Nithari Case: नाले में मिले नर कंकाल, क्या है 17 वर्ष पुराना निठारी हत्याकांड जिसने हैवानियत की सारी हदें पर कर दी

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देश को झकझोर देने वाला, बहुचर्चित, नोएडा का निठारी कांड जिसमें 18 साल बाद भी 18 मासूम और महिला को इंसाफ नहीं मिला। इन सभी की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी और कंकाल और शरीर के अंग नाले और झाड़ियों में पाए गए थे। सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर ने खुद अपने जुर्म को कबूल भी किया था। जिस पर ट्रायल कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई, लेकिन सबूत और गवाहों के अभाव में मासूमों के कातिल यह दोनों इलाहाबाद हाईकोर्ट से बरी कर दिए गए। डी- 5 कोठी के पीछे मिले नर कंकाल आखिर किसके थे? किसने की इन मासूमों के साथ दरिंदगी और हत्या ?ये सवाल आज भी वही हैं।

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Nithari Case/Nithari Kand:  देश को झकझोर देने वाला, बहुचर्चित, नोएडा का निठारी कांड (Noida Nithari Serial Murder Case) जिसमें 18 साल बाद भी 18 मासूम और महिला को इंसाफ नहीं मिला। इन सभी की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी और कंकाल और शरीर के अंग नाले और झाड़ियों में पाए गए थे। सुरेंद्र कोली (Surendra Koli) और मोनिंदर सिंह पंढेर (Moninder Singh Pandher ) ने खुद अपने जुर्म को कबूल भी किया था। जिस पर ट्रायल कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई, लेकिन सबूत और गवाहों के अभाव में मासूमों के कातिल यह दोनों इलाहाबाद हाईकोर्ट से बरी कर दिए गए। 

डी- 5 कोठी के पीछे मिले नर कंकाल आखिर किसके थे?  किसने की इन मासूमों के साथ दरिंदगी और हत्या ?ये सवाल आज भी वही हैं।

नोएडा के चर्चित निठारी कांड (Nithari Case) में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को आरोपी सुरेंद्र कोली (Surendra Koli) और मोनिंदर सिंह पंढेर (Moninder Singh Pandher ) को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया। गाजियाबाद के सीबीआई अदालत में लड़कियों से दुष्कर्म और हत्या के आरोप में दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।

क्या है निठारी सीरियल मर्डर या निठारी कांड का पूरा मामला? (What is the whole matter of Nithari Serial Murder or Nithari case?)

नोएडा (Noida) के निठारी गांव में 17 वर्ष पहले एक लड़की के लापता होने के मामले में जब जांच शुरू हुई तो किसी को नहीं पता था कि जांच का यह सिलसिला 19 नर कंकालो पर जाकर थमेगा। दुनिया के लिए यह प्रकरण एक बड़ी सनसनी बन गया था।

निठारी (Nithari) में रहने वाली युवती 12 नवंबर 2006 को कोठी की सफाई के लिए घर से निकली थी। इसके बाद वापस घर नहीं लौटी। परिजनों ने उसकी तलाश की लेकिन वह नहीं मिली। इस बारे में पुलिस से शिकायत की गई लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। यह युवती निठारी गांव के पास स्थित सेक्टर- 31 में बनी कोठी D-5 में गई थी। 

परिजनों के दबाव बनाने के बाद जब पुलिस ने जांच शुरू की तो दिसंबर 2006 में कोठी के पीछे नाले से एक नर कंकाल मिला, जिसके बाद एक के बाद एक 19 नर कंकाल यहां से बरामद हुए। इनमें कुछ कंकाल बच्चों के भी थे। पुलिस ने 29 दिसंबर 2006 को मकान मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली (Surendra Koli) को गिरफ्तार कर लिया।

दोनों के खिलाफ 19 मामले दर्ज हुए थे जिनमें से 16 मामलों में चार्जशीट फाइल की गई और तीन केस को सबूत के अभाव में बंद कर दिया गया। जांच में पता चला कि इस कोठी में बच्चों का यौन शोषण किया जाता था और उसके बाद आरोपी उनकी हत्या कर देते थे। इस घटना को लेकर कुछ लोगों ने इसे मानव अंग तस्करी से भी जोड़ा था लेकिन इसकी कोई पुष्टि पुलिस जांच में नहीं हो सकी थी।

