WORLD DAY OF SOCIAL JUSTICE 2023 : विश्व सामाजिक न्याय दिवस दिवस मनाने की पहल कब हुई ?

WORLD DAY OF SOCIAL JUSTICE 2023 : विश्व सामाजिक न्याय दिवस विश्व भर में मनाए जाने वाले महत्वपूर्ण दिवसों में से एक है। संपूर्ण विश्व में 20 फरवरी को विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाया जाता है ।यह दिवस बेरोजगारी, गरीबी तथा बहिष्कार जैसे विभिन्न सामाजिक मुद्दों से निपटने के प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। इस दिन संयुक्त राष्ट्र एवं अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा लोगों से सामाजिक न्याय हेतु अपील की जाती है। सामाजिक न्याय देशों के बीच समृद्ध एवं शांतिपूर्ण सह अस्तित्व के लिए एक अंतर्निहित सिद्धांत है।

विश्व सामाजिक न्याय दिवस (20 फरवरी)(World day of Social Justice)

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विश्व सामाजिक न्याय दिवस || 20 February 2023 || World day of Social Justice 2023 || World of Social Justice Day

World day of Social Justice 2023 : विश्व सामाजिक न्याय दिवस विश्व भर में मनाए जाने वाले महत्वपूर्ण दिवसों में से एक है। संपूर्ण विश्व में 20 फरवरी को विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाया जाता है ।यह दिवस बेरोजगारी, गरीबी तथा बहिष्कार जैसे विभिन्न सामाजिक मुद्दों से निपटने के प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। इस दिन संयुक्त राष्ट्र एवं अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा लोगों से सामाजिक न्याय हेतु अपील की जाती है। सामाजिक न्याय देशों के बीच समृद्ध एवं शांतिपूर्ण सह अस्तित्व के लिए एक अंतर्निहित सिद्धांत है।

सामाजिक न्याय क्या है और इसको बनाने की पहल कब हुई आइए जानते हैं-

क्या है सामाजिक न्याय ?

 समाज में हर वर्ग का अलग महत्व है। समाज की संरचना कई बार इस प्रकार होती है कि समाज में आर्थिक स्तर पर भेदभाव हो ही जाता है, लेकिन इस भेदभाव का सामाजिक न्याय पर असर नहीं पड़ना चाहिए। समाज में जब किसी स्तर पर असमानता या भेदभाव फैलता है तो सामाजिक न्याय की मांग तेज हो जाती हैं। सामाजिक न्याय का अर्थ है समाज के प्रत्येक वर्ग को एक सम्मान विकास और विकास के अवसर उपलब्ध कराना। समाज का कोई भी व्यक्ति वर्ग वर्ण या जाति की वजह से विकास की दौड़ में पीछे ना रह जाए, सामाजिक न्याय इसको सुनिश्चित करता है। सामाजिक न्याय तभी संभव है जब समाज को प्रत्येक स्तर के भेदभाव से मुक्त किया जाए। सामाजिक न्याय पर कार्य और उस पर विचार तो बहुत पहले ही प्रारंभ हो गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश आज भी विश्व के कई देशों में लोगों के लिए सामाजिक न्याय एक सपने की भांति है।

विश्व सामाजिक न्याय दिवस दिवस मनाने की पहल कब हुई ?

 विश्व सामाजिक न्याय दिवस की स्थापना ‘ संयुक्त राष्ट्र महासभा’ द्वारा 2007 में की गई। इसके अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय सामाजिक न्याय विकास सम्मेलन आयोजित कराने तथा 24वें महासभा सत्र का आह्वान करने की घोषणा की गई। इस अवसर पर प्रत्येक वर्ष, 20 फरवरी, को विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाने की घोषणा की गई। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने कहा “इस दिवस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गरीबी उन्मूलन के लिए कार्य करना चाहिए। सभी स्थानों पर लोगों के लिए सभ्य काम एवं रोजगार की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए तभी सामाजिक न्याय संभव है।”
कई बार समाज में फैली विषमताओं और भेदभाव के कारण परिस्थितियां इतनी खराब हो जाती है कि मानवाधिकारों का हनन होने लगता है। विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाने का निर्णय इसी तथ्य को ध्यान में रखकर लिया गया। सन 2009 से पूरे विश्व में सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों के माध्यम से यह दिन मनाया जाता है। विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाने की शुरुआत, रोटी, कपड़ा, मकान, चिकित्सा, गरीबी, अशिक्षा, सुरक्षा, बेरोजगारी और बहिष्कार जैसे मुद्दों का हल निकालने के लिए की गई।
अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार विश्व में 3 करोड़ से अधिक बच्चे युद्ध या अन्य कारणों से उत्पन्न संकटों के कारण शिक्षा नहीं ग्रहण कर पाते हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार मध्य अफ्रीकी गणराज्य में लगभग एक तिहाई स्कूलों के छात्रों को गोली मार दी गई या आग लगाई गई अथवा लूट या सशस्त्र समूहों द्वारा कब्जा कर लिया गया। हाल के कुछ वर्षों में अमेरिका में भी इस तरह की घटनाएं होती रही हैं यूनिसेफ के वैश्विक शिक्षा कार्यक्रम के प्रमुख जोसाफिन बॉर्न ने कहा-
“आपात स्थिति के माध्यम से रहने वाले बच्चों के लिए शिक्षा एक जीवन रेखा है।”

