K. Annamalai: कौन है के.अन्नामलाई जिस पर बीजेपी को है इतना भरोसा और ‘सिंघम अन्ना’ कैसे बना बीजेपी का फायरब्रांड नेता?

K. Annamalai: तमिलनाडु के प्रदेश अध्यक्ष और कोयंबटूर से बीजेपी उम्मीदवार के. अन्नामलाई ने 19 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए बुधवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। कौन है के.अन्नामलाई जिस पर बीजेपी को है इतना भरोसा। जिसके दम पर भाजपा 400 का टारगेट रखकर चल रही है। आईए जानते हैं-

K. Annamalai: कौन है के.अन्नामलाई जिस पर बीजेपी को है इतना भरोसा और 'सिंघम अन्ना' कैसे बना बीजेपी का फायरब्रांड नेता? (Who is K.Annamalai and how did he become the firebrand leader of BJP?)
K. Annamalai (के.अन्नामलाई )

दक्षिण भारत में बीजेपी के 400 पार का मजबूत पिलर- के.अन्नामलाई (K. Annamalai)

K. Annamalai: तमिलनाडु के प्रदेश अध्यक्ष और कोयंबटूर से बीजेपी उम्मीदवार के. अन्नामलाई ने 19 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए बुधवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। कौन है के.अन्नामलाई जिस पर बीजेपी को है इतना भरोसा। जिसके दम पर भाजपा 400 का टारगेट रखकर चल रही है। आईए जानते हैं-

तमिलनाडु सियासी तौर पर दक्षिण भारत का सबसे महत्वपूर्ण राज्य है। एक ऐसा राज्य जहां बीजेपी का जनाधार कभी नहीं रहा। कांग्रेस की विदाई भी तमिलनाडु से काफी समय पहले हो चुकी है। तमिलनाडु की राजनीति से दो छात्रपों ने तीन दशक से अधिक समय तक राष्ट्रीय पार्टियों को बाहर रखा और वे थे करुणा निधि और जयललिता। अब दोनों ही इस दुनिया में नहीं है। इस बीच पूर्व आईपीएस अधिकारी K. Annamalai जो बीजेपी तमिलनाडु के प्रदेश अध्यक्ष हैं राष्ट्रीय मीडिया की सुर्ख़ियों से दूर तमिलनाडु में बीजेपी को जमीनी स्तर पर एक बड़ी ताकत बना रहे हैं।

अन्नामलाई पर बीजेपी को इतना भरोसा है कि उनकी वजह से बीजेपी ने जयललिता की पार्टी एआईडीएमके से नता तोड़ दिया लेकिन अपने अध्यक्ष पर आंच नहीं आने दी।

के.अन्नामलाई को दक्षिण का सिंघम, मिशन 400 पार का मजबूत पिलर, मोदी का सारथी और तमिलनाडु में बीजेपी के किंग मेकर के रूप में देखा जा रहा है। अन्नामलाई वह नाम है जिसकी चर्चा सिर्फ दक्षिण में ही नहीं बल्कि पूर्व और पश्चिम में भी हो रही है। अन्नामलाई मोदी के वह हनुमान है जो विपक्ष को हराने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। कौन है अन्नामलाई? और कैसे आईपीएस ऑफिसर से किया राजनीति में प्रवेश?

कौन हैं के. अन्नामलाई ? (Who is K.Annamalai?)

तमिलनाडु के करूर जिले से आने वाले K. Annamalai का जन्म कोयंबटूर के एक साधारण कृषि परिवार में हुआ था। अन्नामलाई कांगु – बेल्लार जाती के हैं। यह जाति आजादी के समय तो अगड़ी जाति थी। लेकिन 1975 से इसे पिछड़ी जाति का दर्जा दे दिया गया। कोयंबटूर से इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद अन्नामलाई ने लखनऊ आईआईएम से एमबीए की डिग्री प्राप्त की। उसके बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी की और 2011 में आईपीएस बन गए। अन्नामलाई ने ‘स्टेपिंग बियोंड खाकी’ के नाम से एक किताब भी लिखी है।

के. अन्नामलाई कैसे बने सिंघम? (How did K. Annamalai become Singham?)

आईपीएस अधिकारी के तौर पर के. अन्नामलाई की छवि सिंघम के रूप में थी। अन्नामलाई 2011 में पुलिस सेवा में शामिल हुए और उनकी पहली पोस्टिंग सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में कर्नाटक के करकला में हुई। यहां उन्होंने नशीली दावों के दुरुपयोग और तंबाकू की बिक्री के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया और कई अवैध शराब की दुकानों को बंद कराया। उन्होंने नशीली दवाओं की लत के खिलाफ कॉलेज में सेमिनार आयोजित किया और शिकायत पेटियां स्थापित की। जहां छात्र अवैध गतिविधियों के बारे में गुमनाम सुझाव पोस्ट कर सकते थे।

जनवरी 2015 और अगस्त 2016 के बीच वह उडुपी जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात थे इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने अपने पहले हत्या के मामले की जांच की जिसमें एक 17 वर्षीय छात्रा भी शामिल थी, जिसके साथ उसके हमलावरों ने बलात्कार किया था। अन्नामलाई पीड़िता कि दोषियों को दो दिनों के भीतर गिरफ्तार कर लिया और पीड़िता के नाम पर 10,000 रुपए की छात्रवृत्ति शुरू की। उडुपी में रहते हुए अन्नामलाई एक बार एक प्रोविजन स्टोर पर गए और सिगरेट गुटका और बीड़ी मांगी। जब दुकानदार ने उन्हें सामान दिया तो K. Annamalai ने जनरल स्टोर्स पर बिक्री पर प्रतिबंध होने के बावजूद उत्पाद बेचने के लिए तुरंत उस पर ₹30,000 का जुर्माना लगा दिया।

अन्नामलाई ने समझने के लिए की धार्मिक ग्रंथो की गलत व्याख्या और व्यापक कट्टरपंत का कारण क्या है इस्लाम धर्म के अध्ययन का निर्णय लिया।

‘सिंघम अन्ना’ कैसे बना बीजेपी का फायरब्रांड नेता?

