कन्हैया कुमार और मनोज तिवारी की उम्मीदवारी ने दिल्ली की उत्तर पूर्वी लोकसभा सीट को बनाया हॉट सीट: Lok Sabha Election 2024

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Delhi, Lok Sabha Election 2024: 2024 के लोकसभा चुनाव नजदीक हैं। आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तर पूर्वी सीट पर काफी रोचक मुकाबला होने वाला है। कांग्रेस ने उत्तर पूर्वी सीट से कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) को अपना उम्मीदवार बनाया है। कन्हैया कुमार भाजपा के इस सीट से दो बार सांसद रहे मनोज तिवारी (Manoj Tiwari) को टक्कर देंगे। केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में लोकसभा की सात सीटें हैं।

भारतीय जनता पार्टी में उत्तर पूर्वी दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी पर ही भरोसा जताया है। मनोज तिवारी दिल्ली के इकलौती ऐसे भाजपा सांसद है जो तीसरी बार दिल्ली में अपना टिकट बचाने में कामयाब हो गए हैं। भाजपा ने दिल्ली के अपने छः सांसदों का टिकट इस लोकसभा में काटकर नए उम्मीदवार उतारे हैं, लेकिन केवल मनोज तिवारी ऐसे नेता है जिनको भाजपा ने तीसरी बार उम्मीदवार बनाया है।

भाजपा ने क्यों जताया मनोज तिवारी पर भरोसा ?

पार्टी ने दिल्ली की सभी लोकसभा सीटों के 6 सांसदों का टिकट काटकर केवल मनोज तिवारी (Manoj Tiwari) को ही टिकट दिया है। भाजपा ने दोबारा के सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी पर लगातार तीसरी बार भरोसा जताया है तो इसके पीछे उनका पूर्वांचली होना भी बड़ी वजह है। माना जा रहा है कि कांग्रेस ने भी एक पूर्वांचली के सामने एक पूर्वांचली को टिकट दिया है। ऐसा माना जाता है कि मनोज तिवारी की इस सीट पर मजबूत पकड़ है क्योंकि इस क्षेत्र में यूपी, बिहार के लोगों की संख्या अधिक है।

कांग्रेस ने मनोज तिवारी के खिलाफ क्यों बनाया कन्हैया कुमार को उम्मीदवार ?

कांग्रेस ने कन्हैया कुमार(Kanhaiya Kumar) को मनोज तिवारी के खिलाफ टिकट दिया है तो इसकी खास वजह है, क्योंकि कन्हैया कुमार भी बिहार से आते हैं और मनोज तिवारी भी बिहार के कैमूर जिले के निवासी हैं। दिल्ली के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में यूपी, बिहार, हरियाणा, राजस्थान से आकर मेहनत मजदूरी करके जीवन यापन करने वाले मजदूरों की संख्या अधिक है। कांग्रेस की रणनीति कन्हैया के चेहरे से इस मतदाता वर्ग को साधने की है। जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष को कांग्रेस ने अपने गणित के आधार पर इस सीट से टिकट दिया है। कांग्रेस की रणनीति कन्हैया कुमार के सहारे मनोज तिवारी के पूर्वांचली वोट बैंक में सेंध लगाने के साथ ही दलित, पिछड़ा, अल्पसंख्यक और मजदूर वर्ग को साथ लाकर वोटो का नया समीकरण गढ़ने की भी है।

मनोज तिवारी को टक्कर देने वाले कौन है कन्हैया कुमार ?

कन्हैया कुमार के दिल्ली के उत्तर पूर्वी क्षेत्र के चुनाव मैदान में उतरने से दिल्ली की उत्तर पूर्वी लोकसभा सीट पर मुकाबला रोचक हो गया है। कन्हैया कुमार जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रहे हैं। कन्हैया कुमार ने इससे पहले 2019 में सीपीआई के टिकट पर मोदी सरकार के फायर ब्रांड मंत्री गिरिराज सिंह के खिलाफ बेगूसराय से चुनाव लड़ा था लेकिन वे चुनाव हार गए थे। फिर वे कांग्रेस में शामिल हो गए। कन्हैया कुमार एक अच्छे वक्ता हैं। वह अपने विरोधियों से तीखी और तार्किक बहस के लिए जाने जाते हैं। वह अपनी बातों को तथ्यों के साथ रखने में माहिर हैं। कन्हैया कुमार युवाओं से जुड़े मुद्दे लगातार उठाते रहे हैं। उनके भाषणों में गरीब, मजदूर, शोषितों, वंचितों और दलितों की बात अधिक रहती है।

कांग्रेस को कन्हैया कुमार के सहारे जीत की आस

कांग्रेस को आम आदमी पार्टी के समर्थन से एक मुस्त दलित, मुस्लिम, ओबीसी वोट की आस है। कांग्रेस को लगता है कि यदि थोड़े बहुत पूर्वांचल मतदाताओं का साथ मिल जाए तो यह बहुत काम करेगा और जीत की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।

मनोज तिवारी को भोजपुरी मतदाताओं का मिल सकता है फायदा

भाजपा को भरोसा है कि पूर्वाचल और दलित पिछड़े मतदाताओं के समर्थन से मनोज तिवारी जीत की हैट्रिक लगाने में कामयाब होंगे। दो पूर्वांचलियों की लड़ाई में दलित, ओबीसी के साथ ही श्रवण मतदाताओं का रोल अहम हो गया है। ऐसा माना जा रहा है कि स्थानीय वोट अस्मिता के आधार पर बांट सकता है। मनोज तिवारी भोजपुरी बेल्ट से आते हैं वहीं कन्हैया कुमार जिस बेगूसराय से आते हैं वहां अंगिका और मगही भाषा बोली जाती है। उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट में भोजपुरी मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है जो मनोज तिवारी के पक्ष में जा सकती है।

क्या है मतदाता समीकरण ?

दिल्ली की उत्तर पूर्वी लोकसभा सीट सांप्रदायिक लिहाज से बेहद संवेदनशील जानी जाती है। इस लोकसभा क्षेत्र की कुल आबादी में मुस्लिम समाज के लोगों की भागीदारी 21 फ़ीसदी है। इस सीट के समीकरणों की बात करें तो यूपी और बिहार से नाता रखने वाले मतदाताओं की तादाद करीब 28 फ़ीसदी है। इलाके में अनुसूचित जाति की आबादी 16.3 फ़ीसदी, मुस्लिम 20.74 फ़ीसदी, ब्राह्मण 11.61 फ़ीसदी, वैश्य 4.68 फ़ीसदी, पंजाबी 4 फ़ीसदी, गुर्जर 7.57 फ़ीसदी और ओबीसी की आबादी 21.75 फीसदी है।