World Nature Conservation Day : विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस का उद्देश्य एवं महत्त्व

संपूर्ण विश्व में 28 जुलाई को विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस (World Nature Conservation Day)मनाया जाता है। मानव और प्रकृति के बीच एक अटूट रिश्ता है। प्रकृति के बिना तो मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। प्रकृति मानव जीवन के विभिन्न क्रियाकलापों को निर्धारित करती हैं या यूं कहें कि अपनी प्रत्येक आवश्यकता के लिए मानव प्रकृति पर निर्भर है। जैसे भोजन, पानी,हवा, वस्त्र,ईंधन इत्यादि। इसी प्रकार प्रकृति भी मानव के विभिन्न क्रियाकलापों से प्रभावित होती है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कई जीव- जंतु एवं वनस्पतियां विलुप्त हो रहे हैं। विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस का उद्देश्य है इन विलुप्त होते जीव- जंतु और वनस्पतियों की रक्षा का संकल्प लेना।

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विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस || World Nature Conservation Day || 28 July 2023

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस : प्रकृति को स्वच्छ रखने का संकल्प

संपूर्ण विश्व में 28 जुलाई को विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस (World Nature Conservation Day)मनाया जाता है। मानव और प्रकृति के बीच एक अटूट रिश्ता है। प्रकृति के बिना तो मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। प्रकृति मानव जीवन के विभिन्न क्रियाकलापों को निर्धारित करती हैं या यूं कहें कि अपनी प्रत्येक आवश्यकता के लिए मानव प्रकृति पर निर्भर है। जैसे भोजन, पानी,हवा, वस्त्र,ईंधन इत्यादि। इसी प्रकार प्रकृति भी मानव के विभिन्न क्रियाकलापों से प्रभावित होती है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कई जीव- जंतु एवं वनस्पतियां विलुप्त हो रहे हैं। विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस का उद्देश्य है इन विलुप्त होते जीव- जंतु और वनस्पतियों की रक्षा का संकल्प लेना।

प्रकृति क्या है (What is the Nature) ?

हम जिस हवा में सांस लेते हैं, जो भोजन ग्रहण करते हैं, जो पानी पीते हैं, अथवा जो वस्त्र पहनते हैं, यह सब हमें किसी न किसी रूप में प्रकृति से प्राप्त होता है, प्रकृति के अंतर्गत जीव, जंतु, पौधे, जानवर, वृक्ष अन्न,जल, भूवैज्ञानिक प्रक्रियाएं, मौसम और भौतिकी जैसे पदार्थ और ऊर्जा शामिल है।

प्रकृति और मानव में क्या है संबंध(What is the Relation between Human and Nature) ?

प्रकृति और मानव का वही संबंध है जो एक मां का अपने बच्चे से होता है। जिस प्रकार मां अपने बच्चे की हर इच्छा पूरी करती है मां की गोद में एक बच्चा सुख की अनुभूति करता है। उसी प्रकार प्रकृति भी हमारी प्रत्येक आवश्यकता की पूर्ति करती है। जब हम जब हम हरी भरी प्रकृति की गोद में विचरण करते हैं तो हमें भी एक सुखद अनुभूति होती है। झर- झर झरते झरने, कलकल बहती नदियां, हरा-भरा घास का मैदान, विभिन्न प्रकार के फलदार और छायादार वृक्ष इन सब के बीच हमें कितना सुकून मिलता है। यदि यह सारी चीजें ना हो तो हमारा जीवन कैसा होगा। अतः प्रकृति के बिना मानव जीवन की कल्पना करना असंभव है।

क्यों आवश्यक है प्रकृति संरक्षण(Why is Nature Conservation Compulsory) ?

मानवीय गतिविधियों द्वारा जैव विविधता का ह्रास और जलवायु परिवर्तन, प्रकृति को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। और एक निश्चित समय अवधि के बाद स्वयं मानव भी इन परिस्थितियों से गंभीर रूप से प्रभावित होगा। पर्यावरण का मानव द्वारा अंधाधुंध दोहन पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्र को निरंतर क्षति पहुंचा रहा है। आज मानव ने तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में काफी प्रगति की है, और इस तकनीक के प्रगति ने प्रकृति को बुरी तरह से प्रभावित किया है। अपने विकास की दौड़ में मानव प्रकृति को क्षति पहुंचा रहा है, बिना यह सोचे कि इसके कितने भयंकर परिणाम हो सकते हैं।
जल, जंगल और जमीन इन तत्वों के बिना प्रकृति अधूरी है। जहां यह तीनों तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, विश्व में सबसे समृद्ध देश वही है। भारत भी वन्यजीव और जंगलों के लिए प्रसिद्ध है। हमारे देश में वन्यजीवों की विभिन्न और विचित्र प्रजातियां पाई जाती हैं। इन सभी वन्यजीवों के विषय में ज्ञान प्राप्त करना आवश्यक ही नहीं मनोरंजक भी है। भूमंडल पर सृष्टि की रचना कैसे हुई? सृष्टि का विकास कैसे हुआ? और उस रचना में मनुष्य का क्या स्थान है? मानव समाज और वन्यजीवों में पारस्परिक संबंध क्या है? यदि वन्यजीव और जंगल भूमंडल पर ना रहे तो पर्यावरण पर तथा मनुष्य के आर्थिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ेगा? प्राचीन युग के अनेक विशाल जीवो का लोप क्यों हो गया? वन्यजीवों और जंगलों पर तेजी से बढ़ती आबादी की क्या प्रतिक्रिया होगी ?यह सभी प्रश्न गहन चिंतन और अध्ययन के हैं?
आज सबसे अधिक आवश्यकता है पर्यावरण के मुद्दे पर जागरूक करने की, क्योंकि प्रकृति संरक्षण दिवस केवल कागजों और आयोजनों के भीतर कैद हो गए हैं। आज मौसम बदल रहे हैं। दुनिया बदल रही हैं। आज गर्मी का प्रकोप एशिया के साथ-साथ यूरोप पहली बार झेल रहा है। इतिहास में पहली बार ब्रिटेन में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करते हुए ‘ रेड वार्निंग’ जारी करनी पड़ी है।

