Dengue Fever Symptoms & Causes : डेंगू बुखार – कारण, लक्षण, उपचार और बचाव

Dengue Fever Symptoms & Causes : डेंगू बुखार – कारण,लक्षण,उपचार,और बचाव – ‘डेंगू बुखार’ अथवा ‘ डेंगी’ एक खतरनाक संक्रामक बीमारी है। इस रोग को आम भाषा में ‘ हड्डी तोड़सी बुखार कहा जाता है क्योंकि इसके कारण शरीर और जोड़ों में बहुत दर्द होता है। डेंगू बारिश के मौसम में बहुत तेजी से फैलता है।आइए जानते है डेंगू क्या है?यह कैसे फैलता है ? इसके लक्षण क्या है? और क्या है इसका उपचार।

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डेंगू बुखार - कारण, लक्षण, उपचार, और बचाव

‘डेंगू बुखार’ अथवा ‘ डेंगी’ एक खतरनाक संक्रामक बीमारी है। इस रोग को आम भाषा में ‘ हड्डी तोड़सी बुखार कहा जाता है क्योंकि इसके कारण शरीर और जोड़ों में बहुत दर्द होता है। डेंगू बारिश के मौसम में बहुत तेजी से फैलता है।आइए जानते है डेंगू क्या है?यह कैसे फैलता है ? इसके लक्षण क्या है? और क्या है इसका उपचार।

क्या है डेंगू (What is Dengue) ?

डेंगू एडीज मच्छर के काटने से होने वाला एक तीव्र वायरल इंफेक्शन है। इससे शरीर की सामान्य क्लॉटिंग (थक्का जमना) की प्रक्रिया अव्यवस्थित हो जाती है जो अधिकतर प्लेटलेट्स नष्ट होने के कारण होती है। इस बीमारी में कभी-कभी घातक रूप से सारे शरीर में रक्त स्राव होने लगता है। यह एक ऐसी बीमारी जिसे महामारी के रूप में देखा जाता है। बच्चों में वयस्कों के मुकाबले इस बीमारी की तीव्रता अधिक होती है यूरोप महाद्वीप को छोड़कर यह बीमारी पूरे विश्व में होती है। डेंगू में मृत्यु दर लगभग 1% होती है। यह बरसात के मौसम में तेजी से फैलता है। साधारणत: गर्मी के मौसम में जब मच्छरों की जनसंख्या अपने चरम सीमा पर होती है तो यह रोग महामारी का रूप ले लेता है।

डेंगू के क्या है कारण (What is the Causes of Dengue) ?

डेंगू एक प्रकार के वायरस “डेंगू” द्वारा होता है। इसे डेन वायरस भी कहा जाता है यह चार प्रकार केहोते है डेन- 1 डेन- 2 डेन- 3 डेन- 4। ये फ्लैवि वायरस गण तथा फ्लेविविराइड परिवार के होते हैं। जिन क्षेत्रों में मलेरिया फैलता है डेंगू भी अधिकांशत उन्हीं क्षेत्रों में फैलता है। डेंगू शहरी क्षेत्रों में अधिक फैलता है। डेंगू वायरस उष्णकटिबंधीय क्षेत्र तथा अफ्रीका में मिलते हैं।

  • डेंगू भी मलेरिया की तरह मच्छरों के काटने से फैलता है। डेंगू रोग का वाहक ‘ एडीज मच्छर’ होता है और यह दिन में काटते हैं। मच्छर के शरीर में एक बार वायरस पहुंचने पर यह पूरी जिंदगी बीमारी फैलाने में सक्षम होता है। डेंगू उस मच्छर को काटने से होता है जिसने पहले से डेंगू पीड़ित को काटा हो। डेंगू मच्छर के माध्यम से ही फैलता है ना कि संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से।
  • डेंगू के मच्छर बरसात में ज्यादा फैलते हैं यह उन जगहों पर अधिक तेजी से फैलता है जहां पानी जमा होता है।
  • यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता।
  • यदि एडीज मच्छर डेंगू से पीड़ित मरीज से खून पीता है तो मच्छर में डेंगू वायरस युक्त खून चला जाता है और जब यह मच्छर 1 हफ्ते के अंदर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो डेंगू वायरस उस व्यक्ति में प्रवेश कर जाता है।
  • डेंगू कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को जल्दी प्रभावित करता है।
  • डेंगू बुखार एक व्यक्ति को एक से अधिक बार हो सकता है।

एडीज मच्छर (Aedes Mosquito)

एडीज मच्छर काले रंग का होता है जिस पर सफेद धब्बे बने होते हैं। इसे टाइगर मच्छर भी कहा जाता है। इन मच्छरों की खासियत यह है कि यह गंदे पानी की बजाय साफ पानी में पनपते हैं। एडीज मच्छर ऐसे साफ पानी पर ब्रीड करते हैं जहां कई दिनों से हलचल न हो। जल संकाय, मछली के खुले टैंक, साफ झील आदि बरसात और बाद में इस बीमारी का स्रोत बनते हैं। बरसात में यह मच्छर गमलों,पानी के ड्रम,कूलरो, पुराने ट्यूब या टायर, फूटे मटके, जानवरों व पक्षी की हौद आदि में एकत्रित पानी में ज्यादा पाए जाते हैं।

डेंगू का संक्रमण काल कितने दिन का होता है?

डेंगू बुखार में संक्रामक काल 3 से 10 दिनों तक हो सकता है। जिस दिन डेंगू वायरस से संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो उसके लगभग 3 से 5 दिन बाद व्यक्ति में डेंगू बुखार के लक्षण प्रकट हो सकते हैं।

डेंगू के प्रकार Types of Dengue)

डेंगू बुखार तीन प्रकार के होते हैं-

  1. क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार
  2. डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS)
  3. डेंगू हेमोरेजिक बुखार (DHF)

क्लासिकल डेंगू साधारण डेंगू बुखार है जो अपने आप ठीक हो जाता है। इसमें जान जाने का खतरा नहीं रहता लेकिन अगर इसका सही उपचार नहीं होता तो यह डेंगू हेमोरेजिक बुखार या डेंगू शॉक सिंड्रोम में बदल जाता है। इसमें मरीज की मौत भी हो सकती है। इस बीमारी के गंभीर होने पर मरीज के विभिन्न जगहों से खून बहने लगता है। अतः इसका तुरंत उपचार कराना आवश्यक होता है

डेंगू के लक्षण (Symptoms of Dengue)

सामान्यतः डेंगू के लक्षण इस प्रकार हैं  – 

  1. सर के अगले हिस्से में तेज दर्द होना, आंख के पिछले भाग कमर मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना।
  2. सर्दी जुकाम के बिना ठंड एवं कपकपी के साथ अचानक तेज बुखार चढ़ना।
  3. “रोगी को 103 से 105 डिग्री हमेशा बुखार बने रहना दवा देने पर भी बुखार कम ना होना।
  4. भूख में कमी, जी मिचलाना तथा अत्यधिक कमजोरी।
  5. मुंह का स्वाद खराब होना, पेट में दर्द तथा पेट खराब होना।
  6. हल्की खांसी व गले में खराश।
  7. रक्तचाप का सामान्य से कम हो जाना एवं चक्कर आना।
  8. शरीर पर लाल गुलाबी चकत्ते बनना।
  9. 1 सप्ताह तक रोगी को पसीना दस्त व नाक से खून आने लगता है।
  10. बुखार अधिक बढ़ जाने पर रोगी के कान में दर्द और सूजन तथा फेफड़ों में सूजन आ जाती है
  11. खून में प्लेटलेट्स कम पाए जाने का लक्षण प्रकट हो तो यह गंभीर प्रकार का डेंगू हो सकता है। इसमें तत्काल उपचार कराना चाहिए।
  12. हेमोरेजिक रक्तस्राव के समय बुखार तेज हो जाता है पेट में लगातार तेज दर्द रहता है त्वाजा ठंडी पीली व चिपचिपी हो जाती है। रोगी के चेहरे और हाथ पैरों पर लाल दाने हो जाते हैं। शरीर के अंदरूनी अंगों से खून आना, नाक मुंह व मल के रास्ते खून आना, खून के बिना या खून के साथ बार-बार उल्टी, नींद के साथ व्याकुलता, लगातार चिल्लाना, मुंह का बार-बार सूखना या अधिक प्यास लगने आदि जैसे लक्षण पैदा हो जाते हैं। हेमोरेजिक डेंगू अत्यधिक खतरनाक होता है।

