History of Jhansi City: झाँसी का इतिहास और 12 प्रमुख पर्यटक स्थल

History of Jhanshi City: झाँसी का इतिहास और 12 प्रमुख पर्यटक स्थल: झांसी (Jhansi)उत्तर प्रदेश के प्रमुख ऐतिहासिक शहरों में से एक रहा है। इस शहर का भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यह शहर भारतीय वीरांगनाओं में से एक झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के लिए भी जाना जाता है। वहीं झांसी की रानी जिन्होंने 1857 की क्रांति में ब्रिटिश सैनिकों के दांत खट्टे कर दिए थे। झांसी (Jhansi)बुंदेलखंड के अंतर्गत आता है। यह उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है। झांसी का किला शहर के मध्य बांगरा नामक पहाड़ी पर निर्मित है। इस किले के चारों तरफ झांसी शहर फैला हुआ है।

History of Jhansi and 12 major tourist places

झांसी शहर का क्या है इतिहास ? (What is the history of Jhansi city?)

 झांसी (Jhansi)उत्तर प्रदेश  के प्रमुख ऐतिहासिक शहरों में से एक रहा है। इस शहर का भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यह शहर भारतीय वीरांगनाओं में से एक झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के लिए भी जाना जाता है। वहीं झांसी की रानी जिन्होंने 1857 की क्रांति में ब्रिटिश सैनिकों के दांत खट्टे कर दिए थे। झांसी (Jhansi)बुंदेलखंड के अंतर्गत आता है। यह उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है। झांसी का किला शहर के मध्य बांगरा नामक पहाड़ी पर निर्मित है। इस किले के चारों तरफ झांसी शहर फैला हुआ है।

झांसी का इतिहास (History Of Jhansi)

 झांसी(Jhansi )राज्य 9वी शताब्दी तक चंदेल वंश के राजाओं के अधीन था। झांसी के पहाड़ी क्षेत्र के वास्तुशिल्पीय खंडहर और कृत्रिम जलाशय 9वी शताब्दी के ही प्रतीत होते हैं, लेकिन 11वीं शताब्दी में झांसी ने अपना महत्व खो दिया। 14वीं शताब्दी के आसपास विंध्याचल क्षेत्र से नीचे मैदानी भागों में बुंदेलों ने आना प्रारंभ किया और धीरे-धीरे सारे मैदानी क्षेत्र में फैल गए। 17 वीं शताब्दी में ओरछा शासक वीर सिंह बुंदेला के अधीन झांसी फिर से प्रमुखता से उभरी। ओरछा शासक वीर सिंह बुंदेला ने 1613 में झांसी किले का निर्माण करवाया।

झांसी नाम के पीछे किंवदंती

शहर का नाम झांसी (Jhansi) होने के पीछे भी एक किंवदंती प्रचलित है।  ऐसा कहा जाता है कि वीर सिंह बुंदेला ने दूर से पहाड़ी पर एक छाया देखी जिसे बुंदेली भाषा में  “झाई सी” बोला गया। इसी शब्द के अपभ्रंश से शहर का नाम झांसी पड़ा।

मुगलकालीन शासको के बुंदेला क्षेत्र में लगातार आक्रमण के कारण 17वीं शताब्दी में बुंदेला राजा छत्रसाल ने 1732 ईस्वी में मराठों से सहायता मांगी। छत्रसाल की मृत्यु के पश्चात 1734 में बुंदेला का एक तिहाई हिस्सा मराठों को दे दिया गया। मराठों ने इस शहर के विकास के लिए ओरछा से लोगों को लाकर यहां बसाया। मराठा शक्ति जब कमजोर पड़ने लगी तो 1806 में ब्रिटिश तथा मराठों के बीच समझौता के तहत मराठों ने ब्रिटिश साम्राज्य का प्रभुत्व स्वीकार कर 1817 ईस्वी में बुंदेलखंड के सारे अधिकार ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिए।

झांसी राज्य का ब्रिटिश सरकार में विलय

 झांसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु के पश्चात तत्कालीन अंग्रेजी गवर्नर जनरल ने 1857 में झांसी को पूरी तरह से अपने अधीन कर लिया। झांसी की रानी और गंगाधर राव की विधवा रानी लक्ष्मीबाई(Rani Laxmi Bai)ने जब गंगाधर राव के दत्तक पुत्र को राज्य का उत्तराधिकारी घोषित करने की मांग की तो ब्रिटिश सरकार ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया और यहीं से  प्रारंभ हुआ “भारतीय स्वतंत्रता संग्राम”। 

