World Braille Day : जानिए कब और क्यों मनाया जाता है विश्व ब्रेल दिवस ? (Know when and why World Braille Day is celebrated?)

World Braille Day : विश्वभर में 4 जनवरी को ब्रेल दिवस मनाया जाता है। ब्रेल लिपि आज पूरे विश्व में ऐसे लोगों के लिए वरदान बन रही हैं जो नेत्रहीन हैं। यह लिपि आज पूरे विश्व में नेत्रहीनों को आत्मनिर्भर बना रही है। ब्रेल पद्धति का आविष्कार 1821 में एक फ्रांसीसी लेखक लुई ब्रेल ने किया था। 4 जनवरी को लुई का जन्म दिवस है।

World Braille Day 2023_janpanchayat Knowledge and facts

World Braille Day : विश्वभर में 4 जनवरी को ब्रेल दिवस (World Braille Day) मनाया जाता है। ब्रेल लिपि आज पूरे विश्व में ऐसे लोगों के लिए वरदान बन रही हैं जो नेत्रहीन हैं। यह लिपि आज पूरे विश्व में नेत्रहीनों को आत्मनिर्भर बना रही है। ब्रेल पद्धति का आविष्कार 1821 में एक फ्रांसीसी लेखक लुई ब्रेल ने किया था। 4 जनवरी को लुई का जन्म दिवस है।

इस पद्धति का नाम ब्रेल क्यों पड़ा? (Why was this system named Braille?)

ब्रेल पद्धति का नाम फ्रांसीसी लेखक लुई ब्रेल (louis braille) के नाम पर पड़ा। लुई ब्रेल ने नेत्रहीनों के लिए ब्रेल लिपि (Braille Lipi) का निर्माण किया था। उन्हीं की वजह से ही नेत्रहीनों को पढ़ने लिखने का अवसर प्राप्त हुआ। सन् 2009 में 4 जनवरी को लुई ब्रेल के जन्म को 200 वर्ष पूरा होने पर लुई ब्रेल (Louis Braille) जन्म द्विशती के अवसर पर हमारे देश ने उन्हें पुनर्जीवित करने का प्रयास किया। इस अवसर पर लुई ब्रेल के सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया।

क्या है ब्रेल लिपि? (What is Braille script?)

ब्रेल लिपि (Braille Lipi)एक ऐसी लिपि है, जिसको पूरे विश्व में नेत्रहीनों को पढ़ने और लिखने में छूकर व्यवहार में लाया जाता है। यह लिपि अलग-अलग अक्षरों, संख्याओं और विराम चिन्हों को दर्शाते हैं। ब्रेल 8 वर्ष की उम्र से ही दृष्टिबाधित थे जिस कारण उनके पिता ने उन्हें पेरिस के रॉयल नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ब्लाइंड चिल्ड्रन में भर्ती करवा दिया। जिस स्कूल में ब्रेल पढ़ते थे उसी स्कूल में ‘वेलेंटीन होउ’ द्वारा बनाई गई लिपि से पढ़ाई होती थी लेकिन यह लिपि अधूरी थी। फ्रांसीसी सेना के एक अधिकारी कैप्टन चार्ल्स बार्बियर एक प्रशिक्षण के लिए इस विद्यालय में आए। उन्होंने सैनिकों द्वारा अंधेरे में पढ़ी जाने वाली ‘नाइट राइटिंग’ या ‘सोनोग्राफी’ लिपि के बारे में व्याख्यान दिया। यह लिपि कागज पर अक्षरों को उभार कर बनाई जाती थी जिसमें 12 बिंदुओं को 6–6 की 2 पंक्तियों में रखा जाता था पर इसमें विराम, चिन्ह, संख्या, गणितीय चिन्ह आदि नहीं होते थे। यहीं से ब्रेल के दिमाग में यह विचार आया। उन्होंने इसी लिपि पर आधारित किंतु 12 के स्थान पर 6 बिंदुओं के उपयोग से 64 अक्षर और चिन्ह वाली लिपि का निर्माण किया। इसमें विराम चिन्ह के साथ-साथ गणितीय चिन्ह और संगीत के नोटेशन भी लिखे जा सकते थे। मात्र 15 वर्ष की आयु में ब्रेल ने इस लिपि का निर्माण किया।

कौन थे लुइ ब्रेल? (Who was Louis Braille?)

