इस सीट पर कांग्रेस – भाजपा में सीधा मुकाबला: Amethi Lok Sabha Election Phase 5 Voting

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Amethi Lok Sabha Election Phase 5 Voting: अमेठी लोकसभा सीट पूरे उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश-विदेश में भी वीआईपी सीट के नाम से जानी जाती है। अमेठी नेहरू, गांधी परिवार की राजनीतिक कर्मभूमि रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ,उनके पोते संजय गांधी, राजीव गांधी और उनकी पत्नी सोनिया गांधी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 2014 में राहुल गांधी ने यहां से जीत दर्ज की थी लेकिन 2019 के चुनाव में स्मृति ईरानी ने कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को 55,120 मतों से हराकर कांग्रेस के इस सबसे मजबूत दुर्गा को ढहा दिया।

2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने अमेठी सीट छोड़ दी है और रायबरेली चले गए हैं। जबकि इस सीट पर कांग्रेस ने कभी राहुल के प्रतिनिधि रहे किशोरी लाल शर्मा को स्मृति के मुकाबले मैदान में उतारा है। इस सीट पर 20 मई को मतदान होना है।

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अमेठी लोकसभा सीट का इतिहास

अमेठी लोकसभा सीट पर पहली बार 1967 में चुनाव हुआ था, जिसमें कांग्रेस के विद्याधर बाजपेयी पहले संसद सदस्य बने थे। 1971 से 1977 तक के चुनाव में जनता दल पार्टी के रविंद्र प्रताप सिंह सांसद बने। 1980 में कांग्रेस के संजय गांधी ने रविंद्र प्रताप सिंह को हराकर इस सीट पर जीत दर्ज की लेकिन संजय गांधी की एक विमान दुर्घटना में मृत्यु के बाद 1981 में इस सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसमें राजीव गांधी ने जीत हासिल की।

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1984 के चुनाव में ऐसे भी हालात बने जब मुकाबला गांधी बनाम गांधी हो गया। राजीव गांधी के सामने संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतर आईं। अमेठी सीट का असली वारिश बनने के लिए दोनों में रोचक लड़ाई हुई लेकिन परिणाम एक तरफा राजीव गांधी के पक्ष में रहे। राजीव गांधी चुनाव जीतकर देश के प्रधानमंत्री बने।

1989 में भी फिर से राजीव गांधी को जीत मिली। 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद आए परिणामों में भी वह निर्वाचित हुए थे। इसके बाद अमेठी की बागडोर कैप्टन सतीश शर्मा ने संभाली और उपचुनाव में वह विजयी हुए। 1996 में भी कैप्टन सतीश शर्मा ही सांसद चुने गए। 1998 में पहली बार अमेठी सीट पर भाजपा का खाता खुला जब डॉक्टर संजय सिंह ने कैप्टन सतीश शर्मा को शिकस्त दी।

1999 में सक्रिय राजनीति में आने के बाद सोनिया गांधी ने भी अमेठी सीट चुनी और यहां से विजयी हुई। 2004 में उन्होंने यह सीट पुत्र राहुल गांधी के लिए छोड़ दी। राहुल गांधी लगातार तीन बार यहां से सांसद बने लेकिन 2019 के चुनाव में भाजपा की स्मृति ईरानी ने उन्हें शिकस्त दी।

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ऐतिहासिक बना 2019 का चुनाव

कांग्रेस का गढ़ और नेहरू परिवार की कर्मभूमि रहे अमेठी में 2019 का चुनाव देश की राजनीति के इतिहास में दर्ज हो गया। यह ऐसा चुनाव था जिसमें पहली बार कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष को हार का सामना करना पड़ा था। तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को भाजपा की स्मृति ईरानी ने 55,120 मतों से पराजित कर दिया था।

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क्या है जातीय समीकरण ?

अमेठी लोकसभा सीट 30 लाख से अधिक जनसंख्या वाली सीट है, जिसमें 20 लाख से अधिक वोटर 2024 के चुनाव में मतदान करेंगे। इस सीट पर पिछड़ा वर्ग की संख्या भले ही अधिक हो लेकिन इस लोकसभा सीट पर ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं और जिस करवट ब्राह्मण मतदाता जाते हैं जीत का ताज भी उसी के सर सजता है।

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