World Intellectual Property Day : कब और क्यों मनाया जाता है विश्व बौद्धिक संपदा दिवस ?

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विश्व बौद्धिक संपदा दिवस प्रत्येक वर्ष विश्व बौद्धिक संपदा संगठन(WIPO) के तत्वावधान में इसके स्थापना दिवस के अवसर पर 26 अप्रैल को मनाया जाता है। विश्व बौद्धिक संपदा संपदा दिवस मनाने का उद्देश्यबौद्धिक संपदा के अधिकारों (पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, इंडस्ट्रियल, डिजाइन आदि) के प्रति जागरूकता फैलाना है।

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कब और क्यों मनाया जाता है विश्व बौद्धिक संपदा दिवस ?

विश्व बौद्धिक संपदा दिवस प्रत्येक वर्ष विश्व बौद्धिक संपदा संगठन(WIPO) के तत्वावधान में इसके स्थापना दिवस के अवसर पर 26 अप्रैल को मनाया जाता है। विश्व बौद्धिक संपदा संपदा दिवस (World Intellectual Property Day) मनाने का उद्देश्यबौद्धिक संपदा के अधिकारों (पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, इंडस्ट्रियल, डिजाइन आदि) के प्रति जागरूकता फैलाना है।

विश्व बौद्धिक संपदा दिवस का इतिहास (History of World Intellectual Day)

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन ‘ कन्वेंशन’ 26 अप्रैल 1970 को लागू हुआ था। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) का गठन वैश्विक स्तर पर रचनात्मक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और बौद्धिक संपदा संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।WIPO का मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है। भारत WIPO का सदस्य 1975 में बना था। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) के सदस्य राज्यों ने 2000 में 26 अप्रैल को विश्व बौद्धिक संपदा दिवस के लिए नामित किया था क्योंकि इसी दिन WIPO कन्वेंशन 1970 में लागू हुआ था। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) द्वारा इस दिन की शुरुआत 2000 में बौद्धिक संपदा के संबंध में आम जनमानस के बीच समझ विकसित करने के उद्देश्य की गई थी।

क्या है विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (What is World Intellectual Property Organisation) ?

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है। यह संगठन एक संतुलित एवं स्वीकार्य अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा प्रणाली विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह नवाचार को प्रोत्साहित करती है। रचनात्मकता को पुरस्कृत करती है तथा सार्वजनिक हित की रक्षा करती है एवं आर्थिक विकास में योगदान देती है

क्या है बौद्धिक संपदा (What is Intellectual Property)?

बौद्धिक संपदा से अभिप्राय है- नैतिक और वाणिज्यिक रूप से मूल्यवान बौद्धिक सृजन। किसी व्यक्ति अथवा संस्था द्वारा जो भी रचना,साहित्य कृति, संगीत, शोध कला अथवा डिजाइन आदि सृजित किए जाते हैं वह उस व्यक्ति अथवा संस्था की बौद्धिक संपदा कहलाती है।

क्या है बौद्धिक संपदा अधिकार (What is Intellectual Property Rights) ?

किसी भी व्यक्ति अथवा संस्था की साहित्यिक कृति, रचना, कला खोज आदि जो उसकी बौद्धिक संपदा कहलाती है इन बौद्धिक संपदाओं पर उस व्यक्ति या अथवा संस्था को जो अधिकार प्राप्त होता है उसे बौद्धिक संपदा अधिकार कहा जाता है। मानसिक रचनाएं एवं कलात्मक और वाणिज्यिक दोनों के संदर्भ में बौद्धिक संपदा अधिकार विशेष अधिकारों के समूह हैं।
पहला अधिकार कॉपीराइट का है जो व्यक्ति अथवा संस्था के रचनात्मक कार्यों जैसे फिल्में, संगीत, पुस्तक, छायाचित्र, पेंटिंग और सॉफ्टवेयर को संरक्षित करता है। इस अधिकार के अंतर्गत कॉपीराइट अधिकार जिनके पास है उनको एक निश्चित समय के लिए पुनः उत्पादन अथवा उसके रूपांतरण पर नियंत्रण का विशेष अधिकार होता है।

दूसरी श्रेणी के अधिकार का प्रयोग विशेष रूप से औद्योगिक या वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए किया जाता है। एक नए उपयोगी और अस्पष्ट आविष्कार के लिए पेटेंट दिया जा सकता है। दूसरों को आविष्कारक द्वारा लाइसेंस न दिया जाए तब तक या एक निश्चित अवधि के लिए आविष्कार के अभ्यास से रोकने का अधिकार पेटेंट धारक को प्रदान किया जाता है।