लुई ब्रेल (louis braille) का असली नाम लुइस ब्रेल था।इनका जन्म फ्रांस के छोटे से गांव कुप्रे में एक मध्यमवर्गीय परिवार में 4 जनवरी 1809 को हुआ था। इनके पिता साइमन रेले ब्रेल को पारिवारिक आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त आर्थिक संसाधन न होने के कारण अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती थी इसलिए ब्रेल के पिता ने इन्हें मात्र 3 वर्ष की आयु में अपने साथ घोड़ों के लिए काठी और जीन बनाने के कार्य में लगा दिया। बालक स्वभाव के अनुरूप पिता द्वारा कार्य में उपयोग की जाने वाली वस्तुओं जैसे कठोर लकड़ी, रस्सी, लोहे के टुकड़े, घोड़ों की नाल, चाकू और लोहे के औजारों के साथ वे खेला करते थे। खेल–खेल में ही लकड़ी काटने वाली चाकू अचानक उछलकर इस नन्हे बालक की आंख में लग गई और आंख से खून की धारा बह निकली। साधारण जड़ी लगाकर उनकी आंखों पर पट्टी लगा दी गई लेकिन 8 वर्ष की आयु पूरी होते–होते यह नन्हा बालक पूरी तरह दृष्टिहीन हो गया। इस बालक का सबकुछ गहन अंधकार में डूब गया लेकिन लुई जल्दी ही अपनी स्थिति में रम गए। बचपन से ही उनमें गजब की क्षमता थी। सीखने की उनकी जिज्ञासा को देखते हुए चर्च के पादरी ने लुई ब्रेल का पेरिस के अंधविद्यालय में दाखिला करवा दिया। लुई ब्रेल में अद्भुत प्रतिभा थी। उनके बचपन की दुर्घटना के पीछे ईश्वर की कुछ खास मनसा छुपी हुई थी। 1825 में लुइ ब्रेल ने मात्र 16 वर्ष की आयु में ब्रेल लिपि का आविष्कार कर दिया। इस लिपि के आविष्कार ने दृष्टिबाधित लोगों की शिक्षा में क्रांति ला दी।

 ब्रेल अपनी दृष्टिहीनता की वजह से अंधों के लिए एक ऐसी प्रणाली का निर्माण करना चाहते थे जिससे उन्हें लिखने पढ़ने में आसानी हो और एक दूसरे से आसानी से बात कर सके। उनके अनुसार विश्व में अंधों को भी साधारण लोगों जितना महत्व दिया जाना चाहिए। उनके जीवित रहते उनके आविष्कार का महत्व कोई नहीं जान पाया लेकिन उनकी मृत्यु के पश्चात पेरिस ही नहीं पूरे विश्व के लिए उनका यह आविष्कार सहायक सिद्ध हुआ। सन् 1851 में वह बीमार रहने लगे और 6 जनवरी, 1852 को मात्र 43 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु के 16 वर्ष पश्चात सन् 1868 में रॉयल इंस्टीट्यूट फॉर ब्लाइंड यूथ ने इस लिपि को मान्यता दी।

 लुई द्वारा किए गए कार्य किसी एक राष्ट्र के लिए न होकर संपूर्ण विश्व की दृष्टिहीन मानव जाति के लिए उपयोगी थे। भारत सरकार ने सन् 2009 में लुइ के सम्मान में डाक टिकट जारी किया है।
लुई ब्रेल की मृत्यु के 100 वर्ष पश्चात फ्रांस सरकार ने लुइ के दफनाए गए शव को पूरे राजकीय सम्मान के साथ निकलवाया। 20 जून, 1952 को पूरे फ्रांस देश ने लुई ब्रेल के पार्थिव शरीर के सामने अपनी गलती के लिए माफी मांगी। तत्पश्चात लुई ब्रेल के शरीर को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर पूरे राजकीय सम्मान के साथ दोबारा दफनाया गया।

इस दिन को मनाने की शुरुआत कब हुई?

6 नवंबर 2018 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें प्रत्येक वर्ष 4 जनवरी को लुई ब्रेल (louis braille) के जन्मदिवस को विश्व ब्रेल दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। लुई ब्रेल ब्रेल लिपि के आविष्कारक हैं।

ब्रेल दिवस मनाने का उद्देश्य (Purpose of celebrating Braille Day)

 इस दिवस को विश्व स्तर पर मनाने का उद्देश्य ब्रेल के महत्व के विषय में जागरूकता फैलाना है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य नेत्रहीन लोगों को सामान्य लोगों की तरह अधिकार और महत्व प्रदान करना है।