 

इन परिस्थितियों ने “1857 की क्रांति” को जन्म दिया। ब्रिटिश साम्राज्य से लड़ाई के दौरान झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने स्वयं सैन्य संचालन किया। 18 सो 58 ईस्वी में रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु के पश्चात झांसी को ब्रिटिश में मिला लिया गया। सन् 1886 में झांसी को ‘यूनाइटेड प्रोविंस’ में जोड़ा गया। आजादी के बाद 1956 में युनाइटेड प्रोविंस उत्तर प्रदेश बना और झांसी शहर उत्तर प्रदेश के जिलों में से एक बन गया।

झांसी के 12 प्रमुख पर्यटन स्थल

आइये जानते हैं झाँसी के मुख्य पर्यटक स्थलों के बारे में-

1. झांसी का किला (Fort of Jhansi)

Jhanshi Ka kila_About Jhansi City

1857 के विद्रोह के दौरान ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के प्रतिरोध की सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक था झांसी का किला। इसका निर्माण ओरछा के राजा वीर सिंह बुंदेला द्वारा झांसी (1606 में बलवंत नगर) शहर में बांगरा नामक एक चट्टानी पहाड़ी पर किया गया था। इस किले में 10 दरवाजे हैं।

2. बरुआ सागर किला एवं झील (Barua Sagar Fort and Lake)

ओरछा राजाओं के लिए ग्रीष्मकालीन विश्राम स्थल के रूप में बरुआसागर बनाया गया था। बरुआसागर का खूबसूरत किला कुछ ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रहा है। 1705 और 1707 ई. के बीच झांसी से 22 किलोमीटर दूर दक्षिण पूर्व में ओरछा के बुंदेला राजा उदित सिंह द्वारा बरुआसागर  नमक खूबसूरत झील बनवाया गया था। जो पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण केंद्र।

3. गंगाधर राव की छतरी(Chhatari of Gangadhar Rao)

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अपने पति की स्मृति में झांसी शहर में महालक्ष्मी मंदिर के ठीक बगल में खूबसूरत गंगा राव की छतरी का निर्माण करवाया था 

4. गणेश मंदिर (Ganesh Temple)

झांसी का प्रसिद्ध गणेश मंदिर झांसी के पुराने शहर की तंग गलियों में गणेश बाजार के अंदर स्थित है। यहीं पर 1842 में झांसी के राजा गंगाधर राव ने मणिकर्णिका तांबे नाम की लड़की से शादी की थी। जहां मराठी रीति रिवाज के अनुसार दुल्हन को “रानी लक्ष्मी बाई” का नया नाम दिया गया था। 1760 ईस्वी में निर्मित इस प्रतिष्ठित गणेश मंदिर का निर्माण किसने करवाया था यह स्पष्ट नहीं है।

5. रानी महल (Rani Mahal)

Rani Mahal Jhansi

यह महल रानी लक्ष्मीबाई का था जिसकी दीवारों और छतों को अनेक रंगों और चित्रकारियों से सजाया गया है। इस महल में नौवीं से 12वीं शताब्दी की प्राचीन मूर्तियों का विस्तृत संग्रह देखा जा सकता है। वर्तमान में इस महल को संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया गया है।

6. झांसी संग्रहालय (Jhansi Museum)

झांसी का यह संग्रहालय केवल झांसी की ऐतिहासिक धरोहर ही नहीं अपितु संपूर्ण बुंदेलखंड की झलक प्रस्तुत करता है। इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों का यह संग्रहालय मनपसंद स्थान है। संग्रहालय में हथियारों शस्त्रों और गोला बारूद को प्रदर्शित किया गया है। इन चीजों का इस्तेमाल 1857 ई के स्वतंत्रता संग्राम को दबाने के लिए ब्रिटिश सेना ने किया था।

7. जराई का मठ (Jarai Monastery)

