कड़े मुकाबले के बीच फांसी अयोध्या (फैजाबाद) लोकसभा सीट

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2024 के लोकसभा चुनाव में पूरे देश की निगाहें अयोध्या (फैजाबाद लोकसभा सीट) पर हैं क्योंकि भाजपा की घोषणा पत्र में बहु प्रतीक्षित मुद्दा रहे राम मंदिर का निर्माण हो चुका है। 2014 और 2019 के भाजपा के घोषणा पत्र में राम मंदिर निर्माण एक प्रमुख मुद्दा था और इन दोनों चुनाव में भाजपा को बड़ी जीत मिली थी। 2024 के चुनाव में जहां सपा और बसपा जातीय आधार पर भाजपा को टक्कर देने के प्रयास में है। वहीं भाजपा को राम मंदिर निर्माण में योगदान के कारण बड़ी जीत की उम्मीद है।

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की जन्मभूमि के रूप में पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान रखने वाली अयोध्या नगरी (फैजाबाद लोकसभा) अभी तक भव्य मंदिर में रामलला की प्राण- प्रतिष्ठा के बाद आने वाले श्रद्धालुओं से भक्ति रस में सराबोर थी लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद अब इस सीट पर भी चुनावी रंग चढ़ चुका है। 5 मई (रविवार) को प्रधानमंत्री अयोध्या दौरे पर आए थे, जहां उन्होंने अपना रोड शो भी किया लेकिन यहां की सीट राम मंदिर निर्माण और जातीय पर समीकरण के बीच कड़े संघर्षों में फंसी है।

फैजाबाद में मोदी के नाम पर वोट पड़ने की उम्मीद

फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा सीटें हैं और पांचो विधानसभा सीटों पर अलग-अलग जातीय समीकरण हैं।एक तरफ जहां भाजपा समर्थक सीधे राम मंदिर और प्रधानमंत्री मोदी को वोट देने की बात कहते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ सपा के समर्थक दलितों एवं पिछड़ों की गोलबंदी का दावा करते हैं। फैजाबाद लोकसभा में कुर्मियों की भूमिका खास तौर से महत्वपूर्ण है। इसलिए इस चुनाव में सवर्ण से इतर यादव, मुस्लिम, पड़ी और कुर्मी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं।हालांकि राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि यह चुनाव सीधे तौर पर मोदी समर्थक और मोदी विरोधियों के बीच है। इस सीट पर प्रत्याशी के नाम पर नहीं बल्कि प्रधानमंत्री और राम मंदिर के नाम पर वोट पड़ेंगे।

भाजपा की हैट्रिक रोकने का पुरजोर प्रयास

बीजेपी पिछली दो चुनाव में इस सीट पर जीत दर्ज कर चुकी है। भाजपा के प्रत्याशी लल्लू सिंह दो बार जीतने के बाद तीसरी बार जीत की हैट्रिक लगाने मैदान में उतरे हैं। तो वहीं बसपा और विपक्षी इंडिया गठबंधन लल्लू सिंह की हैट्रिक के रास्ते में घेराबंदी करने में जुटे हैं। बसपा ने सच्चिदानंद पांडे को मैदान में उतारा है तो वहीं इंडिया गठबंधन ने विधायक और पूर्व मंत्री अवधेश प्रसाद को सपा के टिकट पर प्रत्याशी बनाया है। भाजपा के साथ एनडीए के सहयोगी दल हैं तो विपक्षी गठबंधन में सपा और कांग्रेस है। इस चुनाव में तीन प्रत्याशी मैदान में जरूर है लेकिन मुख्य मुकाबला लल्लू सिंह और अवधेश प्रसाद के बीच ही है। लल्लू सिंह पांच बार अयोध्या से विधायक रह चुके हैं।

2012 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें फैजाबाद से उम्मीदवार बनाया था और दोनों बार लल्लू सिंह पार्टी की उम्मीदों पर खरे उतरे। वही लल्लू सिंह के मुख्य प्रतिद्वंद्वी अवधेश प्रसाद 9 बार विधायक रह चुके हैं और मुलायम व अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी थे। हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में दोनों प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर है।

भाजपा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैजाबाद लोकसभा सीट ?