अभिभावकों की बालिकाओं के प्रति गलत धारणा

 सामाजिक रूप से एकीकृत समाज बनाने के लिए गरीबी, लिंग और शारीरिक भेदभाव, अशिक्षा, धार्मिक भेदभाव को खत्म करना अनिवार्य है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र संघ ने बालिकाओं के बारे में चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक वर्ष जन्म लेने वाली 12 मिलियन लड़कियों में से एक मिलियन अपना जन्मदिन नहीं देख पाती। 4 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं की मृत्यु दर बालकों से अधिक है। 4 वर्षों से कम आयु की बालिकाओं में 4 में से एक के साथ दुर्व्यवहार होता है। प्रत्येक 6ठी बालिका की मृत्यु लिंग भेद के कारण होती है। पांच से 9 वर्षों की 53% बालिकाएं अनपढ़ हैं। इन सब के पीछे अभिभावकों की गलत धारणा है कि लड़कों से ही वंश आगे बढ़ता है। इस प्रकार भारत में लिंग भेद से सामाजिक न्याय में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद सामाजिक न्याय का सबसे बड़ा शत्रु

 11 सितंबर 2011 को हुए न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकवादी हमले के पश्चात अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद आज मानव सभ्यता का सबसे बड़ा शत्रु बन गया है। अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पूरे विश्व में फैली अराजकता और विषमता का ही दुष्परिणाम है। हिंसात्मक और विध्वंसक गतिविधियों द्वारा अपनी परेशानियों और दुखों का काल्पनिक समाधान खोजते हैं और इन सब के लिए व्यवस्था को दोषी ठहराते हैं। मानव एक सामाजिक प्राणी है और जब एक मानव दूसरे मानव से जाति, रंग, धर्म, भाषा, प्रदेश, राष्ट्र, लिंग आदि के कारण नफरत करता है तो मनुष्य की मुख्य विशेषता को चुनौती मिलती है। इस भेदभाव से जब हमारी न्याय व्यवस्था पर प्रभाव पड़ता है तब हमें समाज में फैले इस भेदभाव का दुष्परिणाम दिखता है।

भारत में सामाजिक न्याय का प्रयास

भारत में हमारे संविधान की प्रस्तावना और अनेकों प्रावधानों के द्वारा सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करने की बात कही गई है। भारत में फैली जाति प्रथा और इसकी वजह से होने वाला स्वार्थपूर्ण भेदभाव सामाजिक न्याय में अवरोधक सिद्ध होता है। भारतीय समाज में आम इंसान भेदभाव से पीड़ित ना हो, इसके लिए भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास आयोग जैसी कई सरकारी तंत्र एवं लाखों स्वयंसेवी संगठन प्रयत्नशील रहते हैं। भारत में आज भी कई लोगों को अपनी मूल जरूरतों के न्याय प्रक्रिया की जानकारी नहीं है, जिससे उनके मानवाधिकारों का हनन होता है और वे अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। अशिक्षा गरीबी बेरोजगारी महंगाई और आर्थिक असमानता आज भी भारत में अधिक है, जिससे सामाजिक न्याय अत्यंत विचारणीय विषय हो गया है।

विश्व सामाजिक न्याय दिवस का लक्ष्य (The goal of World Social Justice Day)

 सिटी मांटेसरी स्कूल जो यूनेस्को की ‘ शांति शिक्षा पुरस्कार’ एवं  ‘ गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में नामित है तथा जिसमें लगभग 50,000 से अधिक छात्र हैं, का लक्ष्य सामाजिक न्याय के तहत विश्व के 2 अरब से अधिक बच्चों को सुरक्षित भविष्य का अधिकार दिलाना है। यह कार्य संपूर्ण विश्व में एकता और शांति स्थापना से ही संभव है।

     वर्तमान परिस्थितियों में संयुक्त राष्ट्र संघ को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। विश्व में शांति व एकता की स्थापना तभी संभव हो सकेगी जब संयुक्त राष्ट्र संघ अंतरराष्ट्रीय विवादों का निपटारा करने, आतंकवाद को रोकने, युद्ध को रोकने, नाभिकीय हथियारों की समाप्ति एवं पर्यावरण संरक्षण आदि तमाम वैश्विक समस्याओं को प्रभावशाली ढंग से सुलझाने में सक्षम होगी।

सिटी मोंटेसरी स्कूल अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक समारोह के माध्यम से विश्व के बच्चों को एक मंच पर एकत्रित कर विश्व एकता व शांति का संदेश देता है। 

विश्व सामाजिक न्याय दिवस का उद्देश्य ( Purpose of World Social Justice Day)

 विश्व सामाजिक न्याय दिवस का उद्देश्य है, विश्व में एकता व शांति स्थापित करने के लिए प्रेरित करना। इस दिशा में सिटी मोंटेसरी स्कूल अग्रसर है यह विश्व के 2 अरब से अधिक बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए विश्व एकता व विश्व शांति का बिगुल बजा रहा है। संपूर्ण विश्व में प्रत्येक वर्ग को समान अधिकार समान शिक्षा प्राप्त हो तथा किसी के साथ लिंग, नस्ल, जाति, गरीबी, बेरोजगारी आदि के कारण भेदभाव ना हो, इसी उद्देश्य से सामाजिक न्याय दिवस मनाया जाता है।
सामाजिक न्याय के लिए कानून को न्यायालय की चारदीवारी से बाहर आना होगा। इस बात को सभी को मिलकर सुनिश्चित करना होगा कि जो व्यक्ति आर्थिक अभाव व शिक्षा या किसी भी अन्य कारणों से न्यायालय तक नहीं पहुंच पाता उसे भी न्याय मिल सके।