विश्व के मौसम और जलवायु में तीव्र गति में होते परिवर्तन के कारण पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ रहा है। ऐसे में संपूर्ण मानव जाति को पूरी गंभीरता के साथ प्रकृति के संरक्षण के बारे में सोचना आवश्यक है। कुछ प्रयासों से हम प्रकृति का संरक्षण कर सकते हैं।

प्रकृति संरक्षण के प्रयास

  • जलवायु को बेहतर बनाने की तकनीक को बढ़ावा दें
  • पहाड़ नष्ट करने का विरोध करें
  • जंगलों को ना काटे
  • जमीन में उपलब्ध पानी का उपयोग आवश्यकता पड़ने पर ही करें
  • वर्षा के पानी का संग्रह करें
  • उपयोग किए गए पानी का चक्रीकरण करें
  • ध्वनि प्रदूषण को सीमित करें
  • पानी को अनावश्यक बर्बाद ना करें
  • प्लास्टिक के स्थान पर रद्दी कागज के लिफाफे या कपड़े के थैले का इस्तेमाल करें।
  • कमरे में ना रहने पर उस कमरे का पंखा और लाइट बंद रखें
  • प्रकृति से घनात्मक संबंध रखने वाली तकनीकों का उपयोग करें। जैसे – जैविक खाद का प्रयोग
    डिब्बाबंद पदार्थों का कम इस्तेमाल।

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस का उद्देश्य (Objective of World Nature Conservation Day)

28 जुलाई को विश्व भर में प्रकृति संरक्षण दिवस मनाया जाता है। जो एक महत्वपूर्ण दिन है यह दिन हमारे जीवन में प्रकृति के महत्व की याद दिलाता है और प्रकृति संरक्षण के लिए प्रोत्साहित करता है। विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस (World Nature Conservation Day)का उद्देश्य है, प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाना। तकनीकी विकास और आधुनिक जीवन शैली की वजह से पर्यावरण में उत्पन्न हुए असंतुलन को दूर करना भी इस दिन का मुख्य उद्देश्य है। इसके अतिरिक्त प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले कारकों जैसे प्रदूषण, जीवाश्म ईंधन का जलना जनसंख्या दबाव, मिट्टी का क्षरण और वनों की कटाई आदि को लेकर लोगों को आगाह करना और प्राकृतिक संसाधनों जैसे जलवायु, खनिज, मिट्टी, वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करना इस दिन का महत्वपूर्ण उद्देश्य है

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस का महत्व(Significance of World Nature Conservation Day)

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस मनुष्य और पृथ्वी पर उनके अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है। यह सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रकृति को संरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह दिन हमें प्रकृति के दोहन के प्रति जागरूक करता है।

पृथ्वी सम्मेलन

प्रकृति संरक्षण का समस्त प्राणियों के जीवन तथा इस धरती के समस्त प्राकृतिक परिवेश से घनिष्ठ संबंध है। पूरी पृथ्वी प्रदूषण के कारण दूषित हो रही है, जिसके परिणाम स्वरूप मानव सभ्यता का अंत दूर नहीं है। इस स्थिति को ध्यान में रखकर 1992 में ब्राजील में विश्व के 174 देशों का पृथ्वी सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसके पश्चात 2002 में जोहांसबर्ग में पृथ्वी सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में विश्व के सभी देशों को प्रकृति संरक्षण के लिए अनेक उपाय सुझाए गए। क्योंकि धरती पर जीवन का संरक्षण तभी संभव है जब प्रकृति का संरक्षण होगा और यदि प्रकृति का संरक्षण नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब मंगल आदि ग्रहों की तरह पृथ्वी का जीवन चक्र समाप्त हो जाएगा।
पृथ्वी को जीवंत बनाए रखने के लिए मनुष्य के साथ-साथ पशु, पक्षियों, पेड़, पौधों का रहना भी आवश्यक है।आज के आधुनिक परिवेश में कई जीव जंतुओं और पौधों की विभिन्न प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर है। अतः पारिस्थितिक तंत्र के प्राकृतिक वैभव की रक्षा करना हम मानव का प्रमुख कर्तव्य है।
पृथ्वी पर जीवन के लिए पानी, हवा, मिट्टी, खनिज तेल, जानवर,भोजन आदि हमारी मूलभूत आवश्यकताएं हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि हम अपनी प्रकृति को स्वस्थ और स्वच्छ रखें। प्रकृति के इन्हीं संसाधनों और उस के संरक्षण के संदर्भ में जागरूकता पैदा करने के लिएप्रत्येक वर्ष 28 जुलाई को विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस(World Nature Conservation Day)मनाया जाता है।

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस 2023 की थीम(Theme of World Nature Conservation Day 2023)

विश्व प्रकृति दिवस संरक्षण दिवस 2023 की थीम है-
“वन और आजीविका: लोगों और ग्रह को कायम रखना।”
(Forest and Livelihood: Sustaining People and Planet).