सीबीआई के सुपुर्द की गई Nithari Case की जांच

नर कंकालों के मिलने के बाद 10 जनवरी 2006 को ही इस मामले की जांच सीबीआई के हवाले कर दी गई थी। सीबीआई की टीम 11 जनवरी को मौके पर पहुंची। Pandher की कोठी के पास से CBI की टीम ने 30 और हड्डियां बरामद की। 28 फरवरी और 1 मार्च को सुरेंद्र कोली (Surendra Koli) ने दिल्ली में अपना इकबालिया बयान दर्ज कराया। बयानों की वीडियोग्राफी भी हुई। 22 मई 2007 को सीबीआई ने गाजियाबाद की अदालत में मामले में पहला आरोप पत्र दाखिल किया। उसके बाद साल दर साल इस मामले में कई अहम मोड़ आते चले गए।

निठारी कांड में कब क्या हुआ ? (When and what happened in Nithari incident?)

29 दिसंबर 2006 को नोएडा में Moninder Singh Pandher के घर के पीछे नाले से 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले। Moninder Singh Pandher  और  Surendra Koli को गिरफ्तार किया गया।

  • 8 फरवरी 2007 को कोली (Koli) और पंढेर (Pandher) को 14 दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा गया। मई 2007 को सीबीआई ने पंढेर को अपनी चार्जशीट में अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोप मुक्त कर दिया था। दो माह बाद अदालत की फटकार के बाद CBI ने उसे मामले में सहअभियुक्त बनाया।
  • 13 फरवरी 2009 को विशेष अदालत ने पंढेर और कोली को 15 वर्षीय किशोरी के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या का दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई। यह पहला फैसला था।
  • 3 सितंबर 2014 को Koli के खिलाफ कोर्ट ने मौत का वारंट भी जारी किया।
  • 4 सितंबर 2014 को Koli को डासना जेल से मेरठ जेल फांसी के लिए ट्रांसफर किया गया।
  • 12 सितंबर 2014 से पहले सुरेंद्र कोली को फांसी दी जानी थी। वकीलों के समूह डेथ पेनाल्टी लिटिगेशन ग्रुप्स ने कोली को मृत्युदंड दिए जाने पर पुनर्विचार याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा।
  • 12 सितंबर 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा पर 29अक्टूबर तक के लिए रोक लगाई।
  • 28 अक्टूबर 2014 को Surendra Koli की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका को खारिज किया। वर्ष 2014 में राष्ट्रपति ने भी दया याचिका रद्द कर दी।
  • 28 जनवरी 2015 को हत्या मामले में कोली की फांसी की सजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उम्र कैद में तब्दील कर दिया।
  • निठारी कांड (Nithari Case) के अन्य मामलों का खुलासा होने पर इस मामले को भी CBI ने 11 जनवरी को अपने हाथ में ले लिया था। CBI ने 26 जुलाई 2007 को अदालत में चार्ज शीट पेश की थी। मामले में सीबीआई कोर्ट में 305 दिन सुनवाई हुई। इस दौरान अभियोजन पक्ष में कुल 38 गवाह पेश किए।

निठारी की D-5 नंबर की कोठी की कहानी (Story of Nithari's house number D-5)

नोएडा सेक्टर- 31 के पास गांव निठारी की D- 5 नंबर की कोठी  ने 2005 में खरीदी थी।Moninder Singh Pandher का परिवार चंडीगढ़ में रहता था।नोएडा में उसने रहने का ठिकाना बनाया था क्योंकि नोएडा में ही उसकी कंपनी थी। नोएडा में परिवार नहीं होने से मोनिंदर ने चंडीगढ़ में नौकरी कर चुके Surendra Koli को नोएडा बुला लिया और अपने घर में खाना बनाने के लिए उसे अपने पास रख लिया, क्योंकि सुरेंद्र कोली खाना बनाने में एक्सपर्ट था।

सुरेंद्र कोली कोठी में ही छत पर बने एक कमरे में रहने लगा। लेकिन महीने में अधिकांश दिन मोनिंदर सिंह कहीं ना कहीं टूर पर ही रहता था। इस वजह से सुरेंद्र कोली कोठी में मलिक की तरह रहता था और यहां पर अकेले रहते हुए उसने अनेक बच्चों और युवतियों का कत्ल भी किया। आरोप तो यह भी है कि वह बच्चों को मार कर उनका मांस भी खाता था। इस घटना के बाद से ही यह कोठी वीरान हो चुकी है। कोठी में बड़ी-बड़ी घास खड़ी है