आज यदि अयोध्या की वैश्विक पहचान मिली है तो यह राम मंदिर निर्माण के कारण ही हो सका है और राम मंदिर का निर्माण भाजपा के शासनकाल में ही संभव भी हो सका है अन्यथा 500 वर्षों से रामलला टेंट में विराजमान थे। राम मंदिर निर्माण के बाद अब भाजपा की राह में कोई अवरोध नहीं रह गया है। वैसे भी भाजपा को लोकसभा चुनाव में अयोध्या विधानसभा क्षेत्र से बड़ी राहत मिली है। इस क्षेत्र से वह जितना आगे होती है उसकी राह इतनी आसान हो जाती है।

प्रधानमंत्री के दौरे ने बनाया इस सीट को खास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रविवार 5 मई को अयोध्या में चुनावी दौरा था। इस दौरान उन्होंने लल्लू सिंह के समर्थन में रोड शो भी किया और जनसभा को भी संबोधित किया। इससे पहले 22 जनवरी को रामलला की प्राण- प्रतिष्ठा समारोह में आए थे। रविवार को फिर से पीएम मोदी ने अयोध्या में भव्य रोड शो किया। प्रधानमंत्री के रूप में अयोध्या में उनका यह चौथा दौर था। ऐसे में नरेंद्र मोदी के लिए चुनाव में यह सीट उनकी प्रतिष्ठा से जुड़ गई है।

  • मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की जन्म भूमि और उनसे जुड़े अन्य पौराणिक स्थलों की वजह से अयोध्या नगरी की वैश्विक पहचान है।
  • अयोध्या विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी है। राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या को धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के तौर पर पहचान मिली।
  • हिंदू धर्म को दिशा- दशा देने वाले मठ मंदिर और उनसे जुड़े विद्वान, संत, महंत भी अयोध्या में ही है।
  • महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से अयोध्या क्षेत्र को मिली नई पहचान।
  • दीपावली की पूर्व संध्या पर होने वाला भव्य दीपोत्सव और रामलीला ने भी अयोध्या को दी विशेष पहचान।
  • पुनर्निर्माण के बाद आकर्षण का केंद्र बना अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन।
  • निजी क्षेत्र में मसौदा और रौजागांव चीनी मिल तथा यश पेपर मिल से अयोध्या की औद्योगिक पहचान है।
  • एक जिला एक उत्पाद के रूप में चयनित गुड़।

अयोध्या क्षेत्र में कितनी विधानसभा सीटें हैं?

फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा सीटें हैं – अयोध्या, बीकापुर, रुदौली, दरियाबाद, मिल्कीपुर।

फैजाबाद लोक सभा क्षेत्र के मतदाताओं ने सभी पार्टियों को अपनाया

फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र के मतदाताओं की बात करें तो यहां के मतदाताओं का मिजाज बदलता रहा है। उन्होंने हर पार्टी को अपना वोट दिया। इस सीट पर कांग्रेस व भाजपा के साथ ही जनता पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी के अलावा बसपा, सपा के प्रत्याशी भी जीतते रहे हैं। 1977 में जनता पार्टी के बाद 1994 तक कांग्रेस का इस सीट पर कब्जा बना रहा। इसके बाद 1989 में मित्रसेन यादव ने कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की। फिर 1991 व1996 में भाजपा के विनय कटिहार ने जीत दर्ज की। 1998 में मित्रसेन यादव सपा से सांसद चुने गए। यह वह दौर था जब राम मंदिर आंदोलन पूरे देश में चरम पर था। विनय कटियार एक बार फिर 1999 में सांसद चुने गए, तो 2004 में बसपा के टिकट पर मित्रसेन यादव तीसरी बार सांसद बने। 2009 में कांग्रेस के निर्मल खत्री भी दूसरी बार सांसद बने।