विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी सियासी पहचान बनाए रखने वाली कौन हैं लवली आनंद

image 1 28

2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए ने बिहार पीपुल्स पार्टी के संस्थापक और पूर्व सांसद आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद को बिहार की शिवहर सीट से जदयू के टिकट पर उम्मीदवार बनाया है। चुनाव से ठीक पहले लवली आनंद जदयू में शामिल हुई और उम्मीदवार बनाई गई है। हालांकि शिवहर सीट तीन बार से भाजपा के पास थी। इस बार गठबंधन में यह सीट नीतीश कुमार की पार्टी के खाते में गई है।

शिवहर सीट पर भाजपा की सांसद रमा देवी 2009, 2014 और 2019 में, तीन बार शानदार जीत दर्ज कर चुकी हैं।इस सीट से आनंद मोहन भी 1991 और 1998 में जीत दर्ज कर चुके हैं। लवली आनंद ने 1994 में बिहार की वैशाली सीट से लोकसभा चुनाव जीता। इसके बाद वह कांग्रेस, समता पार्टी और हम(HUM) से भी चुनाव लड़ीं लेकिन हर बार उनकी हार हुई।

कोडरमा की राजनीति का केंद्र बनी अन्नपूर्णा देवी फिर से उतरीं चुनाव मैदान में

आईए जानते हैं लवली आनंद के राजनीतिक सफर के बारे में-

कौन हैं लवली आनंद (Who is Lovely Anand) ?

12 दिसंबर 1966 को वैशाली में जन्मीं लवली आनंद ने रांची यूनिवर्सिटी से बी.ए. की डिग्री हासिल की। लवली आनंद लोकसभा के पूर्व सदस्य और स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिन्हा की पोती तथा पूर्व सांसद आनंद मोहन की पत्नी हैं।

लवली आनंद का राजनीति में प्रवेश

लवली आनंद के राजनीतिक सफर की शुरुआत उनके पति आनंद मोहन सिंह द्वारा स्थापित बिहार पीपुल्स पार्टी के लिए पहले उम्मीदवार के रूप में हुई। लवली आनंद वैशाली लोकसभा उपचुनाव में बिहार पीपुल्स पार्टी से पहली बार चुनाव मैदान में उतरीं और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिन्हा की पत्नी किशोरी सिन्हा को हराया। मुजफ्फरपुर के तत्कालीन आईएएस जी कृष्णैया हत्याकांड में पति आनंद मोहन के आजीवन कारावास की सजा के तहत जेल जाने के बाद लवली आनंद के सामने कड़ी चुनौती थी। लेकिन उन्होंने अपने साहस और सहजता से न सिर्फ परिवार तथा बच्चों को संभाला बल्कि राज्य की राजनीति में भी अपनी पकड़ बनाए रखी।

पांचवें चरण के मतदान में इन दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर: Lok Sabha Election 5th Phase Voting 

विभिन्न पार्टियों से जुड़ीं लवली आनंद

1994 से लेकर 2024 तक के अपने लंबे राजनीतिक सफर में लवली आनंद विभिन्न पार्टियों के टिकट पर चुनाव लड़ीं। 2009 के चुनाव में लवली शिवहर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ीं।2014 के चुनाव में वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर उतरीं लेकिन इन दोनों ही चुनाव में उनकी हार हुई। वर्ष 2000 में एनडीए के घटक दल के रूप में बिहार पीपुल्स पार्टी के टिकट पर लवली आनंद सहरसा विधानसभा सीट पर लड़ी थी। इसमें रजत के शंकर प्रसाद टेकरीवाल से उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

जीत की हैट्रिक लगाने के साथ ही पार्टी के भरोसे को कायम रखने की जिम्मेदारी: लोकसभा चुनाव 2024

दो चुनाव के बाद प्रत्येक चुनाव में मिली हार

लवली आनंद दो विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं।उन्होंने 1996 में नबीनगर विधानसभा सीट से समता पार्टी के टिकट पर उपचुनाव लड़ा और विधायक बनीं। 2005 के फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव में बाढ़ सीट से जीत दर्ज की। लेकिन इस सीट पर उनका कार्यकाल सिर्फ 8 महीने का ही रहा। इसके बाद किसी भी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में लवली आनंद जीत नहीं पाई। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने राजद के टिकट पर सहरसा से चुनाव लड़ा था।

बिहार की राजनीति में अच्छी पकड़

भाजपा सांसद रमा देवी की यह सीट गठबंधन में जदयू के खाते में जाने के बाद लवली आनंद यहां चुनावी समर में उतरी हैं।उन्होंने कई चुनाव में हार और विपरीत परिस्थितियों में भी बिहार की राजनीति में अपनी पकड़ बनाए रखी है।