबकि यहां प्रत्येक वर्ष 350 लाख यूनिट रक्त की आवश्यकता रहती है। दिल्ली जैसे हालात ही भारत के अन्य हिस्सों में भी है। भारत में रक्त दाताओं का आंकड़ा कुल आबादी का 1% भी नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार कुल रक्तदान का 59% रक्तदान भारत में स्वैच्छिक होता है। दिल्ली में 50 के ऊपर ब्लड बैंक है, लेकिन एक लाख यूनिट रक्त की कमी रहती है। इस मामले में विश्व के कई देशों की तुलना में भारत काफी पीछे हैं।
नेपाल जैसे देश में भी रक्त की जरूरत का 90 फ़ीसदी स्वैच्छिक रक्तदान से पूरा होता है। अपने निरंकुश शासन के लिए प्रसिद्ध बर्मा में भी 60 फ़ीसदी रक्तदान की आवश्यकता स्वैच्छिक रक्तदान से पूरी होती है। वही इंडोनेशिया में रक्त की जरूरत का 77 फ़ीसदी, श्रीलंका में 60 फ़ीसदी तथा थाईलैंड में 95 फ़ीसदी स्वैच्छिक रक्तदान से पूरा होता है।

रक्तदान कौन कर सकता है (Who can Donate Blood)

रक्तदान एक बहुत ही कल्याणकारी कार्य है। हम सब को यह पता होना चाहिए कि मानव शरीर में रक्त निर्माण की प्रक्रिया सदैव चलती रहती है। अतः रक्तदान से कोई नुकसान नहीं होता। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार 16 से 60 वर्ष का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति, जिसका वजन 45 किलोग्राम से अधिक हो और जो हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी अथवा एड्स जैसी बीमारी से ग्रसित ना हो वह रक्तदान कर सकता है। जो व्यक्ति नियमित रक्तदान करते हैं वे हृदय संबंधी बीमारियों से दूर रहते हैं।
एक व्यक्ति यदि 350 मिलीग्राम रक्तदान करता है तो 24 घंटे के अंदर शरीर में उसकी पूर्ति हो जाती है तथा 21 दिनों में गुणवत्ता की पूर्ति हो जाती है।
चिकित्सकों का मानना है कि रक्त का लंबे समय तक भंडारण नहीं किया जा सकता है रक्त की संरचना ऐसी है कि उसमें समाहित लाल रक्त कोशिकाएं 3 महीने (120 दिन) में स्वयं ही मर जाती हैं। अतः प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति 3 महीने में एक बार रक्तदान कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार आधा लीटर रक्त तीन लोगों की जान बचा सकता है।

रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियां

रक्त के महत्व को हम सभी जानते हैं। रक्त के बिना जीवन असंभव है। वही रक्तदान करके हम औरों की जीवन को भी बचा सकते हैं। भारत में भी अभी बहुत से लोगों में यह भ्रांति फैली हुई है कि रक्तदान शरीर को कमजोर बनाता है, और दान गए रक्त की भरपाई में महीनों लग जाते हैं। साथ-साथ लोगों में यह भ्रम भी है कि नियमित रक्तदान रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है। इन भ्रांतियों से लोग इस प्रकार भ्रमित हैं कि रक्तदान के नाम से ही सिहर उठते हैं। लोगों में फैली भ्रांतियों से पर्याप्त मात्रा में रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की जा सकती। अतः विश्व रक्तदाता दिवस (World Blood Donor Day)रक्तदान से संबंधित इन भ्रांतियों को दूर करने तथा रक्तदान को प्रोत्साहित करने का कार्य करता है।

विश्व रक्तदाता दिवस पर होने वाली गतिविधियां

इस दिन विश्व स्वास्थ्य संगठन, रेड क्रॉस अंतर्राष्ट्रीय संघ और रेड क्रिसेंट समाज, रक्तदान संगठनों द्वारा वैश्विक स्तर पर लोगों को रक्तदान के लिए जागरूक करते हुए कई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
विश्व रक्तदाता दिवस(World Blood Doner Day) के अवसर पर स्कूल एवं शिक्षण संस्थान अभियान चलाते हैं। इन अभियानों में लोग सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
रक्तदान के प्रति लोगों को जागरुक एवं प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न रक्तदाता शिविर लगाए जाते हैं। तथा पोस्टर और बैनर लगाए जाते हैं।
भारत में विश्व रक्तदाता दिवस (World Blood Doner Day का नेतृत्व भारत का केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय करता है। इस दिन विभिन्न स्थानों पर रक्तदान शिविर लगाकर लोगों से रक्तदान का आग्रह किया जाता है।

विश्व रक्तदाता दिवस 2023 की मेजबानी करने वाला देश

वर्ष 2022 में विश्व रक्तदाता दिवस की मेजबानी मैक्सिको द्वारा की गई थी। वर्ष 2023 में अल्जीरिया अपने राष्ट्रीय रक्तदान सेवा के माध्यम से विश्व रक्तदाता दिवस 2023 की मेजबानी करेगा। 14 जून 2023 को अल्जीरिया में रक्तदाता दिवस पर वैश्विक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

रक्तदान से जुड़े कुछ तथ्य

  • रक्तदान करने से पहले या बाद में शराब या धूम्रपान का सेवन ना करें इसके साथ-साथ बीड़ी सिगरेट तंबाकू खाने से भी बचें।
  • रक्तदान के पश्चात स्वस्थ आहार के साथ ही अधिक मात्रा में फल और जूस का सेवन करें।
  • रक्तदान के पश्चात 12- 18 घंटे के बाद तक भारी व्यायाम न करें।
    ऐसे व्यक्ति रक्तदान ना करें जिन्हें 6- 12 महीने के दौरान दिल का दौरा पड़ा हो, या हाल ही में टैटू बनवाए हो, या जो मलेरिया से पीड़ित हों।

विश्व रक्तदाता दिवस की थीम (Theme of World Blood Donor Day)

विश्व रक्तदाता दिवस 2030 की थीम है-
” रक्त दो, प्लाज्मा दो, जीवन बांटो, बार-बार बांटो।”
(Give Blood,Give Plasma,Share Life,Share Often)

यह विषय उन रोगियों पर ध्यान केंद्रित करता है जिन्हें जीवन भर रक्तदान सहायता की आवश्यकता है। यह उस भूमिका को रेखांकित करता है, जो प्रत्येक व्यक्ति रक्त या प्लाज्मा का मूल्यवान उपहार देकर निभा सकता है। रक्तदान लाखों लोगों की जान बचा सकता है। जिन्हे बीमारी या चोट, जटिल ऑपरेशन या प्रसव संबंधी समस्याएं हैं, उन रोगियों के स्वास्थ्य लाभ में मदद करता है। प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं में रक्त भंडारण भी आवश्यक है।
रक्त के कुछ ऐसे प्रकार होते हैं जो दुर्लभ होते हैं। अत: दुर्लभ प्रकार के रक्तदाताओं को रक्तदान के लिए प्रोत्साहित करना विश्व रक्तदाता दिवस के आयोजन का एक हिस्सा है। आज भी कई देशों में रक्त दाताओं की कमी है।
इस प्रकार विश्व रक्तदाता दिवस (World Blood Donor Day) इन देशों के लिए रक्तदान के बारे में जागरूकता बढ़ाने और रक्त की आपूर्ति बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि अधिक से अधिक लोगों के जीवन की रक्षा हो सके।