डेंगू का उपचार (Treatment of Dengue )

साधारण डेंगू बुखार में इसका उपचार घर पर भी किया जा सकता है क्योंकि यह बीमारी 1 से 2 हफ्ते में अपने आप ठीक हो जाती है। डेंगू का उपचार और दवाई इस प्रकार हैं-

  • बुखार के लिए पेरासिटामोल या एसिटाअमीनोफेन ले सकते हैं।
  • मरीज को सिलिसिलेट डिस्प्रिन एस्प्रिन और गैरस्टेरॉयड दवाएं कभी ना दें। यह दवाये नुकसान पहुंचा सकती है।
  • 102 से अधिक बुखार होने पर बुखार कम करने के लिए हाइड्रो थेरेपी करे।
  • खूब सारा आराम करें।
  • मुख से तरल पदार्थ देते रहना चाहिए अन्यथा जल की कमी हो सकती है।
  • डेंगू पीड़ित के रक्त परीक्षण करने पर प्लेटलेट्स की संख्या कम पाई जाती हैं।
  • डेंगू वायरस का कोई इलाज नहीं है इसकी सहायकात्मक चिकित्सा की जाती है। नए प्लेटलेट्स की पूर्ति के लिए प्लेटलेट्स का ट्रांसफ्यूजन रक्त और बड़ी मात्रा में अंतशिरा द्वारा द्रव दिया जाता है।
  • बुखार होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें डेंगू वायरस का वर्तमान में कोई इलाज नहीं है और ना ही इस बीमारी के लिए अभी तक कोई टीका ईजाद हुआ है। अतः बीमारी के लक्षण के आधार पर उपचार किया जाता है। सामान्यत: 80 से 90% मरीज 5 से 7 दिन में स्वस्थ हो जाते हैं।

डेंगू से बचाव(Prevention from Dengue )

डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है मच्छर की आबादी को रोकना। एक छोटा सा जीव, मच्छर मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। मलेरिया का मच्छर गंदे पानी में जब कि डेंगू का मच्छर साफ पानी में पनपता है- 

  • डेंगू रोकने के लिए घर और मोहल्ले में मच्छर पर नियंत्रण रखें।
  • अपने घर के अंदर या आसपास पानी इकट्ठा ना होने दें।
    *आसपास की सड़कों को जहां पानी भर जाता है अथवा गड्ढों को भर दे।
    *एयर कूलर, ड्रम, फूलदान, पौधों के गमले, पक्षियों के नहाने के स्थान हर हफ्ते खाली करके सुखाएं।
  • बरसात में मच्छरों से बचने का हर संभव प्रयास करें।
  • अधिक मच्छर होने पर मॉस्किटो रिपेलेंट का प्रयोग करें।
  • “ऐसे कपड़े पहने जिससे पूरा शरीर ढका रहे।
  • सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
  • दोपहर बाद खिड़की दरवाजे बंद रखें जिससे मच्छर का आना-जाना काम हो।
  • किसी भी बर्तन में खुला पानी ना जमने दे।

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