Kartik Maas 2023:अत्यंत पवित्र और पुण्यदायक कार्तिक मास का आध्यात्मिक महत्व

Kartik Maas 2023: वर्ष के 12 महीने किसी न किसी देव को समर्पित होते हैं। जैसे श्रावण मास शिव को समर्पित होता है तो वहीं चैत्र और अश्विन मास मां दुर्गा को समर्पित होता है, इसी प्रकार कार्तिक मास भगवान विष्णु को समर्पित महीना है। कार्तिक मास में ही भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागृत होते हैं। अतः कार्तिक महीने को सर्वश्रेष्ठ महीना बताया गया है। आईए जानते हैं कार्तिक मास के महत्व के विषय में-

Kartik Maas: कार्तिक मास का आध्यात्मिक महत्व

कार्तिक मास 2023 || Kartik Maas 2023 || Kartik Month Significance || About Kartik Maas

कार्तिक मास का क्या है महत्व ? (What is the significance of Karthik month?)

Kartik Maas 2023:  वर्ष के 12 महीने किसी न किसी देव को समर्पित होते हैं। जैसे श्रावण मास शिव को समर्पित होता है तो वहीं चैत्र और अश्विन मास मां दुर्गा को समर्पित होता है, इसी प्रकार कार्तिक मास भगवान विष्णु को समर्पित महीना है। कार्तिक मास में ही भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागृत होते हैं। अतः कार्तिक महीने को सर्वश्रेष्ठ महीना बताया गया है। आईए जानते हैं कार्तिक मास के महत्व के विषय में-

हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास वर्ष का आठवां महीना है। कार्तिक मास बड़ा ही पवित्र माना जाता है। इस माह का महत्व स्कंद पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण में भी मिलता है। कार्तिक मास समस्त तीर्थों तथा धार्मिक कृत्यों से भी पवित्रतर है। भगवान श्री कृष्ण को वनस्पतियों में तुलसी, पुण्यक्षेत्रों में द्वारिकापुरी,तिथियों में एकादशी और महीने में कार्तिक विशेष प्रिय है।

“कृष्णप्रियो हि कार्तिक:,

कार्तिक: कृष्णवल्लभ:।”

इसलिए कार्तिक मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायक माना गया है।

मनुष्य के मोक्ष का द्वार है कार्तिक मास

ईश्वर की आराधना करने वाले मनुष्य की आकांक्षाएं जब ईश्वरीय कृपा से पूर्ण हो जाती हैं और उनका क्षय भी नहीं होता तो मनुष्य को सद्गति प्राप्त हो जाती है। यही मोक्ष की वास्तविक अवस्था है। कार्तिक मास में ईश्वर की आराधना से स्वास्थ्य, आयु एवं धन सभी प्रकार से लाभ होता है।

  • कार्तिक मास में स्वास्थ्य लाभ हेतु भगवान धन्वंतरि की आराधना का विधान है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी अर्थात धनतेरस के दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि का अवतरण हुआ था। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद के प्रणेता तथा वैदिक शास्त्र के देवता के रूप में जाना जाता है। अतः धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की आराधना स्वास्थ्य लाभ देती है।
  • कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि यानी नरक चतुर्दशी के दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का विधान है। इस चतुर्दशी का पूजन कर अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है। आत: यमराज की पूजा से लंबी आयु प्राप्त होती है।
  • कार्तिक मास की अमावस्या को देवी महालक्ष्मी के पूजन का विधान है। कार्तिक मास की अमावस्या के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा आराधना करने से संपन्नता आती है तथा जीवन में समृद्धि और ऐश्वर्या बना रहता है।
  • कार्तिक मास की एकादशी (जिसे देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं) के दिन विगत चार माह से सोए देव भगवान विष्णु योग निद्रा से जागृत होते हैं और सभी पूर्व आराधनाओं का शाश्वत फल प्रदान करते हैं, क्योंकि भगवान विष्णु मनुष्य के लिए सर्व कल्याणकारी देव है। इसीलिए उनकी जागते ही सभी समस्याओं के समाधान का मार्ग खुल जाता है और इसी दिन तुलसी शालिग्राम विवाह भी होता है। भगवान विष्णु के जाग्रत होने के ठीक पहले धनतेरस, यम को समर्पित यम दीपदान, कृष्णा विजय का प्रतीक नरक चौदस और लक्ष्मी पूजन का दिन दीपावली मनाया जाता है।

कार्तिक मास का आध्यात्मिक महत्व (Spiritual Significance of Kartik Month)

पुराणों में वर्णित है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान विष्णु का मत्स्यावतार हुआ था। कार्तिक मास की पूर्णिमा को ही भगवान शिव ने त्रिपुर नामक राक्षस का वध किया था और त्रिपुरारी कहलाए। महादेव द्वारा त्रिपुर का वध संकेत है कि मनुष्य को तीन दोषों- काम, क्रोध, लोभ का नाश करने के लिए हमेशा प्रयास करते रहना चाहिए।

कार्तिक मास के पंचकर्म (Panchakarma of Kartik month)

कार्तिक मास (Kartik Maas) में ईश्वर की आराधना के लिए पंचकर्म अवश्य करना चाहिए। इन पांच आचरणों के पालन का बहुत महत्व है। कार्तिक मास में यह पांच कर्म करने से नारायण तो प्रसन्न होते ही है जीवन में सुख समृद्धि एवं प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है। ये पंचकर्म हैं-

तुलसी पूजा

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कार्तिक मास (Kartik Maas) में तुलसी पूजा का सर्वाधिक महत्व है। कार्तिक मास में ही तुलसी शालिग्राम विवाह एकादशी के दिन होता है। भगवान विष्णु शालिग्राम के रूप में तुलसी के हृदय में निवास करते हैं। अतः कार्तिक मास में तुलसी पूजा अवश्य करनी चाहिए। इससे श्रेष्ठ स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है और घर में सुख समृद्धि आती है।

दीपदान

कार्तिक मास (Kartik maas) में दीपदान का बहुत महत्व है। लक्ष्मीपति भगवान विष्णु के जागने से पूर्व कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष के 15 दिनों की रातें वर्ष की सबसे काली रातों में से होती हैं। अतः इन 15 दिनों में प्रतिदिन दीप का प्रज्वलन करना चाहिए। वैसे तो कार्तिक मास में पूरे महीने दीपदान का विधान है। इससे जीवन को नई दिशा मिलती है।

ब्रह्मा आचरण का पालन

कार्तिक मास (Kartik Maas) में ऐसे किसी भी आचरण से दूर रहना चाहिए जिससे ईश्वर की आराधना में विघ्न उत्पन्न हो या ईश्वरीय आकर्षण में कमी आए।

भूमि शयन

पूरे वर्ष हम पलंग या चारपाई पर सोते हैं लेकिन कार्तिक माह में भूमि पर शयन करना चाहिए। भूमि पर शयन करने से विलासिता पूर्ण जीवन से कुछ दिनों के लिए मुक्ति मिलती है, जिससे स्वास्थ्य लाभ हो तो होता ही है, शारीरिक और मानसिक विकार भी दूर होते हैं।

दालों का निषेध

Kartik Maas में दालों का सेवन नहीं करना चाहिए। कार्तिक मास में समान्य हल्का एवं सुपाच्य भोजन स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है।

कार्तिक मास के त्यौहार

करवा चौथ, अक्षय नवमी, अहोई अष्टमी, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, यम द्वितीया,भैया दूज, डाला छठ,गोपाष्टमी,देव उठावनी एकादशी, एवं कार्तिक पूर्णिमा।

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