June 25, 2024

International Press Freedom Day : अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने की शुरुआत कब और कैसे हुई ?

अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस || International Press Freedom Day || 3 May
प्रेस किसी भी समाज का दर्पण होता है। अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस 3 मई को मनाया जाता है। एक देश में अभिव्यक्ति की कितनी स्वतंत्रता है यह उस देश की प्रेस की स्वतंत्रता से सिद्ध हो जाता है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है।
वर्ष 1991 में यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र के जन सूचना विभाग ने मिलकर अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय लिया था। यूनेस्को के आम सम्मेलन की घोषणा के बाद दिसंबर 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया था।

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अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस || International Press Freedom Day || 3 May

अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस(International Press Freedom Day) || 3 May

 प्रेस किसी भी समाज का दर्पण होता है। अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस (International Press Freedom Day) 3 मई को मनाया जाता है। एक देश में अभिव्यक्ति की कितनी स्वतंत्रता है यह उस देश की प्रेस की स्वतंत्रता (freedom of press) से सिद्ध हो जाता है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। जहां प्रेस की स्वतंत्रता एक मौलिक आवश्यकता है।आज का इंसान इतना व्यस्त हो गया है कि दुनिया से बाहर निकाल कर आसपास घटित होने वाली घटनाओं के बारे में जानने का हमारे पास अधिक समय नहीं होता है। प्रेस और मीडिया इस व्यस्तता भरे जीवन में हमारे लिए खबर पहुंचाने का सबसे उत्तम माध्यम हैं। प्रेस और मीडिया द्वारा दी गई सूचनए और समाचार हमें दुनिया से जोड़े रखते हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने की शुरुआत कब हुई ?

वर्ष 1991 में यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र के जन सूचना विभाग ने मिलकर अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस (International Press Freedom Day) मनाने का निर्णय लिया था। यूनेस्को के आम सम्मेलन की घोषणा के बाद दिसंबर 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया था। इस से पूर्व नामीबिया के विंडहॉक में हुए एक सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया था कि प्रेस की आजादी को मुख्य रूप से बहुवाद और जनसंचार की आजादी की जरूरत के रूप में देखा जाना चाहिए। तब से प्रत्येक वर्ष 3 मई को अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

क्या है प्रेस की स्वतंत्रता ?

यूनेस्को महासम्मेलन के 26 में सत्र में 1993 में अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता संबंधी प्रस्ताव को स्वीकार किया गया था। प्रेस की आजादी का अर्थ है शासन की तरफ से इसमें कोई दखलंदाजी न हो। लेकिन संवैधानिक तौर पर और अन्य प्रावधानों के माध्यम से प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा भी आवश्यक है। प्रेस या मीडिया की आजादी का अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी राय जाहिर करने का अधिकार है, बिना किसी हस्तक्षेप के अपने विचार व्यक्त करने तथा मीडिया के माध्यम से चाहे वह देश की सीमाओं से बाहर का मीडिया हो, सूचना और विचार प्राप्त करने और सूचना देने की आजादी प्रेस की आजादी के अंतर्गत आती है लेकिन मीडिया की आजादी अभी बहुत कमजोर है।

यह सभी की पहुंच से बाहर है। दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जिनकी पहुंच बुनियादी संचार प्रौद्योगिकी तक नहीं है। खबरों और रिपोर्टिंग का सिलसिला जैसे-जैसे इंटरनेट पर बढ़ रहा है। पत्रकारों और ब्लॉग लेखकों को परेशान किया जा रहा है और उन पर हमले किये जा रहे हैं।

भारत में क्या है प्रेस की स्थिति ?

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जातिवाद संप्रदायवाद जैसे संकुचित विचारों के के खिलाफ संघर्ष करने और गरीबी तथा अन्य सामाजिक विषमताओं के विरुद्ध लोगों की मदद करने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी मीडिया पर है। भारत में एक बहुत बड़ा वर्ग पिछड़ा है जिसे बहुत सी चीजों की जानकारी नहीं है। अतः उन लोगों तक आधुनिक विचार पहचानने और उनके पिछड़ापन को दूर करने की जिम्मेदारी भी मीडिया की है, जिससे पिछड़े व अनभिज्ञ लोग सजग भारत का हिस्सा बन सके।

भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लेख भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1ए) में है। हालांकि उसमें प्रेस शब्द का उल्लेख नहीं है, किंतु उप- खंड (2) के अंतर्गत इस अधिकार पर पाबंदियां भी लगाई गई हैं। संविधान के तहत भारत की प्रभुसत्ता और अखंडता, राष्ट्र की सुरक्षा, विदेश के साथ मैत्री संबंधों, शालीनता और नैतिकता के संरक्षण, न्यायालय की अवमानना, सर्वजनिक व्यवस्था, बदनामी या अपराध के लिए उकसाने जैसे मामलों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पाबंदियां लगाई जा सकती हैं।

भारतीय संसद द्वारा वर्ष 2005 में “सूचना का अधिकार कानून” पास किया गया था। इस कानून में सरकारी सूचना के लिए नागरिक के अनुरोध का निश्चित समय के अंदर जवाब देना बहुत आवश्यक है। संसद में 15 जून 2005 को ‘ सूचना का अधिकार कानून’ पास किया गया था जो 13 अक्टूबर 2005 से पूरी तरह लागू हो गया। ‘ सूचना का अधिकार कानून’ प्रत्येक नागरिक को सरकार से सवाल पूछने या सूचना हासिल करने, किसी सरकारी दस्तावेज की प्रति मांगने, सरकारी दस्तावेज का निरीक्षण करने और सरकारी कार्य में प्रयोग सामग्री के नमूने लेने का अधिकार प्रदान करता है।

समाज का दर्पण है प्रेस

प्रेस समाज का दर्पण होता है लेकिन प्रेस समाज को और जनता को गुमराह भी कर सकता है। इसीलिए प्रत्येक देश में प्रेस पर नियंत्रण रखने के लिए कुछ नियम और संगठन होते हैं। यह संगठन और नियम प्रेस को एक दायरे में रहकर काम करने की याद दिलाते रहते हैं। प्रेस की स्वतंत्रता छीनने का अर्थ है देश की स्वतंत्रता छीनना।

चीन, जापान, जर्मनी, पाकिस्तान जैसे देशों में प्रेस पर सरकार का सीधा नियंत्रण है। इस दृष्टि से भारत की स्थिति ज्यादा बेहतर है। भारत में प्रेस और मीडिया स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं। प्रेस अपने लेख और सूचनाओं के माध्यम से समाज में व्याप्त बुराइयों को उजागर करता है। आज घर बैठे हम देश विदेश के समाचार देख सकते हैं या पढ़ सकते हैं तो यह प्रेस की ही देन है जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने में प्रेस बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।

क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस ?

‘ अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ (International Press Freedom Day) स्वतंत्रता का मूल्यांकन, प्रेस की स्वतंत्रता पर बाहरी तत्वों के हमले से बचाव एवं प्रेस की सेवा करते हुए दिवंगत संवाददाताओं को श्रद्धांजलि देने का दिन है। देश की मीडिया को इस दिन एकजुट होकर इस दिन की सार्थकता सिद्ध करनी चाहिए और यह तभी संभव है जब मीडिया अपना दायित्व सही तरीके से निभाएं।

कहते हैं कि एक कलम में वह ताकत होती है जो बड़ी-बड़ी तोप तलवार या गोली में नहीं होती। प्रेस का काम बहुत ही मुश्किल और चुनौती पूर्ण होता है। किसी भी घटना की सत्यता को उजागर करने में प्रेस का बहुत बड़ा योगदान होता है। वह चाहे घोटाले से जुड़ा सत्य हो या किसी का असली चेहरा जनता के सामने लाना हो या फिर सरकार के कार्यों का मूल्यांकन हो सब में प्रेस की अहम भूमिका होती है। पलक झपकते ही हम देश दुनिया की खबरें हम तक पहुंच जाती हैं तो इसमें प्रेस का बहुत बड़ा योगदान है।

क्या होता है प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ?

अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस (International Press Freedom Day) प्रेस के महत्व को रेखांकित करने के लिए 3 मई को मनाया जाता है। इस अवसर पर ‘ गिलेरमो कानों वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम पुरस्कार’ भी दिया जाता है। जिस व्यक्ति या संस्थान ने प्रेस की स्वतंत्रता के लिए उल्लेखनीय कार्य किया है। उस व्यक्ति या संस्थान को यह पुरस्कार दिया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस 2023 की थीम

‘ अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ (International Press Freedom Day) की थीम यूनेस्को द्वारा निर्धारित की जाती है। वर्ष 2023 के लिए यूनेस्को द्वारा निर्धारित की गई थीम है-

“शेपिंग अ फ्यूचर ऑफ राइट्स: फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन एज अ ड्राइवर फॉर अदर ऑल हुमन राइट्स।(Shaping a Future of Rights:Freedom of Expression as a Driver for all other Human Rights.)”