यदि कोई व्यक्ति किसी प्रकार का बौद्धिक सृजन जैसे साहित्यिक रचना,अविष्कार, शोध आदि करता है तो इस पर उस व्यक्ति का एकाधिकार होना चाहिए लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उस सृजन पर केवल उसके सृजन करता का सदैव के लिए अधिकार हो जाएगा। बौद्धिक संपदा अधिकार एक निश्चित समय अवधि और एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र के तहत दिए जाते हैं। बौद्धिक संपदा अधिकार दिए जाने का उद्देश्य है मानवीय बौद्धिक सृजनशीलता को प्रोत्साहन देना।

वर्तमान की वैश्विक परिदृश्य में किसी भी देश के लिए अपने आविष्कारको एवं रचनाकारों को सांविधक अधिकार प्रदान करके देश की बौद्धिक संपत्ति की सुरक्षा करना आवश्यक हो गया है। इसे अपने प्रयासों का वैश्विक बाजार में उचित आर्थिक मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलती है। विश्व व्यापार संगठन की ‘ बौद्धिक संपत्ति प्रणाली’ के अंतर्गत नवीन और सृजनात्मक क्षमता को सुरक्षित रखा जा सकता है।

भारत में बौद्धिक संपदा अधिकार प्रणाली

भारत ने विश्व व्यापार संगठन के अनुरूप एक ‘ बौद्धिक संपत्ति अधिकार प्रणाली’ स्थापित की है। भारत में यह प्रणाली सांविधिक, प्रशासनिक अथवा न्यायिक प्रत्येक स्तर पर स्थापित है। बौद्धिक संपदा अधिकार व्यक्ति या संस्था को उनके आविष्कार एवं रचना पर एक निश्चित अवधि के लिए विशेषाधिकार प्रदान करते हैं। पेटेंट, कॉपीराइट, अथवा ट्रेडमार्क आदि के रूप इन विशेषाधिकारों का कानून संरक्षण करता है।

अमेरिकी वाणिज्यिक संगठन ‘ यूएस चैंबर ऑफ़ कॉमर्स’ द्वारा वर्ष 2007 में स्थापित ‘ ग्लोबल इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी सेंटर'(ग्लोबल Intellectual Property Center) ने वर्ष 2013 में अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार सूचकांक प्रत्येक वर्ष जारी किया है। अमेरिका और अन्य प्रमुख देशों में बौद्धिक संपदा अधिकारों का संरक्षण तथा इसके मानदंडों का बचाव व संवर्धन करना इसका मुख्य उद्देश्य है।

‘ महानियंत्रण, पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क’ के कार्यालय का गठन वाणिज्य आयोग मंत्रालय ने औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग के अधीन किया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के शिक्षा विभाग में एक कॉपीराइट कार्यालय की स्थापना की गई है जो कॉपीराइट्स और इससे संबंधित अधिकारों के पंजीकरण सहित सभी प्रकार की सुविधा मुहैया कराता है।

कैसे मनाया जाता है बौद्धिक संपदा दिवस ?

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (World Intellectual Property Organization) प्रत्येक वर्ष विश्व बौद्धिक संपदा को बढ़ावा देने के लिए गतिविधियों का आयोजन करता है और इन्हें आयोजित करने के लिए सरकारी, गैर- सरकारी संगठनों सामुदायिक समूह और व्यक्तियों की कई एजेंसियों के साथ मिलकर कार्य करता है।

विश्व बौद्धिक संपदा दिवस की थीम पर युवाओं के लिए निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है।
विश्व बौद्धिक संपदा दिवस पर नवाचार और बौद्धिक संपदा के बीच की कड़ी को समझने के लिए संग्रहालय, स्कूलों और शिक्षण संस्थानों एवं कला दीर्घा गांव में विभिन्न प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता है।इस दिवस के लाभों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए विश्वविद्यालय में सेमिनार या मुफ्त व्याख्यान दिए जाते हैं।

विश्व बौद्धिक संपदा दिवस 2023 की थीम (Theme of World Intellectual Property Day 2023)

विश्व बौद्धिक संपदा दिवस 2023 की थीम है-
“महिला और आईपी : त्वरित नवाचार और रचनात्मकता”
(Women and IP : Accelerating Innovation and Creativity)