  झांसी शहर की लगभग 18 किलोमीटर दूर झांसी खजुराहो मार्ग पर स्थित यह 9वी शताब्दी के दौरान बनाया गया एक पत्थर का मंदिर है। ऐसा माना जाता है कि इसका निर्माण प्रतिहार शासक ने करवाया था। बरुआ सागर झील के उत्तर पूर्व में दो पुराने चंदेल मंदिरों के खंडहर हैं। पास ही गुप्तकालीन मंदिर है जिसे जराई मठ के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर शिव एवं पार्वती को समर्पित है।



8. अटल एकता पार्क (Atal Ekata Park)

झांसी शहर में सिविल लाइन क्षेत्र में ‘अटल एकता पार्क’ स्थित है। यहां एक सांस्कृतिक मंच है जहां झांसी मंडल के लोक कलाकार अपनी कला और विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन करते हैं। इसमें सुंदर पार्कों से घिरा हुआ भव्य पुस्तकालय शामिल है।

9. सुकमा डुकमा बांध (Sukma Dukma Dam)

सुकमा डुकमा बांध ब्रिटिश कालीन है। यह बांध यमुना की सहायक नदी बेतवा पर बनाया गया है। इस बांध की प्रमुख विशेषता यह है कि इसके नीचे निरीक्षण सुरंग है। इस सुरंग का उपयोग आपातकालीन स्थिति में नदी पार करने के लिए किया जाता था। इस बांध का आकार और इसके चारों ओर फैली सुरम्य हरियाली मंत्रमुग्ध कर देती है।

10. पारीक्षा बांध (Pariksha Dam)

पारीक्षा शहर के पास बेतवा नदी पर पारीक्षा बांध बना है। यह झांसी कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 25 पर झांसी से लगभग 25 किलोमीटर दूर है। इसका जलाशय जलक्रीड़ाओं के लिए आदर्श है।

11. गढ़मऊ झील (Garhmau Lake)

 गढ़मऊ झील झांसी का एक सुंदर पर्यटन स्थल है। यह निचली पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इस स्थान का सुखद वातावरण गढ़मऊ झील के पिकनिक और दिन की सैर के लिए झांसी में एकमात्र आदर्श दर्शनीय स्थल है। पर्यटकों के लिए यह एक लोकप्रिय स्थान है। यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य देखने लायक होते हैं।

12. लक्ष्मी मंदिर (Laxmi Temple)

   झांसी का लक्ष्मी मंदिर झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के जीवन से गहराइयों से जुड़ा हुआ है। रानी इस मंदिर में नियमित रूप से प्रार्थना करती थी। यह झांसी के महाराजाओं का मुख्य मंदिर था। इसका निर्माण मराठा सूबेदार शिवराव भाऊ (1794- 1814) ने कराया था

झांसी के प्रमुख शिक्षा संस्थान

झांसी बुंदेलखंड का प्रमुख शिक्षा केंद्र है। यहां विद्यालय तथा अध्ययन केंद्र सरकार तथा निजी क्षेत्र द्वारा चलाए जाते हैं। झांसी के प्रमुख शिक्षण संस्थान इस प्रकार-

  • रघुराज सिंह पब्लिक स्कूल, पठोरिया, दतिया गेट
  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय विद्यापीठ, बालाजी मार्ग, झांसी
  • राजकीय इंटर कॉलेज
  • श्री गुरु नानक खालसा इंटर कॉलेज, झांसी
  • मारग्रेट लिस्क मेमोरियल इंग्लिश स्कूल एंड कॉलेज
  • रानी लक्ष्मीबाई पब्लिक स्कूल
  • ज्ञानस्थली पब्लिक स्कूल
  • लोकमान्य तिलक कन्या इंटर कॉलेज
  • हेलेन मेगडोनियल मेमोरियल कन्या इंटर कॉलेज
  • राज्य विद्युत परिषद इंटर कॉलेज
  • बिपिन बिहारी इंटर कॉलेज
  • श्री गुरु हरिकिशन डिग्री कॉलेज, झांसी
  • भानी देवी गोयल सरस्वती विद्या मंदिर, झांसी
  • लक्ष्मी व्यायाम मंदिर
  • बुंदेलखंड इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट
  • आर्य कन्या इंटर कॉलेज
  • क्राइस्ट द किंग कॉलेज
  • श्री एम एल पांडे एंग्लो वैदिक जूनियर हाई स्कूल खाती बाबा झांसी।

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