लोकसभा चुनाव के मैदान में पहली बार उतरे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर

लोकसभा चुनाव के मैदान में पहली बार उतरे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर

लोकसभा चुनाव के मैदान में पहली बार उतरे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर

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पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे मनोहर लाल खट्टर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं तथा राज्य में भाजपा की लगातार दो बार सरकार बनाने का इतिहास अपने नाम दर्ज करवा चुके हैं। लगभग 40 वर्षों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा संगठन में काम कर चुके खट्टर की सफल रणनीतिकार के रूप में खासी धाक है। हिमाचल प्रदेश में संघ प्रचारक रहे मनोहर लाल खट्टर को राजनीति में नरेंद्र मोदी लेकर आए। रोहतक के रहने वाले खट्टर को करनाल सीट से लड़ाया गया था। नरेंद्र मोदी जब हिमाचल प्रदेश में प्रभारी हुआ करते थे तब खट्टर सह प्रभारी थे।

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मौजूदा लोकसभा चुनाव में मनोहर लाल खट्टर पहली बार करनाल से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं और भाजपा के 400 पार के नारे को साकार करने के लिए प्रयासरत हैं।

मनोहर लाल खट्टर का जन्म 5 मई 1954 को रोहतक के निदाना गांव में हुआ था। खट्टर के पिता पंजाबी समुदाय से संबंध रखते थे। खट्टर का परिवार भारत- पाकिस्तान बंटवारे के समय पाकिस्तान से भारत आ गया था। मनोहर लाल खट्टर ने रोहतक से मैट्रिक की पढ़ाई की और दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि ली। ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का फैसला किया और आरएसएस में शामिल हो गए।

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1976 में आरएसएस के संपर्क में आए

मनोहर लाल खट्टर मेडिकल की तैयारी करना चाह रहे थे लेकिन उनके पिता चाहते थे कि वह बिजनेस में समय दें। 1974 में मनोहर भाइयों के साथ दिल्ली के रानी बाग आए और बिजनेस शुरू किया। 1976 में वह आरएसएस के संपर्क में आए और आपातकाल के दौरान संपर्क बढ़ता गया। 1980 में वह संघ से पूर्णकालिक तौर पर जुड़ गए।

हरियाणा बीजेपी में प्रदेश संगठन मंत्री रहे

1994 में खट्टर को हरियाणा बीजेपी में प्रदेश संगठन मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। 1996 में बीजेपी ने विधानसभा चुनाव बंसीलाल की पार्टी हरियाणा विकास पार्टी के साथ मिलकर लड़ा। इस चुनाव की रणनीति बनाने में मनोहर लाल की अहम भूमिका रही।

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कई राज्यों में संभाला चुनाव प्रबंधन

मनोहर लाल खट्टर कई राज्यों में संगठन की जिम्मेदारी सफलतापूर्वक संभाल चुके हैं। वर्ष 2002 में खट्टर को जम्मू- कश्मीर का प्रभारी बनाया गया। वर्ष 2004 में उन्हें दिल्ली और राजस्थान सहित 12 राज्यों में चुनाव की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद इन्हें जम्मू- कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश का रीजनल संगठन महामंत्री बनाया गया। खट्टर 2000 से 2014 तक बीजेपी हरियाणा के जनरल सेक्रेटरी रहे।

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गुजरात में 2001 में कच्छ में भूकंप के बाद चुनाव के प्रबंधन की जिम्मेदारी तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने खट्टर को सौंपी थी। तब भाजपा को छः में से तीन सीटें मिली थीं। इसके बाद उन्हें नए राज्य बने छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके का प्रभारी बनाकर भेजा गया तो वहां भी भाजपा ने 12 में से 10 सीटों पर जीत दर्ज की। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हरियाणा के चुनाव समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। उन्होंने खुद 2014 और 2019 में करनाल से विधानसभा का चुनाव जीता। दूसरी बार 2019 में मनोहर लाल के नेतृत्व में भाजपा ने प्रदेश में विधानसभा चुनाव लड़ा वह सरकार बनाने में कामयाब रहे।

मौजूदा लोकसभा चुनाव में खट्टर बीजेपी के 400 पार के नारे को साकार करने के लिए कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने राज्य में मुस्लिम समुदाय से भी ज्यादा से ज्यादा वोट हासिल करने की रणनीति तैयार की है। खट्टर को ईमानदार नेता के रूप में पहचाना जाता है। वह करीब साढ़े नौ साल तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे हैं। खट्टर का राजनीतिक तजुर्बा ही उनकी ताकत है।