देश बदलने के लिए सिंघम अन्ना ने 28 मई 2019 को आईपीएस की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। 2019 में पुलिस सर्विस से इस्तीफा देते वक्त K. Annamalai बेंगलुरु दक्षिण के डीसीपी थे। तब उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि “मैंने 10 साल पुलिस सेवा की। पुलिस सेवा में मुझे जो करना था वह मैंने हासिल कर लिया है अब आगे का रास्ता तय करूंगा।”

अपने त्यागपत्र में अन्नामलाई ने कहा कि यह अचानक लिया गया फैसला नहीं था बल्कि 2018 में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर आधारित एक सुविचारित निर्णय था। 25 अगस्त 2020 में अन्नामलाई ने राजनीति में कदम रखा। अन्नामलाई मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन को देखते हुए भाजपा में शामिल हो गए लेकिन तमिलनाडु के धरातल पर बीजेपी और अन्नामलाई दोनों ही जमीन तलाश रहे थे। 9 महीने बाद तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव हुए। 20 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए भाजपा ने चार सीटों पर जीत हासिल की। अन्नामलाई इस चुनाव में हार गए थे लेकिन यह तो अन्नामलाई की शुरुआत थी।

9 जुलाई 2021 को मात्र 36 वर्ष की उम्र में अन्नामलाई कुप्पुस्वामी को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। ऐसा करने पर जानकारों ने इसे भाजपा का बैकवर्ड जातियों को लुभाने वाला कदम बताया था लेकिन अन्नामलाई मोदी के मिशन “सबका साथ सबका विकास” के लिए निकल पड़े और फिर जो यात्रा शुरू हुई उसे देखकर सारा देश हैरान है कि तमिलनाडु में बीजेपी की रैलियां में इतनी भीड़ कैसे उमड़ रही है।

के अन्नामलाई जुलाई 2023 में मक्कल यात्रा शुरू की जिसमें वे राज्य के सारे 234 विधानसभा क्षेत्र में गए। गृह मंत्री अमित शाह ने हरी झंडी दिखाकर इस यात्रा का शुभारंभ किया था और यात्रा के समापन पर पीएम नरेंद्र मोदी स्वयं पहुंचे थे। 7 महीनों तक चली इस यात्रा में अन्नामलाई ने पूरा राज्य छान मारा।

राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक इस यात्रा से अन्नामलाई तमिलनाडु के बड़े युवा नेता के तौर पर उभरे हैं। उनका पूर्व आईपीएस होना और आईआईएम पास आउट होना युवा वर्ग को उनकी तरफ आकर्षित करता है। कभी बेंगलुरु में डीएसपी के तौर पर अन्नामलाई को लोग सिंघम बुलाते थे। नौकरी से इस्तीफा देकर अन्नामलाई ने बीजेपी ज्वाइन किया। पार्टी ने उन्हें एक साल बाद ही प्रदेश अध्यक्ष बना दिया अब अन्नामलाई की इस यात्रा ने उन्हें तमिलनाडु के बड़े नेताओं में शुमार कर दिया है।

बीजेपी के हिंदी समर्थक और ब्राह्मणों की पार्टी वाली छवि को तोड़ा

के .अन्नामलाई ने बीजेपी के हिंदी समर्थक और ब्राह्मणों की पार्टी वाली छवि को तोड़ दिया है। तमिलनाडु में बीजेपी की छवि हिंदू और हिंदी समर्थक की रही है। द्रविड़ राजनीति के गढ़ में यह दो मिथक कायम रहे हैं कि बीजेपी उन पर हिंदी थोप रही है लेकिन अन्नामलाई ने इस मिथक को तोड़ दिया है।

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युवाओं के आइकॉन हैं के. अन्नामलाई

भाजपा को K. Annamalai के रूप में एक ऐसा नेता मिल गया है जिसे तमिलनाडु के युवा देखना और सुनना चाहते हैं। स्कूल और कॉलेज में जनसंपर्क के दौरान वे युवाओं के सवालों का संजीदगी से जवाब देते हैं। सार्वजनिक मंचों पर भी तर्कों से बीजेपी का पक्ष रखते हैं। वह किसी नेता की व्यक्तिगत आलोचना नहीं करते। बल्कि विपक्ष की नीतियों पर सीधा प्रहार करते हैं। अन्नामलाई युवाओं के आइकन बन चुके हैं। यह अलग बात है कि अभी उनकी पहचान जयललिता और करुणा निधि जैसी नहीं है लेकिन तमिलनाडु की राजनीति में विपक्ष में उनके बराबर या उनसे अधिक कोई लोकप्रिय नहीं है। तमिलनाडु में मुख्यमंत्री के बाद अन्नामलाई सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं।