World Polio Day 2023 (विश्व पोलियो दिवस 2023): पोलियो के लक्षण,रोकथाम एवं उपचार

विश्व पोलियो दिवस 2023 (World Polio Day 2023) 24 अक्टूबर 2023

24 अक्टूबर को ही क्यों मनाया जाता है विश्व पोलियो दिवस ?

विश्व पोलियो दिवस प्रत्येक वर्ष 24 अक्टूबर को मनाया जाता है। विश्व पोलियो दिवस दुनिया भर में पोलियोमाइलाइटिस को समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों पर प्रकाश डालता है। यह दिन प्रत्येक बच्चे को इस विनाशकारी बीमारी से बचाने के लिए पोलियो टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। पोलियो एक संक्रामक बीमारी है जो पूरे शरीर को प्रभावित करती है। इसका शिकार अधिकांशत बच्चे होते हैं। पोलियो को ‘पोलियोमाइलाइटिस’ या ‘शिशु अंगघात’ भी कहा जाता है। इस बीमारी से कई राष्ट्र बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। विश्व के कई देशों में पोलियो जड़ से समाप्त हो चुका है। लेकिन अभी भी कई देश ऐसे हैं जहां यह बीमारी जड़ से समाप्त नहीं हुई है।

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पोलियो को 'पोलियोमाइलाइटिस' या 'शिशु अंगघात' भी कहा जाता है।

World Polio Day 2023 (विश्व पोलियो दिवस 2023):  प्रत्येक वर्ष 24 अक्टूबर को मनाया जाता है। World Polio Day दुनिया भर में पोलियोमाइलाइटिस (Poliomyelitis) को समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों पर प्रकाश डालता है। यह दिन प्रत्येक बच्चे को इस विनाशकारी बीमारी से बचाने के लिए पोलियो टीकाकरण (Polio Vaccination) के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। पोलियो एक संक्रामक बीमारी है जो पूरे शरीर को प्रभावित करती है। इसका शिकार अधिकांशत बच्चे होते हैं।

Polio को ‘Poliomyelitis’ या ‘शिशु अंगघात’ भी कहा जाता है। इस बीमारी से कई राष्ट्र बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। विश्व के कई देशों में पोलियो (Polio) जड़ से समाप्त हो चुका है। लेकिन अभी भी कई देश ऐसे हैं जहां यह बीमारी जड़ से समाप्त नहीं हुई है।

24 अक्टूबर को ही क्यों मनाया जाता है विश्व पोलियो दिवस (Why is World Polio Day Celebrated Only on 24 October) ?

World Polio Day प्रत्येक वर्ष 24 अक्टूबर को अमेरिकी वायरोलॉजिस्ट जोनास साल्क के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। जोनास साल्क ने विश्व की पहली सुरक्षित और प्रभावी पोलियो वैक्सीन बनाने में मदद की थी। वर्ष 1955 में डॉक्टर साल्क ने पोलियो से बचाव की दवा को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया था। जिस समय पोलियो पूरे विश्व के लिए एक चुनौती बना हुआ था, उस समय इसके रोकथाम के लिए डॉक्टर साल्क ने दवा का आविष्कार कर इस घातक बीमारी के खिलाफ एक अचूक हथियार मानव समाज को दिया था।

ग्लोबल पोलियो उन्मूलन पहल की स्थापना 1988 में हुई जिसे रोटरी इंटरनेशनल और WHO द्वारा शुरू किया गया था, जब विश्व भर में पोलियो के लगभग 3,50,000 मामले थे।

क्या है पोलियो (What is Polio) ?

पोलियो अथवा पोलियोमाइलाइटिस (Polio or Poliomyelitis) एक संक्रामक रोग है जो वायरस द्वारा फैलता है। Polio का वायरस मुंह के रास्ते शरीर में प्रवेश करता है और आंतों को प्रभावित करता है। वायरस के शरीर में प्रवेश करने से कुछ समय पश्चात ही लक्षण प्रकट हो सकता है। कभी-कभी तीन दिनों से 5 दिन में लक्षण प्रदर्शित होते हैं। यह लक्षण।सामान्य से तीव्र हो सकते हैं और इसमें आमतौर पर टांगों में लकवा हो जाता है।

पोलियो के लक्षण (Symptoms of Polio)

Polio की बीमारी में वायरस की तीव्रता पर मरीज की स्थिति निर्भर करती है। पोलियो से संक्रमित लगभग 72 फीसदी लोग किसी भी लक्षण का अनुभव नहीं करते हैं। पोलियो से संक्रमित अधिकतर लोगों को फ्लू जैसे ही लक्षण होते हैं। जो इस प्रकार हैं-

  • पेट में दर्द
  • गले में दर्द
  • सिर में तेज दर्द
  • उल्टियां आना
  • निगलने में कठिनाई होना

कुछ रोगियों में Polio के अधिक गंभीर लक्षण हो सकते हैं जैसे- (Polio Symptoms)

  • मेनिनजाइटिस- मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के आवरण में संक्रमण
  • पक्षाघात – पैर हाथ को स्थानांतरित करने की क्षमता में कमी या अनुपस्थित और सांस लेने की मांसपेशियों में खिंचाव
  • पैरेथेसिया – हाथ और पैर में पिन और सुई चुभने जैसा अनुभव होता हैे।

पोलियो की रोकथाम व उपचार (Prevention of Polio)

Polio की रोकथाम और उपचार टीका के द्वारा ही किया जा सकता है।पोलियो एक ऐसी बीमारी है जिसकी कोई दवा नहीं है। पोलियो बीमारी को टीकाकरण के माध्यम से ही रोका जा सकता है। पोलियो टीकाकरण निर्धारित अनुसूची के अनुसार कई बार दिया जा सकता है। यह जीवन भर बच्चों की रक्षा करती है। पोलियो वैक्सीन दो प्रकार के होते हैं-

निष्क्रिय पोलियो वायरस वैक्सीन (IPV)

यह वैक्सीन डॉक्टर जोनास साल्क द्वारा विकसित की गई थी, जिसका वर्ष 1952 में पहला परीक्षण किया गया और 12 अप्रैल 1955 को इसे प्रमाणित कर उपयोग के लिए प्रस्तुत किया गया। यह निष्क्रिय या मृत पोलियो वायरस की खुराक थी। यह वैक्सीन रोगी को उम्र के आधार पर हाथ या पैर में लगाया जाता है।

जीवित तनु वैक्सीन या मौखिक पोलियो वायरस(OPV)

दूसरा टीका अल्बर्ट साबिन ने कमजोर किए गए पोलियो वायरस का प्रयोग करके विकसित किया था। इस टीका का परीक्षण 1957 में शुरू हुआ और 1962 में लाइसेंस मिला। मौखिक वैक्सीन को मौखिक रूप से दिया जाता है अर्थात इसकी ओरल ड्रॉप पिलाई जाती है।

भारत में पोलियो की स्थिति (status of polio in india)

भारत में पोलियो का आखिरी मामला जनवरी 1911 में सामने आया था। वर्ष 2012 के प्रारंभ में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)ने भारत को पोलियो ग्रस्त देशों की सूची से हटा दिया। वर्ष 2014 से इस बीमारी का कोई नया मामला सामने नहीं आया। वर्ष 2014 के बाद से भारत को पोलियो मुक्त घोषित कर दिया गया है।

पोलियो उन्मूलन हेतु भारत में योजनाएं (Plans for polio eradication in India)

पोलियो जैसी घातक बीमारी को पुनः प्रकट होने से रोकने के लिए प्रत्येक वर्ष भारत सरकार दो “राष्ट्रीय प्रतिरक्षण दिवस” आयोजित करती है। प्रत्येक वर्ष 170 मिलियन बच्चों को प्रतिरक्षण दिया जाता है। स्वास्थ्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाते हैं। पोलियो के प्रति जागरूकता अभियान में जाने-माने लोगों ने हिस्सा लिया और सक्रियता पूर्वक इस अभियान को प्रचारित किया। बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन का कथन “दो बूंद जिंदगी की” बेहद प्रसिद्ध हुआ था।

विश्व पोलियो दिवस का उद्देश्य (Objective of World Polio Day)

विश्व पोलियो दिवस (World Polio Day) का उद्देश्य पोलियो जैसी घातक बीमारी के विषय में लोगों में जागरूकता फैलाना है।