कौन हैं दिनेश प्रताप सिंह ?जिन्हें रायबरेली में राहुल गांधी के खिलाफ भाजपा ने बनाया उम्मीदवार

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लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा ने रायबरेली से दिनेश प्रताप सिंह को टिकट दिया है। यूपी सरकार में मंत्री और एमएलसी दिनेश प्रताप को रायबरेली से चुनावी मैदान में उतारा गया है। बीजेपी उम्मीदवार दिनेश प्रताप सिंह तीन बार एमएलसी का चुनाव जीत चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने रायबरेली से चुनाव लड़ा था लेकिन कांग्रेस की सोनिया गांधी से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस ने रायबरेली से राहुल गांधी को चुनावी मैदान में उतारा है। राहुल गांधी ने नामांकन की आखिरी तारीख 3 मई को अपना नामांकन भी भर दिया है।

कौन है दिनेश प्रताप सिंह ?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ठाकुर मतों को साधने के लिए बीजेपी ने दिनेश प्रताप सिंह पर दांव खेला है। दिनेश प्रताप सिंह के पूरे परिवार की राजनीति पर अच्छी पकड़ है। गुनावर कमंगलपुर गांव में एक मिट्टी के घर में रहने से लेकर रायबरेली के माध्य में भव्य ‘पंचवटी’ में रहने तक दिनेश प्रताप सिंह के परिवार ने पिछले दो दशकों में क्षेत्र की राजनीति पर अपनी पकड़ स्थापित की है। दिनेश प्रताप सिंह के परिवार के कई सदस्य एमएलसी, एमएलए और जिला पंचायत अध्यक्ष सहित प्रमुख पदों पर कार्यरत रहे हैं।

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दिनेश प्रताप सिंह का राजनीतिक सफर

दिनेश प्रताप सिंह ने 2004 में समाजवादी पार्टी के साथ अपना राजनीतिक सफर शुरू किया, जब उन्होंने विधान परिषद का चुनाव लड़ा। 2007 में उन्होंने बसपा के टिकट पर तिलोई निर्वाचन क्षेत्र से यूपी विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद दिनेश प्रताप सिंह ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस में रहते हुए दिनेश प्रताप सिंह ने पहली बार 2010 में एमएलसी चुनाव जीता,2016 में वह फिर से एमएलसी चुने गए। दिनेश प्रताप सिंह न केवल गांधी परिवार के वफादार के रूप में उभरे बल्कि जब वह कांग्रेस में थे तब वह बूथ प्रबंधन और गांधी परिवार के लिए प्रचार में भी शामिल थे।

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2018 में भाजपा में हुए शामिल

2019 के लोकसभा चुनाव के कुछ महीने पहले 2018 में दिनेश प्रताप सिंह कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। इसके बाद 2019 के चुनाव में भाजपा ने उन्हें सोनिया गांधी के खिलाफ उतारा लेकिन सोनिया गांधी से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि उन्होंने चार लाख वोट पाकर महत्वपूर्ण समर्थन हासिल किया। 2019 में दिनेश प्रताप सिंह के बेहतर प्रदर्शन के कारण 2022 में बीजेपी ने उन्हें एमएलसी बनाया। इसी साल जब योगी सरकार दोबारा सत्ता में लौटी तो उन्हें बागवानी, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार और कृषि निर्यात के लिए राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया।

पिछले चुनाव में हार के बावजूद भाजपा ने दिनेश प्रताप सिंह पर क्यों जताया भरोसा ?

पिछले कुछ दिनों में क्षेत्र में दिनेश प्रताप सिंह की पकड़ मजबूत हुई है। पिछले लोकसभा चुनाव में वह भले ही हार गए लेकिन सोनिया गांधी के जीत का अंतर काफी कम कर दिया था। 2014 में सोनिया गांधी को 3.5 लाख वोटो से जीत मिली थी, लेकिन 2019 में दिनेश प्रताप सिंह से मुकाबला हुआ तो जीत का यह अंतर घटकर 1.67 लाख रह गया था। 2014 में बीजेपी उम्मीदवार अजय अग्रवाल को लगभग 1.73 लाख वोट मिले थे। 2019 में बीजेपी उम्मीदवार दिनेश प्रताप सिंह को लगभग 3.67 लाख वोट मिले। रायबरेली में बीजेपी का यह अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन था।

2019 के लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी से हारने के बावजूद ठाकुर जाति के दिनेश प्रताप सिंह को स्थानीय फैक्टर और निर्वाचन क्षेत्र में उनके परिवार के प्रभाव सहित कई कारणों से राहुल गांधी के खिलाफ भाजपा द्वारा फिर से मैदान में उतारा गया है।